सब कुछ आपके सामने है। यूपी में वोटर लिस्ट तो आंध्र में नोमिनेशन रोको अभियान। इस तरह से चुनाव हो रहा है। इसे भी सही ठहराने के लिए लोग सत्तर के दशक की कहानी खोज लाएंगे।
लगता है चुनाव आयोग को नींद की गोली खिलाकर, एमएलसी चुनाव के मतदान केंद्र पर, ये भाजपाई और उनके संगी-साथी फतेहपुर में बूथ लूटने आए हैं।
आज चुनाव आयोग का अवकाश का दिन है क्या?
चुनाव आयोग से कोई अपील नहीं क्योंकि अपील उससे की जाती है जिससे कोई उम्मीद हो।
हम पूरे प्रदेश में ऐसे वीडियो रिकॉर्ड कर रहे हैं व इनके आधार पर चुनाव व्यवस्था में घपलाकर रहे अधिकारियों पर एफ़आइआर करवाएंगे चाहे वो चुनाव आयोग के अधिकारी-कर्मचारी हों या उप्र प्रशासन के।
घोर निंदनीय!
ये भारत की पहली ऐसी महिला बन गई हैं जिनके बच्चें के नाम के पीछे पिता का नहीं बल्कि इनका नाम जुड़ा हुआ हैं!
जब इनके बच्चे का जन्म हुआ था तभी इनका पति हॉस्पिटल में ही छोड़ के चला गया था,
जिसके बाद इन्होंने फैसला किया कि अब ये अपने बच्चें को पिता का नाम नहीं देंगी,
और अब काफी भागदौड़ के बाद हर डॉक्यूमेंट में , यहां तक कि बच्चें के पासपोर्ट में भी अपना नाम लगा दिया हैं।
आंध्र प्रदेश में निकाय चुनाव नामांकन के दौरान पूर्व मंत्री विदादला रजनी को पुलिस ने कथित तौर पर धक्का दे कर गिरा दिया
◆ YSRCP ने वीडियो शेयर कर चुनाव आयोग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है
◆ पार्टी के मुताबिक, यह घटना तब हुई, जब रजनी अपने घर पर पार्टी उम्मीदवारों को बी-फॉर्म दे रही थीं, पार्टी ने राज्य चुनाव आयोग से मामले में कार्रवाई की मांग की है
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खड़गे जी और प्रियांक जी दलित समुदाय से आने वाले देश के मज़बूत लीडर्स में शामिल हैं।
क्योंकि वे दलित समुदाय से आते हैं, 🦜 त्रिवेदी उनके लिए जिस शब्दावली का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसकी सूची:
ग़ुलामी की मानसिकता में पैवस्त (धँसे हुए)
मार्क्स की “अवैध” मानसिक संतानें
अवैध संतान क्या होती है, त्रिवेदी?
यह भाषा आपके लिए कोई इस्तेमाल करे, तो कैसा महसूस करेंगे?
दलितों को “मानसिक ग़ुलाम” बोलने की आदत कब जाएगी, संघियों?
नेहा बोरा को दिल्ली हाई कोर्ट से झटका मिला है. 10,000 के पीस बॉन्ड नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया गया.
दिल्ली पुलिस ने नेहा बोरा को नोटिस जारी किया कि वो 10,000 का निजी बॉन्ड और एक जमानतदार दे.
नेहा बोरा ने पुलिस के इस नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी. नेहा बोरा का तर्क था प्रदर्शन शांतिपूर्ण था. पुलिस का आरोप बेबुनियाद है. लेकिन हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी.
अगर नेहा बोरा ने 10,000 का बॉन्ड साइन किया और प्रदर्शन में शामिल हुई तो उन पर वही कार्यवाही होगी जो CJP नेता आशुतोष और सैराव पर हुई. क्या सरकार ने नेहा बोरा और CJP नेताओं पर नकेल कस कर प्रदर्शन को कमजोर कर दिया है ?
नेहा बोरा बॉन्ड साइन नही करना चाहती. उन्हें पता है अगर पीस बॉन्ड साइन एक बार कर दिया तो वो पहली की तरह बिना परमिशन के प्रदर्शन नही कर पाएंगी. अब नेहा सुप्रीम कोर्ट जाएंगी या ?
चुनाव चुनाव चुनाव। जब देश में है जी-प्रिंटर तो क्यों हो रहे हैं चुनाव। प्रिंट कमांड दीजिए, जी-प्रिंटर मनचाहा रिजल्ट दे देगा। इन तस्वीरों के साथ 2047 तक की यात्रा तय की जा रही है?
केंद्र की मोदी सरकार की बैसाखी बने चंद्रबाबू नायडू इस तरह जीतना चाहते हैं. ये दृश्य आंध्र प्रदेश के लोकल बॉडी इलेक्शन का है. चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट उन्हें जीतने दे रहा है, जवाब दें.
