पश्चिम बंगाल में तो घुसपैठ से जनसांख्यिकी परिवर्तन प्रमुखता से हो रही थी।
परन्तु केरल में उससे भी अधिक चिंताजनक स्थिति है।
पहले हिन्दुओं को जातियों में बांटा गया
और फिर धर्मांतरित किया गया।
सोचो ये ही सफल Strategy आपके राज्य में भी तो चल रही है।
कौन जात हो??
जिस गति से हिन्दुओं का धर्मांतरण हो रहा है,
यदि इसको रोका नहीं गया तो समझ लीजिये
वो दिन दूर नहीं
जब आपकी आने वाली पीढ़ियां इस्लामिक राष्ट्र के नागरिक कहलाये जाएंगे।
सोचिए! प्रभु श्री राम जी की भूमि पर कोई रामचरितमानस के पाठ को कैसे रुकवा सकता है।
ऐसा ही कुछ हुआ करता था,
कुछ वर्ष पूर्व यूपी में....
अब भगवाराज में किसी माई के लाल में दम है तो रुकवा के दिखा दे।
ये है हिंदु एकजुटता का परिणाम....
पर ये तभी तक है, जब तक बटे नहीं है।
गुजरात बजरंग दल का AIMIM नेता को जवाब
4 नहीं 400 लव जिहाद करने वाले मुस्लिम
युवाओं को पीटा और नागिन डांस भी करवाया।
हिंदू बहन बेटी के साथ कोई गलत करेगा तो उसे
भुगतना पड़ेगा...🔥💪
ये लोग वैसे तोे हमारी धार्मिक मान्यताओं व परम्पराओं का विरोध करते हैं,
जबकि अधिकांश कार्य इन्होने हमारे वाले Copy/Paste करके चलाये हुए हैं।
मजहब है या मज़ाक??
बाबा साहब की दृष्टि कम से कम समकालीन नेताओं से तो तीक्ष्ण ही थी।
उनकी बात अगर तभी सुनी गई होती तो देश इस स्थिति में नहीं होता।
उन्होंने 50 के दशक में ही इस्लामी Jiहाद के खतरे से देश को सचेत किया था।
'मुसलमान बनो, स्कॉलरशिप पाओ!'
"मेरा नाम आयुष है, अगर मेरा नाम अल्ताफ होता तो मुझे स्कॉलरशिप मिल जाता"
ये बांग्लादेश नहीं, उसी पश्चिम बंगाल की बात हो रही है ,
जो भारत का एक राज्य है।
सनातन धर्म पूर्ण रूप से विज्ञान पर आधारित है...
एक लड़की की जब विवाह के समय विदाई होती है तो वो चावल पीछे की तरफ़ क्यों फेंकती है ?
और ससुराल में पहला कदम रखते समय चावल से भरा लोटा अंदर क्यों गिराती है ?
इसके पीछे क्या कारण है ?
क्या हमने कभी सोचा ?
ममता ने जो अपनी घुसपैठियों वाले वोटबैंक की मशीनरी बनायीं हुई थी,
उसको SIR ने पूर्णतया ध्वस्त कर दिया,
वो भी बिना किसी बल को प्रयोग किये।
सेना बॉर्डर पर सचेत है, और चुनाव आयोग अंदर सफाई अभियान चला रहा है।
फिर ममता बानो और उसके आतंकियों का विलाप तो स्वाभाविक है।
धर्मांतरण के Jiहाद में उनके लड़के ही नहीं,
बल्कि लड़कियां भी पूरी तरह सक्रीय हैं।
जागरूकता की आवश्यकता तो हमारे परिवारों में है।
क्यूंकि
ज्ञान के आभाव में हिन्दू बच्चे भ्रमित होकर मान लेते हैं की-
प्रभु श्री राम मांसाहारी थे
या
शिव जी का माता सती के लिए विलाप, उनकी दुर्बलता थी।
अब वो समय नहीं रहा,
जब एक गाल पर चाँटा मारने वाले को दूसरा गाल प्रस्तुत किया जाए।
स्थिति के अनुसार नीतियों में परिवर्तन कि आवश्यकता होती है।
पहले हनुमान जी वाली नीति,
फिर राम जी वाली नीति...
परन्तु यदि सामने दुष्ट हो तो
कृष्ण जी वाली नीति ही अपनानी चाहिए।
विडंबना देखिये
1940 में मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान बनाने को कहा था
और बनाया भी
परन्तु दुर्भाग्य देखिये, 100 करोड़ सनातनियों का आज तक भारत को हिंदू राष्ट्र नहीं बना पाए..??
लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये
जो तीनों लोकों में सबसे सुंदर हैं
युद्धभूमि में धीर हैं
कमल के समान नेत्र वाले हैं
रघुवंश के नाथ है
जो दया के साक्षात् रूप और करुणा के सागर है
उन श्रीरामचंद्रजी की मैं शरण लेता हूं
ये जो घुसपैठियों की समस्या है
इसका सही समाधान क्या है ?
इनका आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर कार्ड इत्यादि कौन बनवाता है।
एक बार इस पूरे सिस्टम पर कठोर कार्यवाही हो जाए तो ये समस्या जड़ से समाप्त हो जायेगी।
ये कौन लोग हैं जो अपना धर्म छोड़ने को तैयार हो जाते हैं?
जब लोग अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं से कट जाते हैं तो ऐसे निर्णय सामने आते हैं।
घर में माता-पिता द्वारा बच्चों को बाल्यावस्था से ही सनातन संस्कृति का ज्ञान देना चाहिए।
ताकि वे ज्ञान व संस्कृति को ठीक से समझ सकें।