मैंने पूर्व में भी कहा था और आज पुनः दोहरा रहा हूँ कि यदि राजस्थान के मुख्यमंत्री का काफिला निकलने के कारण किसी आमजन का ठेला पलट जाए और एक बेटी खौलते पानी से गंभीर रूप से झुलस जाए, तो यह किसी भी संवेदनशील शासन के लिए गंभीर चिंतन का विषय होना चाहिए। दुर्भाग्यवश, मुख्यमंत्री स्वयं इस मामले में संवेदनहीन दिखाई दे रहे है। चूँकि यह मामला मुख्यमंत्री के काफिले से जुड़ा है, ऐसे में यदि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा में थोड़ी भी नैतिक संवेदनशीलता होती, तो वे गंभीर रूप से झुलसी उस बेटी की सुध लेते तथा उसके समुचित उपचार की व्यवस्था करवाते। किंतु सत्ता के अहंकार में डूबी सरकार को मानवीय मूल्यों और संवेदनाओं का शायद एहसास ही नहीं है।
जाँच के नाम पर मात्र खानापूर्ति कर मामले को दबाने का प्रयास करने के बजाय दोषी पुलिस अधिकारियों एवं कार्मिकों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए थी तथा पीड़ित बेटी के उपचार स्वयं मुख्यमंत्री को करवाना चाहिए था किंतु जिनकी सोच और कार्यशैली में ही संवेदनहीनता व्याप्त हो, उनसे पीड़ितों के दर्द और जनता की भावनाओं को समझने की अपेक्षा करना कठिन प्रतीत होता है।
@BhajanlalBjp@RajCMO
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए
लड़ाई जारी रहेगी..
#SSC_System_Sudharo