फिर गाजा जाकर उनकी खिदमत करो न। केवल पेपर में लिखने काम तो चलेगा नहीं @abbas_nighat | आप सब कांग्रेसी सेवा करो गाजा में पीड़ितों का। वीजा का व्यवस्था तुरंत हो जाएगा।
A must-read article by CPP Chairperson Smt. Sonia Gandhi ji in The Indian Express, reflecting on the humanitarian tragedy in Gaza and reaffirming the importance of India's voice in upholding peace, justice, and human dignity.
@SupriyaShrinate how many number of days, he attended parliament session and parliamentary commitee meeting in 2 years. Have you courage to write here? Not Bravo, its a Graveo.
Rahul Gandhi as LoP : 2 Years
▪️730 days
▪️42 Parliament speeches
▪️25 states visited
▪️297 field visits
▪️24 visits to crisis hit places like Manipur, Wayanad floods, J&K’s Poonch
▪️60+ public rallies
▪️Over 115 direct interactions with people
▪️3 big policy reversals - Caste Census, Lateral Entry, Delimitation
▪️Raised issues of Gen Z like NEET paper leak and CBSE OSM fiasco
Because his commitment is to the people, to our democracy and to our Constitution 🇮🇳🇮🇳
Bravo @RahulGandhi 👏👏
@Subhash_KB@SupriyaShrinate राहुल गांधी किस एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत बतौर नेता विपक्ष, लगातार विदेश यात्राएं करते हैं। क्या यह सवालों के घेरे में हैं या नहीं? Read and Retweet:
Why you are making issue of eggs. Soyabeans have more proteins than eggs. Bas oppose karna hai aur congressi ki feki hui haddi ko chusna hai. Shame on you.
IMPORTANT: West Bengal is reportedly dropping eggs from school mid-day meals and handing over a vegetarian-only meal contract to ISKCON. Meanwhile, states like Karnataka and Tamil Nadu are expanding nutrition for children with more protein-rich food. School meals should be guided by science and nutrition, not politics or religious preferences. Keep ideology off a child’s plate, for God’s sake. 🙏
It means that @BJP4India govt. led by Modi ji has penetrated at the right place. NGO's working against the nation have support of Congress. That's why @kcvenugopalmp has said it.
🚨 CONGRESS IN PANIC MODE!
KC Venugopal has written to PM Modi demanding immediate WITHDRAWAL of the new rules on foreign funding of NGOs 🤯
Modi Govt had tightened norms for missionary NGOs receiving foreign funds💥
Venugopal claims the rules are the "last nail in the coffin" that will turn independent NGOs into a "terrified, Govt-controlled echo chamber"
Congress is particularly furious about:
-> Heavy fines for operating outside permitted geography (calling it “highly vindictive”)
-> Mandatory DISCLOSURE of social media accounts, websites and publications (calling it “mindset of mass surveillance”)
For years, many networks operated under the guise of "social work" and "religious education". Those days are clearly ending.
अमेरिकी विदेश विभाग की वरिष्ठ अधिकारी बेथनी मॉरिसन ने कहा:
“1993 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार के तीन वर्तमान कैबिनेट मंत्री और लगभग 150 भारतीय सिविल अधिकारी अमेरिकी सरकार द्वारा प्रायोजित एक्सचेंज कार्यक्रमों का हिस्सा बने”
अब समझ में आई मोदी की अमरीकी भक्ति?
I have a VOTER ID card, but NO, it is not proof of citizenship.
I have a AADHAR card but NO, it is not proof of citizenship
I have a PAN Card, but NO, it is not proof of citizenship.
I have a PASSPORT but NO, it is not proof of citizenship.
So who will give me a CITIZENSHIP CERTIFICATE? A govt bureaucrat?
My question is simple: is the problem with the citizen, or with the Mai Baap State itself?😡
@RahulGandhi केतना माफी मांगोगे। सबसे बड़े माफीवीर तो आप ही हो। वीर सावरकर जी को केवल बदनाम करते हो। पहले झूठ बोल दो फिर माफी माँग लो । शर्म नहीं आती है क्या। मचझे नहीं पता था कि आप एकदम बेशर्म हो।
@BJP4India@rssorg
STORY | Rahul Gandhi expresses regret in defamation case filed by Shivraj Singh Chouhan's son
Congress leader Rahul Gandhi on Wednesday filed an application before the Madhya Pradesh High Court expressing regret for his allegedly defamatory statement about Union Minister Shivraj Singh Chouhan's son Kartikeya Singh.
