जैसलमेर औरण बचाव पदयात्रा में भाजपा जिला अध्यक्ष शामिल हुए।
शामिल होने के बाद सुमेर सिंह जी ने उनकी आंखों में आंखें डालकर जो सच्चाई बताइए उनके भी हवा टाइट हो गई
यही होता है जनता का पावर जब तक गुलामी करोगे तब तक अपने अधिकार नहीं ले पाओगे।
#ओरण_बचाओ_पदयात्रा
23 फरवरी, जोधपुर चलो, ओरण संरक्षण जन आक्रोश रैली कलेक्ट्रेट जोधपुर, दोपहर 3:00 बजे ...... ओरण की आवाज बनो, गायों की पुकार बनो, मंदिरों की ललकार सुनो ...... टीम ओरण जैसलमेर
कितना अजीब देश है मेरा…..!!!
पूरी दुनिया ग्लोबल वॉर्मिंग से बचने के रास्ते खोज रही है…
ग्रीन एनर्जी, सोलर, हाइड्रोजन जैसे विकल्पों की और भाग रही है….
और हमने जिन लोगों पर इन सबकी ज़िम्मेदारी सौंपी थी…
वो एयरकंडिशनर कमरों में बैठकर…
कभी जंगल काटने के फ़रमान जारी कर रहे हैं…
कभी ओरण, गोचर, तालाब पर क़ब्ज़े के फ़रमान जारी कर रहे हैं…
और जनता ने इसे ही अपनी नियति मान लिया है…
वाह रे मेरे देश के ज़िम्मेदारों… किस मिट्टी के बने हो तुम…
रेगिस्तान की तपती रेत पर जहाँ हवा भी अंगारों की तरह चलती है… वहाँ एक आदमी खड़ा है....
न हाथ में सत्ता, न जेब में दौलत… फिर भी पूरी व्यवस्था की नींद हराम किए हुए....
"नाम सुमेर सिंह भाटी साँवता......"
न कोई आलीशान बंगला.... न हाईवे पर होटल...
न शहर में प्लॉट...
सिर पर पगड़ी… पास में दो जोड़ी कपड़े… पैरों में भारी सी जूती…
और दिल में धधकती हुई ओरण बचाने की आग....
सोशल मीडिया खोलिए... न सेल्फी, न स्टेटस, न राजनीतिक बयानबाज़ी....
सिर्फ पेड़-पौधे… पक्षियों की उड़ान… ऊंटों की चाल… बकरियों की मासूम आँखें…
जिस दौर में लोग लाइक और फॉलोवर के पीछे भाग रहे हैं.... ये आदमी प्रकृति के पीछे भाग रहा है...
जिस देश में पद पहचान बन गया है... वो बिना पद के पहाड़ बन गया है....
ओरण सिर्फ जमीन नहीं होती... वो गाँव की साँस होती है... वो पशुओं का पेट है... वो पक्षियों का घर है.... वो आने वाली पीढ़ियों की ऑक्सीजन है....
लेकिन जब लालच की बुलडोज़र चलती है... तो सबसे पहले ओरण कुचली जाती है.....
और यहीं खड़ा हो जाता है एक अकेला आदमी.....
न कोई पार्टी… न कोई फंडिंग… न कोई सरकारी गाड़ी… बस एक पगड़ी… और सीना तानकर खड़ा सच....
सरकार कंफ्यूज है... IT सेल कंफ्यूज है....
क्योंकि ये आदमी बिकता नहीं... डरता नहीं... झुकता नहीं....
उसके पास न घोटाले हैं.. न फाइलें, न बैंक बैलेंस..
उस पर आरोप लगाने को कुछ है ही नहीं....
जिसे बदनाम नहीं कर सकते... जिसे खरीद नहीं सकते....
जिसे डरा नहीं सकते .... उसका करें तो करें क्या...?
आज नेताओं के जमे जमाए करियर हिल रहे हैं....
क्योंकि एक आदमी ने दिखा दिया सत्ता से बड़ा भी कुछ होता है.....
वो है धरती....वो है प्रकृति...
वो है आने वाली पीढ़ियों का अधिकार....
ये लड़ाई सिर्फ सुमेर सिंह की नहीं है....
