किसी को पाने के लिए, लोग क्या क्या नहीं कह जाते है,
फिर कुछ अरसे बाद ,बिन कुछ कहे भी रह जाते है ।
अब हर लहज़े से वाकिफ़ हूँ उसके मै ,
कुछ कहने सुनने से बेहतर अब हम, चुप रह जाते है ।।
इश्क़ में इश्क़ मिल जाना शान की बात है ,वरना
इश्क़ में नाकाम लोग , खुद में ही पागल रह जाते है ।।।
कठिनाइयां कितनी भी हो ,तुझे सोच के जो हिम्मत मिल जाए ,कुछ ऐसा जुनून हो तुम।
"हर ख़ामोशी बोल पड़े"
"हर गम में मुस्कुरा दु "
मेरा वो पहला सुकून हो तुम।।।।।
💜💜जय बजरंग बली 🙏💜💜
#mystrength
जो "दुनिया है मेरी" ,वो मुझे "दुनिया" के आगे कुछ मानता नहीं था, -2
अच्छे बुरे में फर्क ,पहचानता नहीं था,
उसके आस पास सब खुश रहे, ऐसी पूरी कोशिश रहती है उसकी,
(अच्छा तो है वो)
के उसके आस पास सब खुश रहे ,ऐसी पूरी कोशिश रहती है उसकी,,
पर "मैं" भी परेशान हु , ये जानता नहीं था ।।।
दिल में रह कर दिल पे वार करते हो,
तुम इश्क ए ज़ालिम, क्या कमाल करते हो।
जहां मोहब्बत में "मरहम" बन जाया करते है आशिक –2
तुम "ज़ख्मों" का भी बुरा हाल करते हो।।।।।।
–सुमित
तेरी याद भी क्या "कमाल" करती है
के तेरी याद भी ,क्या "कमाल"करती है ,
दिल में आ के दिमाग में "सवाल" करती है।
अच्छी यादों में तो मुस्कुरा देती हूं
के अच्छी यादों में, तो मुस्कुरा देती हूं ,
ये बुरी यादें ही हैं बस, जो "मलाल" करती है ।।।।
–सुमित
काश तूने समझा होता , के
तेरा बस मेरे साथ रहना , "हाय" कितना सुकून मिलता है मुझे
वरना तेरा किसी से हस के बात करना भी जलता है मुझे
जिंदगी में कोई आए ,चला जाए कोई ग़म नहीं ,
बस एक तेरा जाना खलता है मुझे ।।
#shayarsumit
मैं किसको “कैसे” समझू? , मैं किसको “कैसा” समझू ,?
मेरे अपने जो संग है मेरे ,उनको “कितना”अपना समझूं ।?
मैं किसको “क्या” समझाऊं, या, “कैसे” खुद ही समझूं?
कोई मुझको ये समझाओ मै कब तक , कितना सबको समझूं ।?
– सुमित
#writerswork
कोई रस्ता देखूं , मैं कितना क्या सोचूं ,
कहा जाऊ या ऐसा क्या कर दूं जो सुकून मिल जाए मुझे।
मुझे वक्त बता दो , कोई एक लफ्ज़ बता दो ,
इंतेज़ार करूं या ऐसा क्या कह दूं जो तू मिल जाए मुझे।
–सुमित
#तू_मिल_जाए_मुझे