Kartikeya Singh has filed a defamation complaint in a Bhopal court against the Leader of Opposition in the Lok Sabha. Gandhi's application, filed by his lawyer, said that his statement was not related to Singh.
READ: https://t.co/xffW0C1cpD
श्यामा प्रसाद मुखर्जी को कश्मीर जाने से रोकते हुए सुचेता कृपलानी ने कहा था - वहां न जाएं, पंडित नेहरू आपकी हत्या करवा देंगे।
क्या सचमुच सुचेता सहीं थी?
6 जुलाई 1901 को श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म हुआ और 23 जून 1953 को संदिग्ध परिस्थति में उनकी कश्मीर में मौत!
श्यामा प्रसाद मुखर्जी जब कश्मीर में जा रहे थे तो कांग्रेस अध्यक्ष रहे आचार्य जे. बी. कृपलानी की पत्नी व स्वतंत्रता सेनानी सुचेता कृपलानी ने उनसे कहा था
"'पंडित नेहरू कश्मीर से उन्हें जीवित नहीं लौटने देंगे इस लिए बेहतर होगा कि वे वहां न जाएं।''
इस पर मुखर्जी ने कहा था -
मेरी पंडित नेहरू से कोई व्यक्तिगत शत्रुता तो है नहीं, केवल नीतियों का मतभेद है।
इस पर सुचेता ने कहा -
आप शायद पंडित नेहरू की मानसिकता को नहीं जानते। वह आपको अपना सबसे प्रबल प्रतिद्वंद्वी और जनता की नजरों में उभरता हुआ विकल्प मानते हैं इसलिए वे आपको खत्म करने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।
कश्मीर में हुई मुखर्जी की संदिग्ध मौत ने सुचेता कृपलानी के अंदेशे को सही साबित कर दिया।
तो क्या श्यामा प्रसाद मुकर्जी की मौत के पीछे पंडित जवाहरलाल नेहरू थे?
मत भूलिए कि उस वक्त कश्मीर में नेहरू के मुंहलगे शेख अब्दुल्ला की सरकार थी जिन्हें खुश करने के लिए नेहरू ने कश्मीर में धारा- 370 लगाकर उन्हें लगभग संप्रभु कश्मीर का शासक बनाया था!
सुचेता और मुखर्जी के इस बातचीत की चर्चा श्याम प्रसाद मुखर्जी के अनन्य सहयोगी और उनके साथ मिलकर जनसंघ का निर्माण करने वाले बलराज मधोक ने अपनी जीवनी में किया है।
दरअसल उन दिनों कश्मीर में जाने के लिए रक्षा मंत्रालय से परमिट लेना पड़ता था। मुखर्जी का कहना था कि एक राष्ट्र में दो विधान नहीं चलेंगे। वह इस कानून को तोड़कर कश्मीर को भारत का अभिन्न अंग साबित करने पर तुले थे।
माधेपुर में रावी नदी पर बने पुल को ज्यों ही मुखर्जी ने पार कर कश्मीर में पैर रखा, शेख अब्दुल्ला की सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। उस वक्त जम्मू-कश्मीर राज्य देश के सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र से भी बाहर था इसलिए उनकी गिरफ्तारी को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती थी।
अचानक 24 जून को अखबार में यह खबर आयी कि 23 की रात को मुखर्जी की मौत हो गयी है। मुखर्जी को जेल से निकाल कर अस्पताल ले जाया गया था जहां उनकी मौत हुई।
बलराम मधोक के अनुसार, ''अस्पताल में मुखर्जी का उपचार करने वाली नर्स ने बताया था कि रात को 9 बजे डॉक्टर अलीजान ने मुखर्जी को इंजेक्शन दिया था। उस नर्स के अनुसार डॉ. मुखर्जी ने इसका विरोध किया और कहा कि उनकी तबियत पूरी तरह से ठीक है उन्हें किसी दवा या इंजेक्शन की जरूरत नहीं है। उस इंजेक्शन के लगने के एक घंटे के भीतर मुखर्जी की मौत हो गयी।''
मुखर्जी की मौत के बाद उनकी मां ने इसकी जांच की मांग करते हुए पंडित नेहरू को पत्र लिखा। यही नहीं, सभी सांसदों ने इस मौत की जांच की संयुक्त मांग की थी, लेकिन नेहरू मुखर्जी की मौत की आखिरी तक जांच कराने के लिए तैयार नहीं हुए और उन्होंने जांच नहीं ही कराया।
तो क्या सुचेता कृपलानी सही थीं ;,? कम से कम मुखर्जी की मौत की जांच न करवा कर पंडित नेहरू ने सुचेता कृपलानी के संदेह को पुख्ता आधार तो प्रदान की ही दिया था!
