मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूँ,
वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ।
एक जंगल है तेरी आँखों में,
मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ।
तू किसी रेल-सी गुज़रती है,
मैं किसी पुल-सा थरथराता हूँ।
-ARVIND KUMAR YADAV
@PiyushGoyal@narendramodi@GM_CRly@DrmSolapur जी हकीकत तो यह है कि मेरी भी शादी असिस्टेंट लोको पायलट की जॉइनिंग के बाद ही होगी रिश्ते वाले आते हैं जॉइनिंग कब होगी पूछ कर चले जाते हैं