21 वर्ष पहले मोर्रिस्विल, नॉर्थ कैरोलाइना में मैंने रामलीला शुरू करने की कल्पना की, स्क्रिप्ट लिखी हिन्दी विकास मंडल के द्वारा शुरू की हुई रामलीला अब वृहत स्तर पर होती है। हज़ारों में लोग आते हैं... रामलीला का निर्देशन भी मैं करती हूँ। इस वर्ष 24 अक्टूबर को रामलीला हो रही है...
पंकज वीरे, आपको जन्मदिन पर ढेर सारा प्यार और आशीर्वाद ! आप लेखन जगत् में निरंतर ऊँचाइयाँ छूते रहें। ईश्वर आपको स्वस्थ और सदा सुखी रखे...यह बहन इस वर्ष जन्मदिन का रिटर्न गिफ्ट आपसे चाहती है, एक कहानी संग्रह और अगले वर्ष एक उपन्यास...
एक और पीऍच.डी
कोई भी ख़ुशी मिलती है आपसे साझा करती हूँ...मेरे और सुषम बेदी के साहित्य पर Vellore Institute of Technology (VIT ) में Subha R ने पीऍच.डी की है। कल ही पता चला।
पंजाब के समाचार पत्रों में कहानी संग्रह ' खिड़कियां 'चों झंकड़ियाँ अखां ' के विमोचन की रिपोर्ट छपी। डॉ. अममरजीत कोंके ने मेरी कहानियों का पंजाबी में अनुवाद कर कहानी संग्रह ' खिड़कियां 'चों झंकड़ियाँ अखां ' प्रकाशित करवाया है, उसका विमोचन लोक साहित्य संगम, राजपुरा ने किया।
ख़ुशी साझा करना चाहती हूँ...
पंजाबी और हिन्दी के प्रतिष्ठित कवि, कहानीकार और अनुवादक डॉ. अमरजीत कोंके ने मेरी कहानियों का पंजाबी में अनुवाद किया है और प्रतीक पब्लिकेशन ने उनका 'खिड़कीआं चों झाकदीयां अखां' (खिड़कियों से झाँकती आँखें ) पुस्तक के रूप में प्रकाशन किया है।
पंकज सुबीर की जब भी कोई नई कहानी छपती है तो झट से पढ़ने की इच्छा होती है। पता होता है कुछ नया पढ़ने को मिलेगा। क़िस्सागोई का भी अलग अंदाज़ मिलेगा। जानकीपुल में छपी कहानी “मौसम बेचने वाला” पढ़ी।
पर्यावरण पर एक अनूठी कहानी…
डॉ. बशीर बद्र आप कहीं नहीं गए-
उदास आँखों से आँसू नहीं निकलते हैं,
ये मोतियों की तरह सीपियों में पलते हैं
अपने काव्य संग्रह ''धूप से रूठी चाँदनी'' को जब-जब देखूंगी, आपकी याद आएगी।शिवना प्रकाशन के कार्यक्रम में आपने इसका विमोचन किया था...
मित्रो,
गृहस्वामिनी पत्रिका के दस वर्ष पूर्ण होने पर हार्ड कॉपी में पत्रिका का प्रकाशन हुआ और इसमें मेरी कहानी 'जाने अनजाने गुनाह' प्रकाशित हुई है। हार्दिक आभार अर्पणा संत सिंह, जिन्होंने मेरी कहानी पूरी होने का इंतज़ार किया और फिर उसे प्रकाशित किया।
मेरे कहानी संग्रह 'खिड़कियों से झाँकती ऑंखें' का रूमी लस्कर ने असामी में अनुवाद किया-'खिरिकीरे जुमी थका सकुवोर' और इसका विमोचन हुआ बेबेजिया उच्चतर माध्यमिक बालिका विद्यालय ,नगाँव में ৷ विमोचन अध्यक्ष उपेन बरा और वरिष्ठ विज्ञान शिक्षक रबीन चन्द्र द्बारा किया गया था ৷
कभी- कभी अचानक कोई खुशखबरी मिलती है, उसे साझा करने को दिल करता है। रूमा लस्कर ने मेरे कहानी संग्रह ''खिड़कियों से झाँकती आँखें'' का आसामी में अनुवाद किया है ''खिरिकीरे जुमि थका सकुवोर''।
शिवना साहित्य समागम में 'एक ख़ला है सीने में' ट्रांस्जेंडर पर संपादित मेरी पुस्तक और ट्रांस्जेंडर पर लिखा नीलिमा शर्मा का उपन्यास 'सुर' का विमोचन किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर संजना सखी, पंकज सुबीर, नीलिमा शर्मा, पंखुरी पुरोहित और पारुल सिंह ने किया।
शिवना साहित्य समागम में मैं कुछ कारणों से पहुँच नहीं पाई पर मेरी पुस्तक 'विचार और समय' का विमोचन प्रतिष्ठित और लोकप्रिय विभूतियों ने किया- निशब्द हूँ! दाएं से बाएं यशपाल शर्मा, डॉ. ज्ञान चतुर्वेदी, दिव्या माथुर, मनीषा कुलश्रेष्ठ, पंकज सुबीर एवं पंखुरी पुरोहित।
मित्रो, संरक्षक तथा प्रमुख संपादक सुधा ओम ढींगरा एवं संपादक पंकज सुबीर के संपादन में वैश्विक हिन्दी चिंतन की अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका विभोम-स्वर का वर्ष : 10, अंक : 40 जनवरी-मार्च 2026 अंक अब उपलब्ध है।
हार्दिक आभार जय प्रकाश पाण्डेय जी- 'साहित्य तक: बुक कैफे' में 2025 के टॉप 10 कहानी संग्रहों की सूची में मेरे द्वारा संपादित कहानी संग्रह 'एक ख़ला है सीने में' को शामिल करने के लिए।