आज मुखर्जी के उस बलिदान के कारण ही -
कश्मीर में आप बिना परमिट जा रहे हैं।
देश का सर्वोच्च न्यालय वहां के कानून में हस्तक्षेप कर सकता है।
वहां भारतीय झंडा फहराया जा सकता है।
प्रधानमंत्री को अब मुख्यमंत्री कहा जाता है।
लेकिन मुखर्जी के बलिदान को राष्ट्र का पूरा सम्मान तभी मिलेगा जब कश्मीर से धारा- 370 को पूरी तरह से हटा कर कश्मीर का भारतीय संघ में पूर्ण विलय किया जाएगा।
एक बात और धारा- 370 थोपने के वक्त पंडित नेहरू ने यह व्यवस्था कर ली थी कि वह संविधान सभा में मौजूद न रहें ताकि सदस्यों के विरोध से वह बच जाएं। वह अमेरिका चले गए थे। गोपालस्वामी अय्यर ने जब इसे पेश किया तो समूची कांग्रेस पार्टी ने तब इसका विरोध किया था। उनके विरोध को शांत करने की जिम्मेवारी उपप्रधानमंत्री होने के नाते सरदार पटेल पर आ गयी थी। पटेल इस धर्मसंकट में फंस गए कि यदि इस प्रस्ताव को वह पलट देते हैं तो अमेरिका में बैठे भारतीय प्रधानमंत्री के पद की गरिमा की बड़ी हानि होगी। मन मारकर सरदार को इसके लिए कांग्रेस के सभी सदस्यों को सहमत करना पड़ा।
ताज्जुब होता है कि उस समय सभी कांग्रेसियों ने इसे एक अलगाववादी धारा मानते हुए इसका विरेाध किया था और आज उसी कांग्रेस पार्टी के सभी सदस्य इसके हटाए जाने की मांग को सांप्रदायिक करार देते है।
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और सोनिया गांधी
गजब की समानता है दोनों में .....
दोनों के पार्टनर एक साथ पढ़ते थे .... दोनों के पार्टनर वंशानुगत रूप से सीधे सत्ता पर बिठा दिए गए ... एक के पार्टनर के प्रधानमंत्री पिता को सेना ने फांसी पर चढ़ा दिया तो दूसरे के पार्टनर के प्रधानमंत्री मां को उग्रवादियों ने मार दिया ...
दोनों के पार्टनर अपने अपने देश के प्रधानमंत्री बने ....दोनों के पार्टनर की हत्या हो गई और जब तक इनके पार्टनर अपने-अपने देशों के प्रधानमंत्री थे अपने देश को जमकर लूटा
सोनिया गांधी ने खुद तो लूटा है अपने मायके से अपने पूरे परिवार को बुला लिया यहां तक कि अपने बचपन के दोस्त क्वात्रोची को भी बुला लिया... जब राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे उस वक्त एक कैबिनेट मंत्री को आवंटित किया जाने वाला बंगला सोनिया गांधी के दोनों बहनों के लिए आवंटित था एक बंगला इनकी मां के लिए आवंटित था और एक बंगला क्वात्रोची के लिए आवंटित था
वह भी दौर इस देश ने देखा है और गोदी मीडिया का एक वह दौर भी देखा है उस जमाने में जब सिर्फ अखबार होते थे और जिस भी अखबार ने क्वात्रोची के लूट की खबर छपी उस अखबार पर अगले ही दिन छापे मारकर बंद करवा दिया गया
इन दोनों की अगली पीढ़ी में भी पूरी तरह से समानता है... दोनों के बेटे एकदम पप्पू है और दोनों के बेटे सीधे वंशानुगत रूप से अपने अपने देश का हर कीमत पर प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं...