@RajeevRai Sir, you have already been informed. The administration of Mau district should take care that we completely oppose any person's personal use of our land, otherwise we will protest on our land. Thank you. @DMMau1@Uppolice@dgpup@digazamgarh@RajeevRai
@RajeevRai Sir, you have already been informed. The administration of Mau district should take care that we completely oppose any person's personal use of our land, otherwise we will protest on our land. Thank you. @DMMau1@Uppolice@dgpup@digazamgarh@RajeevRai
मऊ की पुलिस थाना कोतवाली जनपद मऊ सांसद लोकसभा 70 पर मुकदमा दर्ज नहीं करती है पर कमजोर और न्य��य की मांग करने वालों पर बड़ी तेज मुकदमा दर्ज करती है ।क्या मजबूरी है कि जो लोग सांसद जी पर मुकदमा दर्ज़ कराने के लिए प्रदर्शन करती है उसी पर पुलिस मुकदमा दर्ज कर देती है।
@Uppolice @dgpup
घोसी संसदीय क्षेत्र की जनता ने जिस उम्मीद, भरोसे और सद्भावना के साथ समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार राजीव राय को संसद भेजा था, अब वही सांसद एक ऐसे विवाद में फँसे हैं जिसने उनकी छवि और राजनीतिक नैतिकता पर सीधा प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रख्यात प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार यादव ने अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सांसद राजीव राय ने उनकी पैतृक जमीन पर कब्ज़ा करने के लिए वही तरीके अपनाए, जो सामान्यतः किसी भूमाफिया के हथियार होते हैं और यह सब सत्ता, पैसे और प्रशासन के प्रभाव का उपयोग करके किया गया।
डॉ. अनिल का कहना है कि मौजा ख्वाजाजहांपुर (मऊ शहर) में स्थित उनकी जमीन उनकी माताजी के नाम वर्ष 1989 में बैनामा कराई गई थी । यह जमीन हाईवे के किनारे बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है और उस समय से उन पर पूरा कानूनी कब्ज़ा, चौहद्दी, दीवार और कोठरी भी बनी हुई थी। लेकिन सांसद बनने के बाद राजीव राय की नजर इस ज़मीन पर गिद्ध की तरह टिक गई। पहले तो उन्होंने दलालों के माध्यम से दबाव बनाया, पैसे का लालच दिया और दस-दस लाख रुपये तक की पेशकश कर जमीन को हड़पने का प्रयास किया। इन दलालों की आवाज़ की रिकॉर्डिंग भी डॉ. अनिल के पास मौजूद है।
जब प्रत्यक्ष दबाव काम नहीं आया, तो प्रशासनिक दखल का खेल शुरू हुआ। पैमाइश में हेराफेरी करवाई गई, नजरी नक्शा बदलवाया गया, और मूल भू-अभिलेख में जहाँ कभी कोई ��ास्ता नहीं था, वहाँ फर्जी रास्ता दिखाकर चौहद्दी में हेराफेरी की गई। यही फर्जी दस्तावेज़ मार्च 2025 में उस भूमि की रजिस्ट्री में उपयोग किए गए, जिसे सांसद राजीव राय ने मोहम्मद इलियास से खरीदा था। जबकि उस भूमि तक जाने का कोई वैधानिक रास्ता नहीं था, फिर भी रजिस्ट्री में सड़क दिखा दी गई और वह सड़क डॉ. अनिल की जमीन से निकालने की साज़िश का हिस्सा थी।
उनका कहना है कि अगस्त 2024 में नगर पालिका ने संयुक्त रू�� से कार्रवाई करते हुए लगभग 17 कड़ी दीवार तोड़ दी, जिससे डॉ. अनिल का पूरा कब्ज़ा एक बार में समाप्त कर दिया गया। जब उन्होंने शिकायत की, तो नवंबर 2024 में प्रशासन ने गलती स्वीकार करते हुए दीवार को दोबारा खड़ा करवाया। यह रिपोर्ट सीएम जनसुनवाई पोर्टल पर आज भी मौजूद है, जिससे स्पष्ट होता है कि कब्ज़ा वैध रूप से उन्हीं का था।
लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। 10 जुलाई 2025 की रात, जब आम आदमी सो रहा था, उस समय सांस�� के निर्देश पर बुलडोज़र लगवाकर दीवार फिर तोड़ दी गई और मिट्टी गिरवाकर कच्चा रास्ता बना दिया गया। यह कार्य न केवल पूरी तरह अवैध था बल्कि सत्ता के दुरुपयोग का प्रत्यक्ष उदाहरण भी है।
