@BJP4Rajasthan आईदान सिंह सबसे मज़बूत स्तंभ हैं। अपनी साफ़-सुथरी छवि और लोकप्रियता के कारण वे लोगों के बीच विशेष पहचान रखते हैं। जनता का स्पष्ट मानना है कि उनके जैसा युवा नेतृत्व जैसलमेर के भविष्य को बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। @AidanSinghBJP
यदि जैसलमेर नगर परिषद के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी जीती है, तो इसका श्रेय आईदान सिंह को जाता है। मंत्री साहब ने हकीकत में भाजपा को जैसलमेर के हर क्षेत्र में मजबूत कर रखा है।" @AidanSinghBJP
लगती रही भूखों की कतार,
आज चुनाव है, क्या जो दिख नहीं रही यही कतार?
सुना है फिर से आबाद होगा मेरा शहर,
लग रही है जो वादों की कतार।
भूख आज भी वहीं खड़ी है,
बस बदल गई है नारों की बहार।
कल तक जो दिखते नहीं थे गलियों में,
आज दिख रहे हैं घर-घर दरबार।
लोकदेवता श्री हड़बूजी सांखला के अवतरण दिवस (भाद्रपद वदी षष्ठी) की हार्दिक शुभकामनाएं। इस पावन अवसर पर मुख्य धाम बैंगटी (फलोदी) एवं सांखला (जैसलमेर) में आयोजित 642वें मेले में सम्मिलित होने वाले सभी श्रद्धालुओं एवं भक्तजनों को मंगलकामनाएं।
राजस्थान के प्रमुख लोकदेवता, शकुनशास्त्र के ज्ञाता, ओरण व गौरक्षक, दीन-दुखियों व निर्बलों की जीवन पर्यंत सेवा करने वाले, चमत्कारिक सिद्धपुरुष श्री हड़बूजी सांखला (परमार) के अवतरण दिवस पर उन्हें सादर वंदन।
@shri_kys@Shri_PF#weareskpf
जन-जन के आराध्य देव, लोकदेवता श्री हड़बू जी सांखला के अवतरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
इस अवसर पर मुख्य धाम बेंगटी (फलौदी), सांखला (जैसलमेर) में लगने वाले मेले की सभी भक्तगणों को ढेरों शुभकामनाएं।
उल्फ़त भरी ज़िंदगी की
जब साँझ ढल जाए,
उफ़! ज़िंदगी के सारे मसले
काश, ओझल हो जाएँ।
थक जाए यह मन हर उलझन से,
कुछ पल सुकून के मिल जाएँ।
बस मोहब्बत की ख़ामोश चादर में,
हम और हमारी साँसें खो जाएँ।
आज संपूर्ण फ़िज़ा में बगावत की बू आ रही है,
कल तेरा सिंहासन अवश्य डोलेगा।
आज तेरे नाम के मुर्दाबाद नारों की गूँज उठ रही है,
कल तेरी हार का जनाज़ा सरेआम निकलेगा।
बेशर्मों के सामने हाथ जोड़कर,
आज़ादी की भीख माँगकर,
अपराधियों के लिए सज़ा की गुहार लगाकर,
घर में बैठकर स्वतंत्रता की उम्मीद रखकर,
शिक्षा के दलालों तक नहीं पहुँचा जा सकता।
क्यों कोई पत्थर पिघल नहीं पाता,
रह जाता आज भी हर कोई अकेला।
क्यों कोई समझ नहीं पाता,
मजबूर हूँ, खुद में ही सिमटा रह जाता।
क्यों कोई खुदा मेरी इबादत सुन नहीं पाता,
आँख उठाकर देखूं तो,
क्यों कोई नज़र मिला नहीं पाता?
सुकून की चाह में,
क्यों मैं पहाड़ों तक चल नहीं पाता?
@Dasharath5930 दशरथ सिंह जी की बदलौत आज कई युवा उनसे अभिप्रेरित होकर ऊंचाई तक पहुंच रहे है । दशरथ सिंह के साथ हम भी रहे है उनका व्यवहार बहुत मधुर है । जिन्होंने बड़ा लंबा संघर्ष किया । उन्हे हर व्यक्ति के व्यक्तित्व की अच्छी परख है । आज भी कई अभ्यर्थियों की मदद करते है ।
रविंद्र के होने से अंजाम बहुत बेहतर होंगे,
रविंद्र के आने से तुम्हारे मंसूबे अब ध्वस्त होंगे।
लूट-लूटकर तुम पूरा मारवाड़ खा चुके हो,
बड़ी-बड़ी बातें और हौसले तुम्हारे रातों-रात बिक चुके होंगे।
मर चुकी है अब तुम्हारी सियासत,
फैसले अब जनता के हाथों से होंगे।
@RavindraBhati__
क्रांति की चिनगारी भड़की है इस बार,
तेरे होने न होने से न बदला कोई विचार।
तू तख़्त की चाह में पहुँचा सत्ता के दरबार,
पर आवाम की आवाज़ न दबेगी इस बार।
ख़ुद से पूछ ज़रा, ऐ वक़्त के किरदार,
घुटने क्यों टेक दिए तूने इस बार?
#ओरण_अभी_होना_बाकी_है