"ये दिल्ली की सल्तनत के अंत का आरम्भ हो चुका है। देश के नौजवान इस बात को लेकर आगे बढ़ें, ये समय की माँग है। ये ज़ुल्म के सामने जंग ही रास्ता है दोस्तों। ज़ुल्म के सामने झुकना इस देश की मिट्टी में नहीं है दोस्तों।"
- नरेंद्र मोदी जी
अरे बेशर्मों!
इससे क्या हासिल कर लोगे,
तुम्हारी तानाशाही की कलाई खुल रही है
तुम हर रोज एक्पोज को रहे हो,
और हां याद रखो तुम्हें ये लगता हो कि तुम ऐसे सत्ता पर एकाधिकार किए बैठे रहोगे,
कुर्सी कब जनाजा बन जाएगी तुम्हारा, तुम्हें पता भी न चलेगा!
अपनी जाहिलियत को समय रहते (शायद समय निकल चुका है, फिर भी कोशिश कर लो एक बार)उतार के फेंक दो नहीं तो एक दिन जनता नं*गा करके दौड़ाएगी!
अंधभक्तों की कितनी भी बड़ी फौज हो तुम्हारी लेकिन याद रखो सबकी आँखें खुल जाएंगी एक दिन, सोनम वांगचुक के आंदोलन ने बहुत कुछ बदला है देश में!
जिस सफेद चादर को सोनम वांगचुक के ऊपर डाल कर ले जाया गया है!
वो एक चादर मात्र नहीं बल्कि तानाशाही हुकूमत के द्वारा लोकतंत्र पर डाला गया कफ़न है!
अपने ढीठपन और शर्मनाक हरकतों की वजह से महात्मा गांधी और बाबासाहब अम्बेडकर के सपनों की लोकतांत्रिक व्यवस्था को बर्बाद करने वालों के साथ देश का ही खड़ा नहीं हो सकता!
अभिजीत में लाख बुराइयां निकालो, उसका बहिष्कार करो, गालियां दो, जो मान में आए करते रहो..!!
लेकिन अब ये संघर्ष बहुत आगे बढ़ चुका है ये अभिजीत का व्यक्तिगत आंदोलन नहीं है ये आंदोलन देश के युवाओं और उसके भविष्य का है।
अभिजीत के शांत चेहरे पर चिंता की लकीरें इस देश के वर्तमान की चिंता की लकीरें हैं। गांधीवादी सोनम वांगचुक जी के साथ किए गए असंवैधानिक एवं अभद्र व्यवहार की चिंता को लेकर हैं!
इस आंदोलन को मजबूत बनाओ साथियों! अन्यथा अभिजीत की ये चिंता सोनम वांगचुक जी के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की चिंता में बदल जाएगी और शायद इस कलंक को देश का हर नागरिक महसूस करेगा और परिणामतः हम सब मानसिक रूप से अपाहिज हो जाएंगे!
तुम्हारी लड़ाई बहुत बड़ी है इसे सिर्फ अभिजीत के नेता बनने की लड़ाई मत समझो। अरे बहुत नेता निकलते हैं आंदोलन से, अभिजीत भी बन जाए तो क्या फर्क पड़ जाएगा। कम से कम देश में कुछ दिन के लिए ही सही एक नई और सकारात्मक ऊर्जा का संचार तो होगा!
आजकल देश में एक नया चलन आ गया है!
कहीं भी कोई अपनी बात लोकतांत्रिक ढंग से कह रहा हो,
उसको जाकर टॉर्चर करो, उसे अनैतिक कार्यों के लिए उकसाओ, उस पर जूता फेंको, चप्पल फेंको, स्याही फेंको...
और जब उसके साथी-समर्थक तुम्हें पकड़कर पुलिस के हवाले कर दें तो रोकर के नौटंकी करो कि तुम्हें बहुत पीटा है!
और पुराने डाकू जैसे गांवों को लूटने के बाद 'जय भवानी' का नारा देते थे वैसे ही आप खुद ही अभद्रता करो और पकड़े जाने पर 'जय श्री राम' का नारा लगाकर मर्यादपुरुषोतम प्रभु राम का अपमान करो और सत्ता का सहयोग प्राप्त करो, यही चलन बन गया है देश में!
ये महिला भी ऐसा ही कुछ कर रही थीं क्योंकि इन्हें लगता होगा कि जय श्री राम का नारा लगाने के बाद BJP वाले इन्हें बचा लेंगे!
हे मेरे प्यारे लोकतंत्र!
तुम आत्महत्या क्यों नहीं कर लेते!
रोज-रोज लात, घूंसे, थप्पड़ खाने से तो यह रास्ता अधिक आसान है!
