@panasonic@PanasonicIndia AC installation pending 2 days. No response. Extremely disappointed. If not resolved today, will escalate to consumer forum.
Location: Meerut
Request immediate action.
Contact 9873699362
@PanasonicIndia am extremely disappointed with the service provided by Panasonic.
It has been 3 days since the delivery of my AC, but installation is still pending. When I contacted customer care contact-+918392910111 I was advised to return the AC due to unavailability of technicians.
चुप हो जा ऐ नादान-ए-मन,
दिल बड़ी तकलीफ़ में सोया है,
दिमाग तो खामोश पड़ा है,
आँखों ने चेहरे को आँसुओं से धोया है…
अंदर की बेचैनी का पता है मुझे,
मोहब्बत के दागों को,
ज़ख्मों में पिरोया है…
कविराज
मेरी खामोशियों में भी एक शोर है,
इसकी वजह तुम नहीं… कोई और है,
तू कभी मेरा था ही नहीं, न कभी होगा,
तेरे और मेरे दरमियान अब कोई और है…
सुकून नहीं मिलता दिल लगाकर कहीं,
इस ज़ख्म की दवा भी शायद कोई और है…
कविराज
कुछ अधूरी कहानी शायद कभी पूरी नहीं होती।
कुछ सपने कुछ अपने अकसर ही छूट जाते है।
मिलता वही है जो नसीब का होता है।
मन्दिरों में भी सभी ख्वाहिशें पूरी नहीं होती।
कविराज
कुछ अधूरी कहानी शायद कभी पूरी नहीं होती कुछ सपने कुछ अपने अकसर ही छूट जाते है।
मिलता वही है जो नसीब का होता है।
मन्दिरों में भी सभी ख्वाहिशें पूरी नहीं होती।
कविराज
अजनबी से हो गए थे,
शायद हमसे खफा हो गए थे…
पता नहीं कौन से कर्म किए थे मैंने,
मंज़िलें अलग थीं, फिर भी रास्ते एक हो गए थे…
जिन राहों पर मिले थे कभी,
आज उन्हीं राहों में खो गए थे…
शायद किस्मत को मिलना मंज़ूर न था,
इसलिए एक होते हुए भी दूर हो गए थे
कविराज
कुछ इश्क़ महसूस किए जाते हैं,
कुछ लोग किस्मत में नहीं होते,
फिर भी एक वादा किए जाते हैं...
हम दोनों किसी और के होते हुए भी,
रूह से एक-दूसरे के लिए जिए जाते हैं...
कविराज
मैं गागर से सागर तो नहीं भर सकता,
मगर ऐसा भी कुछ नहीं जो मैं नहीं कर सकता।
माना कि क़सूरवार है वो मेरी निगाहों में,
मगर ऐसा भी नहीं कि मैं उन्हें माफ़ नहीं कर सकता।
दौर अगर मोहब्बत का है तो रहने दो,
मैं बिना वजह तकरार नहीं कर सकता।
कविराज
बहुत दिनों बाद सुकून से सोया था,
सुबह उठा तो उन्हीं के ख़यालों में खोया था।
अरसा हुआ यूँ तो उनसे मिले हुए,
मगर कल लगा जैसे उनकी गोद में सिर रखकर सोया था।
ये एहसास खुशी का समझूँ या जज़्बात का,
मैं बहुत दिनों बाद सुकून से रोया था।
कविराज
वो हर मुश्किल में मेरा साथ देती है,
उसकी ख़ामोशी भी सौ सवालों का जवाब देती है।
थक कर जब हारने लगता हूँ मैं,
वो हर हाल में सब्र से काम लेती है।
मेरी ज़िंदगी का आधार उसी पर टिका है,
प्यार से कहता हूँ “मोटी”, नाम उसका मोनिका है।
कविराज
मेरे ना होने का एहसास होना अभी बाकी है।
इंसान का इंसान होना अभी बाकी है।
अभी तो केवल पत्थर ही तराशा है।
पत्थर का भगवान् होना अभी बाकी हैं।
रूह तो कभी की उनकी हो चुकीं
बस इस शरीर का बेजान हो जाना अभी बाकी है।
वो जो जल रहा है दीया बुझा दो उसे
सूरज का चांद हो जाना अभी बाकी है
कविराज
“कैसे कहूँ कि कहाँ जल रहा हूँ मैं,
रोज़ किस-किस अंगारों पे चल रहा हूँ मैं।
मेरा दर्द मेरा नसीब ही जानता है,
और तुम्हें लगता है, रोज़ बदल रहा हूँ मैं।”
— कविराज
क्या था मैं क्या हूँ मैं क्या से क्या हो गया।
इस दुनिया की भीड़ में जाने कहा खो गया।
जो कभी था मफ़िलो शाम।
वो चिराग अंधकार में खो गया।
अब आलम ये है सब कुछ है यहां
पर जाने क्यों फिर भी तन्हा हो गया।
कविराज
ये क्या हो रहा है।
आसमान इतना गरज गरज के क्यों रो रहा है।
लोग इसे सावन का सकून समझ रहे है। ये तो बेचैन हैं समुद्र की तलाश में।
तभी अपने आशुओं से धरा को धो रहा है।
ओर एक दिन धरा को समुद्र होना ही है।
तभी हर तरफ पानी पानी हो रहा हैं।
सबसे गंदा नेटवर्क है एक्साइटल ब्रोकबैंड का लगाते टाइम कहा कि 24*7 कस्टमर सपोर्ट है और मुझे तीन दिन हो गए एक्साइटल का बन्दा फोन बंद करके बैठा है मैने पैसे भी ott चैनल के दिए न तो चैनल ही मिला न ही नेटवर्क न ही वो बन्दा।
@excitel_rocks@excitelandTV @excitel
उसकी यादों से आज फिर दिल आहत है।
खुशी इस बात की है, उसको राहत है।
दर्द तकलीफ बेचैनी सब की सब मुझे है।
सकून है मुझे वो किसी और घर ही सही।
पर आज भी वो ही मेरी चाहत है।
कविराज!
उदास क्यों रहते हो।
खुल के जियो दोस्तो।
क्योंकि सदा खुशियां नहीं रहती।
सदा गम नही रहते।
ये दरवाजे पर किसने दस्तक दी।
अगर हो महोब्बत तो कहना।
अब हम यहां नहीं रहते।