डॉ. अनिल ने SDM सदर और संयुक्त टीम से नापी की मांग की। 14 जुलाई 2025 को नापी हुई, और 26 जुलाई को रिपोर्ट जारी हुई। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि जिस जगह पर मिट्टी गिराकर रास्ता बनाया गया, वहाँ भू-अभिलेख में किसी तरह का रास्त�� दर्ज नहीं है। वीडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है, जिसमें पूर्व जिला अध्यक्ष शिव प्रताप ‘मुन्ना’ सहित कई लोग मौके पर मौजूद दिखते हैं। इसके बावजूद कब्ज़ा खाली नहीं कराया गया और कोई प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई।
जब डॉ. अनिल ने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व विशेषकर अखिलेश यादव को प्रमाणों सहित पूरे मामले से अवगत कराया, तब भी एक भी नेता ने आवाज उठाने का साहस नहीं किया। डॉ. अनिल का दावा है कि स्वयं सांसद ने धमकी देते हुए कहा था कि “अखिलेश यादव की औकात नहीं कि मेरे खिलाफ कुछ कर सकें। जहाँ ��िकायत करनी है कर लो।” यह कथन न केवल पार्टी नेतृत्व पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि इस बात का संकेत भी देता है कि किस तरह सत्ता का दुरुपयोग कर गरीबों और पिछड़ों की जमीन तक छीनने की कोशिश की जाती है।
गंभीर बात यह भी है कि यादव समाज के कुछ नेता जिनमें पूर्व और वर्तमान जिलाध्यक्ष शामिल हैं बिना किसी प्रमाण के केवल निजी लाभ और दबाव में आकर सांसद का समर्थन कर रहे हैं। जबकि हर सरकारी रिकॉर्ड, नापी, दीवार न��र्माण और भू-अभिलेख यह बताते हैं कि जमीन डॉ. अनिल की है और रास्ता बिलकुल नहीं है। डॉ. अनिल ने इन नेताओं को चुनौती देते हुए कहा है कि यदि सांसद सही हैं, तो लिखित प्रमाण दिखाएँ कि किस विभाग ने सड़क दी है। नजरी नक्शा भू-अभिलेख नहीं होता यह हर कानून जानने वाला व्यक्ति जानता है।
स्थिति और भी भयावह तब हो गई जब सांसद ने उल्टा डॉ. अनिल और उनके सहयोगियों के ऊपर मानहानि का मुकदमा कर दिया और धमकी दी कि वे उन्ह���ं आर्थिक दंड और जेल दोनों दिलवाएँगे। डॉ. अनिल ने यह भी कहा ��ि उन्हें अपनी जान का खतरा है और यह लड़ाई केवल उनकी जमीन की नहीं, बल्कि न्याय, संविधान और लोकतंत्र की लड़ाई है।
अंत में डॉ. अनिल यादव समाज, संगठनों और न्यायप्रिय लोगों से अपील करते हैं कि अत्याचार के खिलाफ खड़े हों।
@Prajapat204@RajeevRai डॉ अनिल यादव की भूमि पर अवैध कब्ज़ा भी तो दुनियाँ के सर्वश्रेट सांसद राजीव राय ही किया है उस क्यों नहीं बोलते.. लूट का कुछ हिस्सा दान देकर प्रचार करते हो तुम लोग
विगत दिनों दिशा की मीटिंग में घोसी सांसद @RajeevRai ने जनपद के अधिकारियों के लिए अनुशासनहीनता और उदंडता जैसे शब्दों का प्रयोग किया था
* कोई इस महानुभाव से पूछे की ये जो प्रोफेसर साहब की जमीन के मुद्दे में ये खामोश क्यों हैं क्यों नहीं ये जवाब दे रहे या ��िर अपना पक्ष रख रहे हैं?
* कोई भी जनपद का बड़ा या छोटा पत्रकार जमीन कब्जे के मुद्दे पर इनसे क्यो नही सवाल कर रहा है ?
* सांसद महोदय क्यों नहीं प्रोफेसर सर के जमीन वाले मुद्दे में बैठ कर (one by one) प्रोफेसर साहब से बात कर रहे है
* SDM सदर मऊ के द्वारा लिखित दिए जाने के बाद भी सांसद महोदय क्यों नहीं अपना अवैध कब्जा छोड़ रहें हैं?
क्या ये अनुशासनहीनता और उदंडता नहीं है एक जनता के द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि द्वारा
क्यों न इनको जमीन चोर और मिट्टी चोर या लुटेरा कहा जाय ?
विशेष:कहने और लिखने के लिए तो बहुत कुछ है लेकिन फिलहाल सांसद महोदय इन्ही सब प्रश्नों का जवाब दे दें।
@yadavakhilesh @proframgopalya1 @MPDharmendraYdv