ये लड़ाई उस हर किसान की है.... जो अपने पशुओं के लिए चरागाह बचाना चाहता है....
ये लड़ाई उस हर बच्चे की है जिसे पेड़ों की छाँव में खेलना है....
ये लड़ाई उस हर इंसान की है जो सांस लेना चाहता है… जिंदा रहना चाहता है....
क्रांति हमेशा बंदूक से नहीं होती... कभी कभी क्रांति
पगड़ी बाँधकर....
जूती पहनकर... रेत पर खड़े होकर भी होती है...
सुमेर सिंह भाटी साँवता.. आप सिर्फ एक नाम नहीं… एक विचार हैं....
और विचारों को न IT सेल रोक सकती है.... न सत्ता दबा सकती है..
ओरण बचेगी.. तो संस्कृति बचेगी..
ओरण बचेगी... तो भविष्य बचेगा...
अब फैसला हमारा है... हम तमाशबीन बनेंगे…
या इस आग में अपनी आवाज़ भी जोड़ेंगे....?
आज जैसलमेर की तप्त धरा पर भोपाल सिंह जी झालोरा को सुना और उनकी आँखों में छाई उदासी को देखा सच मानिए, हृदय कचोट उठा.... जिस माटी के लिए हमारे पूर्वजों ने अपना रक्त बहाया, आज उसी विरासत को बचाने के लिए हमारे लोगों को गुहार लगानी पड़ रही है।
क्या इसीलिए हमारे पूर्वजों ने अपना शीश कटाया था क्या इसीलिए उन्होंने इन औरण और गोचर जमीनों को अपने खून से सींचा था....कि एक दिन सत्ता और स्वार्थ की भूख हमारी इस पवित्र विरासत को लील जाए...
मौन क्यों हैं हमारे प्रतिनिधि जिन्हें हमने अपनी आवाज बनाया, वे आज जैसलमेर की इस पुकार पर मौन क्यों हैं???
बलिदान का अपमान क्यों हमारे पूर्वजों ने औरण और गोचर भूमि को अपनी संतानों की तरह संजोया और संरक्षित किया क्या आज की सरकारें और जन प्रतिनिधि इतने संवेदनहीन हो गए हैं कि उन्हें यह बलिदान दिखाई नहीं देता???
विकास या विनाश सौर ऊर्जा और औद्योगिक विस्तार के नाम पर हमारी पवित्र औरण भूमि को हड़पना कहां का न्याय है? क्या हमारी पारिस्थिति की और पशुधन की बलि देकर ही 'विकास' होगा??
मौन क्यों हैं हमारे प्रतिनिधि? जिन्हें हमने अपनी आवाज बनाया, वे आज जैसलमेर की इस पुकार पर मौन क्यों हैं???
राजस्थान सरकार, होश में आओ और हमारी औरण-गोचर को बक्श दो यह हमारे पुरखों के बलिदान से रखी हुई जमीन है हमारी औरण गोचर है, किसी कंपनी की जागीर नहीं..
भोपाल सिंह जी कहते हैं ना जैसलमेर आज तक किसी के अधीन नहीं रहा ना झुका ना झुकेगा.....
भोपाल सिंह जी की आँखों की वो नमी बेकार नहीं जाएगी वह एक और महा जन-आंदोलन की मशाल बनेगी🫵✊️🌳🌴
#ओरण_बचाओ_पद_यात्रा #ओरण_बचाओ_जैसाण_बचाओ
@bhopal_jhalora
ओरण बचाओ आंदोलन, जैसलमेर…..!!!
सैकड़ों लोग ओरण बचाने के लिए तनोट से जयपुर की यात्रा कर रहे हैं….!!
हज़ारों लोग जैसलमेर में आंदोलन पर बैठे हैं…!!
लेकिन सत्ता का घमंड देखिए….
कोई इस मुद्दे पर बात तक करने को तैयार नहीं है…
एक चिराग जिसने पश्चिमी राजस्थान की उम्मीदों को रोशनी दी !!
#ओरण_बचाओ_पदयात्रा नाम की लौह जलाने वाले, एक सामान्य गरीब परिवार में जन्में #सुमेर_सिंह_भाटी के आंदोलन को इतिहास के स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा।
नोट :- ओरण (जीव जंतुओं के लिए आरक्षित भूमि)