لَا إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّٰهُ مُحَمَّدٌ رَسُولُ ٱللَّٰهِ
Electric technician ⚡
NAME 🇮🇳مسلمان
CREATOR اللہ🕋
IDEAL😍: محمد صلی اللہ علیہ والہ وسلم
HOLLY BOOK😌 قران
सौरभ दास और आशुतोष रंका को 5 दिन के लिए जेल में नहीं भेजा है बल्कि पूरे हिंदुस्तान के लोगों के वोटिंग अधिकार को आपने जूडिशियल कस्टडी में भेजा है।
: Neha Bora
"इलेक्शन से पहले अमित शाह कैसे बता सकते हैं कि चुनाव का नतीजा क्या होने वाला है,
इससे साफ पता चलता है कि यह लोग चुनाव में बेईमानी करवाते हैं।"
: अभिजीत दीपके
ज्ञानेश कुमार को लगा था कि SIR के नाम पर करोड़ों लोगों के वोट काट देंगे। जो कहानी सुनाएँगे, जनता सुनकर सो जाएगी? पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए समय नहीं था मगर SIR करना ही था। प्रक्रियाओं और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आड़ में वोट छीनने के अपराध से बच नहीं सकते। शर्म आनी चाहिए कि उनके इस्तीफ़े, SIR रद्द करने की माँग को लेकर जनता सड़क पर है। पिछले साल राहुल गांधी ने शालीन शब्दों में महादेवपुरा और अलंद में वोट चोरी का उदाहरण दिया था तब ज्ञानेश कूमार प्रेस कांफ्रेंस करने आए और राहुल गांधी से हलफनामा और माफीनामा मांगने लगे थे। इस बार राहुल गांधी ज्ञानेश कुमार को चोर बोल रहे हैं, ज्ञानेश कुमार चुप हैं। क्योंकि जनता को चोरी की यह कहानी समझ आ गई है। यह दिन भी देखना था। चुनाव आयुक्त इस देश के हीरो हुआ करते थे, आज उन्हें चोर कहा जा रहा है।
बैंक कर्मचारी हड़ताल पर हैं। कारण पूछने पर यही लगा कि जिस बैंक की नौकरी को अच्छी नौकरी में गिना जाता था, उसकी हालत बदतर हो गई है। टारगेट के नाम पर कर्मचारी देर शाम तक रोके जाते हैं, छुट्टी नहीं दी जाती है,
तनाव रोज़ का हिस्सा है। काम करने की जगह भी अच्छी नहीं है। ऐसा लगता है कि बैंकर को सज़ा दी जा रही है कि उन्होंने बैंक की नौकरी क्यों की। लोगों ने बताया कि अत्यधिक तनाव के कारण बीमारियाँ होने लगी हैं।
एक बैंकर ने यह भी बताया-
सुबह 8:00 बजे घर से निकलने वाला बैंकर रात को 8:00 या 9:00 बजे के बाद ही घर लौट पाता है, क्योंकि एनपीए (NPA - गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) को रोकने का भारी दबाव होता है। हर खाते की मंथली ईएमआई (EMI) होती है, और यदि वह 90 दिनों तक जमा न हो, तो खाता एनपीए हो जाता है। ऐसे में रीजनल ऑफिस से ब्रांच हेड पर दबाव आता है कि यह खाता आज किसी भी हाल में एनपीए नहीं होना चाहिए। पहले केवल महीने की आखिरी तारीख को एनपीए रोकने का दबाव होता था, लेकिन अब हर सिंगल डे (प्रतिदिन) यह प्रेशर रहता है।
रात के 9:00 बज रहे होते हैं और रीजनल ऑफिस से फोन आता है कि "किसी भी तरह इस खाते को बचाइए।" थक-हारकर जब ब्रांच हेड को लगता है कि उसे अब घर जाना चाहिए, तो वह अपनी जेब से 2,000, 4,000 या 10,000 रुपये तक की ईएमआई खुद भर देता है। बाद में ग्राहक वह पैसा लौटाता नहीं है, जिससे बैंक मैनेजर के अपने पैसे डूब जाते हैं।
बैंक में दिनभर कई तरह के मानसिक तनाव झेलने पड़ते हैं। आपको रिकवरी के लिए फील्ड में निकलना होता है। वहाँ कोई ग्राहक आपको ब्लैकमेल करता है कि "मेरे घर मत आओ, नहीं तो मैं पैसा जमा नहीं करूँगा, सिर्फ़ फोन पर बात करो।" फोन पर बात करने के दौरान ग्राहक कभी-कभी अभद्र और गाली-गलौज वाली भाषा का प्रयोग करते हैं। उस तनाव में यदि मैनेजर के मुँह से गलती से भी कोई गलत बात निकल गई, तो ग्राहक उसकी कॉल रिकॉर्डिंग करके ब्लैकमेल करने लगता है।
कृपया बैंकर की बात सुनें । कोई रास्ता निकालें।
सोचिए सिर्फ एक पत्रकार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से एक सवाल क्या पूछ लिया,
उनको कितना प्रताड़ित किया जा रहा है,
देश आज अघोषित आपातकाल की स्थिति से गुजर रहा है,
अब इस देश के युवा ही इस बदहाल स्थिति को सुधार सकते हैं।
आजादी का मतलब
आजादी सिर्फ अंग्रेज़ों से मुक्ति का नाम नहीं है।
आजादी का मतलब है हर नागरिक को बराबरी का अधिकार मिले, हर बच्चे को शिक्षा मिले, हर युवा को रोजगार का अवसर मिले और हर इंसान बिना डर के अपनी बात कह सके।
आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर एक बेहतर भारत बनाने का संकल्प लें।
जय हिंद....