मैं @SumitPhephana- संस्थापक, 🔥"अखिल भारतीय अखंड कुंवारा संघ"🔥, अपने समस्त कुंवारे भाईयों और बहनों को साक्षी मानकर आज पुनः एक बार आजीवन विवाह ना कर अखंड कुंवारा रहने की भीष्म प्रतिज्ञा करता हूं...💪
❤️🔥विरक्ति में ही शक्ति है।❤️🔥
🔥#जय_बजरंग_बली🔥
पहले बात तो ये चली थी कि पेट्रोल में थोड़ा एथेनॉल डालेंगे
बात यहां तक पहुंच गई कि एथेनॉल में थोड़ा पेट्रोल डाल दो तो बड़ी मेहरबानी होगी।
पहले बोले 5%
फिर 10% पर आ गए
फिर 20% बोला
अब डायरेक्ट 90% पर ब्रेक ही नहीं लगा रहे
इस स्पीड से तो 2027 तक पेट्रोल पंप पर लिखा मिलेगा गन्ने का जूस भी उपलब्ध है, अपनी बोतल साथ ला��ं।😂
एथेनॉल डाल���े के बाद गाड़ी का माइलेज बिहार के नेता के वादे जैसा हो जाएगा सुनने में स्ट्रॉन्ग, चलने में हवा-हवाई 😭
गडकरी जी परिवहन संभाल रहे हैं, पेट्रोलियम भी वही देख रहे हैं। पेट्रोलियम मंत्री जी विदेश नीति समझा रहे हैं। समझ नहीं आ रहा कौन क्या चला रहा है
इससे अच्छा विभाग ही एक्सचेंज कर लो भाई। आवाज खाने को देते हो, निकलता ढोल है।
वैसे टेंशन मत लो, अब पेट्रोल पंप जाना ही क्यों है।
सीधा गन्ने के खेत मे�� जाओ, एक बाल्टी जूस निकालो, 10% पेट्रोल मिलाओ और निकल लो। घर में जूसर मशीन है तो पेट्रोल का भी जुगाड़ हो गया 😂
हां गाड़ी के चारों तरफ लक्ष्मण रेखा वाला चॉक जरूर घुमा देना। वरना सुबह उठोगे तो बोनट पर मक्खी, चींटी, मकोड़ों की बारात ��िलेगी 🐜😂🙏
33 वर्ष,4 महीने और 5 दिन की अद्वितीय और निष्ठापूर्ण सरकारी सेवा के बाद,आज पा���ा अपने कर्तव्य-पथ से ससम्मान सेवानिवृत्त हुए हैं। आपके इस लंबे और प्रेरणादायी सफर पर हमें बेहद गर्व है, पापा! अब समय आपके सुकून, आराम और अपनी इच्छाओं को पूरा करने का है। रिटायरमेंट की हार्दिक शुभकामनाएं!
33 वर्ष,4 महीने और 5 दिन की अद्वितीय और निष्ठापूर्ण सरकारी सेवा के बाद,आज पापा अपने कर्तव्य-पथ से ससम्मान सेवानिवृत्त हुए हैं। आपके इस लंबे और प्रेरणादायी सफर पर हमें बेहद गर्व है, पापा! अब समय आपके सुकून, आराम और अपनी इच्छाओं को पूरा करने का है। रिटायरमेंट की हार्दिक शुभकामनाएं!
यह सिर्फ एक अपराध नहीं है,
यह ���मारे समाज की आत्मा पर किया गया हमला है।
बारहवीं की ऑल इंडिया टॉपर… आईआईटी दिल्ली से पढ़ी हुई… यूपीएससी की तैयारी में जुटी एक होनहार, अनुशासित और सपनों से भरी बेटी। एक आईआरएस अधिकारी की संतान, जिसकी आंखों में अपने पिता की तरह देश सेवा का सपना था।
वो सपना, जो सिर्फ उसका नहीं – हम सबका था। और उसे बेरहमी से खत्म कर दिया गया।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं कि उसके साथ क्या हुआ – सवाल यह है कि जब एक उच्च अधिकारी की बेटी अपने ही घर में सुरक्षित नहीं है, तो इस देश की आम बेटियों की सुरक्षा का भरोसा आखिर किस पर टिके?
कल जब हमने अपने व्यक्तिगत फेसबुक अकाउंट से इस घटना पर लिखा, तो कुछ लोगों ने संवेदनशीलता की सारी सीमाएं लांघते हुए पूछा –
“वो लड़का घर में घुसा कैसे?”
जवाब उतना ही सीधा है, जितना कड़वा –
वो कोई अजनबी नहीं था।.वो डेढ़ साल से उसी घर में काम कर रहा था। उसे घर के हर कोने, हर आदत, हर समय का पूरा ज्ञान था। उसे पता था कब घर खाली होगा, कब हमला करना सबसे आसान होगा।
उस दिन, बेटी ने अपने पिता की बात मानकर अपनी दिनचर्या बदली थी – सुबह उठकर पढ़ाई शुरू की थी। पहला ही दिन था। माता-पिता जिम गए हुए थे���
और वही मौका उस दरिंदे ने चुना।
वो घर में दाखिल हुआ। लड़की अकेली थी। उसने पैसे मांगे। लड़की ने मना किया, चिल्लाने की कोशिश की –
और यहीं से शुरू हुई हैवानियत की पराकाष्ठा।
उसने सिर पर वार किया…
गला घोंटा… और फिर इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली हर सीमा पार कर दी।
इसके बाद भी उसका लालच खत्म नहीं हुआ – वो लड़की के निर्जीव शरीर को घसीटता रहा, सिर्फ इसलिए कि तिजोरी खोली जा सके। जब ऐसा नहीं हो पाया, तो उसने औज़ार से तिजोरी तोड़ी, पैसे और गहने लूटे, खून से सने कपड़े छोड़कर आराम से निकल गया।
सिर्फ 54 मिनट।
इतना समय लगा एक ज़िंदगी खत्म करने में। एक परिवार उजाड़ने में और एक सपने को मिटाने में।
लेकिन इससे भी ज्यादा भयावह क्या है जानते हैं?
घटना के बाद कुछ लोगों की सोच।
वे लोग, जो इस जघन्य अपराध के खिलाफ खड़े हो सकते थे… आवाज उठा सकते थे… वे उल्टा यह पूछ रहे हैं –
“क्या लड़की के उस नौकर से संबंध थे?”
यह सिर्फ सवाल नहीं है –
यह समाज की बीमार मानसिकता का आईना है।
क्यों हर बार शक लड़की पर?
क्यों हर बार चरित्र पर वार?
क्यों अपराधी से ज्यादा कटघरे में पीड़िता खड़ी होती है?
ऐसी सोच पर सिर्फ गुस्सा नहीं, घृणा आती है। और हां, शर्म भी – क्योंकि यही सोच अपराधियों को हिम्मत देती है।
जिस ���िन ये सवाल अपनी बहन या बेटी के संदर्भ में खुद से पूछोगे, उस दिन शायद एहसास होगा कि ये “तर्क” नहीं, क्रूरता है।
जरूरत सिर्फ कानून कड़े करने की नहीं है – जरूरत है मानसिकता बदलने की। जब तक हम सवाल गलत जगह पूछते रहेंगे, तब तक जवाब कभी नहीं मिलेंगे।