एक नेता ने सार्वजनिक रूप से मनुस्मृति जलाई थी, खुलेआम जाति से पंगा लिया था. पूरे देश ने उन्हें झुककर सलाम किया और संविधान लिखने का दायित्व सौंपा. वह शख्स भारत रत्न से आगे बढ़कर विश्वरत्न बना चुका है.
दूसरे नेता ने समझौते का रास्ता चुना. हालांकि वह अपने दौरे का सबसे योग्य प्रशासक था और उसके नेतृत्व में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध जीता गया. लेकिन देश उन्हें लगभग भूल चुका है.
पोंगापंथी ब्राह्मण ग्रंथों को जलाने की बडी महिमा है. पहले नेता को दुनिया बाबा साहेब के नाम से जानती है और दूसरे नेता का नाम था बाबू जगजीवन राम.
सभी जाति के लोग एक सुर में मानते हैँ कि
वोट चोरी हो रही है देश में,
लेकिन 52 वोट चोरी को ना सिर्फ डिनाई करते हैं,
बल्कि वोट चोरी को डिफेंड भी करते हैं,
और वोट चोरी के खिलाफ लड़ने वाले, लोकतंत्र बचाने वालों को गाली देते हैं,
ऐसे में कोई ये सोचे कि 52 कमलाबाई को छोड़कर उसे वोट दे देगा,
तो वो नादान है,
लखनऊ नॉर्थ में एक लाख से ज्यादा मुसलमान और दो लाख से ज्यादा बहुजन वोटर है,
अगर कोई 52 जो अपनी जात के 500 वोट भी ना ला सकता हो,
और वो मुसलमान, बहुजन वोट से विधायक बनने का सपना देख रहा है,
तो सपने से जाग जाए,
मेरे रहते ये संभव नहीं,
मैं नहीं होने दूंगा,
ये भयानक है। बिहार यूपी से भी बदतर चुनाव लूट आंध्र प्रदेश में की जा रही है।
आख़िर ये नौबत क्यों आई गई कि चंद्र बाबू नायडू को मोदी-शाह की तरह चुनाव लूटने की ज़रूरत पड़ने लगी?
क्या भाई साल में ही लोगों की नाराज़गी इतनी बढ़ गई है कि उनकी पार्टी स्थानीय निकायों के चुनाव को लेकर भी आश्वस्त नहीं है?
और ये हाल तब है जब सुप्रीम कोर्ट ने जगन मोहन रेड्डी की याचिका पर आदेश दिया था कि प्रत्याशियों को नामांकन पत्र भरने से न रोका जाए।
जब एंकर बनने का पैमाना मेकअप और रंग हो तो ऐसे मेरिट तैयार होते है!
सौरभ दास 27 साल के है, वो उम्र की परिभाषा से Gen Z है। लेकिन किसी एंकर ने ये सवाल तक भी उठाया कि जज को खुद Gen Z की परिभाषा मालूम नहीं है।
दूसरा, अदालत को ऐसे कॉमेंट करने की क्या जरूरत? इसपे कोई आलोचनात्मक टिप्पणी क्यों नहीं?
समझ में नही आ रहा है पृथ्वी गोल गोल घूम रही है या उल्टी दिशा में घूम रही है.
मुंबई की मेयर के कार्यालय, दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट और अभिनेता अमिताभ1 को निशाना बनाने की धमकी दी गयी है.
धमकी भरा ईमेल मिलने के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गयी है.
दिलजीत दोसांझ का कॉन्सर्ट 27 नवंबर को मुंबई के महालक्ष्मी रेसकोर्स में होना है.
एक दौर था जब अमिताभ बच्चन को सबसे सुरक्षित कलाकार माना जाता था. 84 साल के महानायक अमिताभ बच्चन को निशाना बनाने की धमकी क्यों दी जा रही है ?
धमकी केवल कलाकारों को ही क्यों दी जा रही है. कलाकार ना किसी पद हैं और किसी प्रशासनिक भूमिका में हैं. ना ही किसी काम के लिए जिम्मेदार हैं.
धमकियों के जरिए डर फैलाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए.
अब सब कुछ सामने आ चुका है, खेल बड़ा चल रहा था !
और कितने सबूत चाहिए देशवासियों को !
अब तो शर्म आ गई होगी, इस्तीफ़ा दे दो ज्ञानेश कुमार साहब
भारत निर्वाचन आयोग के भीतर मतभेदों के एक असामान्य रूप से बढ़ने का मामला सामने आया है।
'सूचना का अधिकार' (RTI) कानून के तहत जारी किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि दोनों चुनाव आयुक्तों , डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी ने 29 जुलाई, 2026 को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखे थे। इन पत्रों में उन्होंने आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के कामकाज के तरीके पर आपत्ति जताई है और उनके खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग की है।