तुम्हारी कराह से नागरिकों की संवेदना जाग जाती है और फिर तुम्हारी ही तरह उनको भी यातनाएं मिलती हैं।
तुम्हारी उपस्थिति का झूठा अथवा काल्पनिक आभास उनकी रक्त-शिराओं में रफ्तार भरता है और फिर तुम्हारी कायरता....छोड़ो ये सब!
अब एक ही रास्ता शेष है तुम्हारे पास कि...
आत्महत्या कर लो तुम!
हाल ही में आमिर खान का 3 idiots मूवी को लेकर बयान आया है...
जिसमें वह कह रहे हैं कि यह मूवी सोनम वांगचुक के जीवन से प्रेरित नहीं है। डायरेक्टर और मूवी बनाने वाले अन्य लोग सोनम वांगचुक को जानते तक नहीं थे!
अरे तो क्या हुआ...
इससे सोनम वांगचुक का कद छोटा हो गया क्या? सोनम वांगचुक 3idiots जैसी तमाम मूवीज से कहीं अधिक बड़े हैं reel लाइफ़ और real लाइफ़ में फर्क होता है इस बात को याद रखना चाहिए।
सोनम वांगचुक वो शख़्स हैं जिनके आगे आमिर खान से लेकर तमाम चर्चित हस्तियां कहीं नहीं टिक सकतीं, real life को जीना और वैसा ही अभिनय करने में फर्क होता है।
वैसे क्या लगता है आमिर खान ने अब तक ये बयान क्यों नहीं दिया था अब इनकी क्या मजबूरी हो गई जिससे ये बयान दिया है खान साहब ने...??
आखिरकार कांग्रेस को सोनम वांगचुक याद आ ही गए!
लंबे समय से जिस लड़ाई को सोनम वांगचुक अन्य विद्यार्थियों के साथ मिलकर लड़ रहे थे, अब कहा जा सकता है कि पूरा देश सरकार के खिलाफ एकजुट होकर उस लड़ाई को लड़ रहा है!
जो लड़ाई CJP और NSUI के बीच प्रतीत हो रही था उसका अब the end हो चुका है अभिजीत दीपके और NSUI में क्रेडिट की जो मार बनी हुई थी वो खत्म हो चुकी है और आंदोलन सोनम वांगचुक जी पर केंद्रित हो चुका है।
सोनम वांगचुक्त इस देश की अमूल्य धरोहर हैं उनको सुरक्षित बचाकर रखना हर भारतीय की ईमानदारी और लोकतांत्रिकता है।
BJP सरकार के अब तक के रवैए से ये साफ जाहिर है कि उनके राजनैतिक पुरखों का इतिहास निश्चित रूप से देश का काला अध्याय ही रहा होगा वरना कोई इतने निचले स्तर तक कैसे गिर सकता है!
खैर हम कांग्रेस के लिए इतना ही कहना चाहेंगे कि..."देर आए दुरुस्त आए!"
आजम खान के शिक्षित भारत के सपने को नेस्तनाबूद करने का अहंकारी फैसला लोकतांत्रिक भारत में कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता!
आज जिस देश में राजनीति नफरत और हिंसा के पैरों पर टिकी हुई है वहां पर शिक्षा के सपने को साकार किया था आजम खान ने!
अखिलेश जी समेत सभी समाजवादियों और विकसित भारत का सच्चा सपना देखने वाले हर नागरिक से कहना चाहूंगा कि ऐसे किसी भी तानाशाही फरमान का विरोध करना हम सबकी नैतिक और मानवीय जिम्मेदारी है।
उत्तर प्रदेश में इस सरकार ने लगभग 20 हजार के लगभग विद्यालय बंद/merge कर दिए हैं अब आगे ऐसे फरमानों का प्रतिकार करना ही होगा। हम शिक्षा को बर्बाद नहीं होने दे सकते। विश्वविद्यालय को बचाने के लिए जो भी करना पड़े करिए, लेकिन शिक्षण संस्थानों को बचा लीजिए।
शिक्षण संस्थानों का ध्वस्तीकरण सही मायने में शिक्षित, विकसित देश के भविष्य का ध्वस्तीकरण होगा। अखिलेश जी बचा लीजिए देश के भविष्य को और साथ ही हमारे मनुष्य होने के बोध को!🙏
नरेंद्र मोदी इस्तीफ़ा दें क्योंकि जिन वादों पर उनकी सरकार बनी है वो उन्हें निभा पाने में सक्षम नहीं हैं उन्होंने कहा था कि ~
> हर साल दो करोड़ नौकरियां देंगे.. आज तक़ नहीं मिली!
> काला धन लाएंगे.. अब काला धन का नाम लेने से भी बचते हैं!
> आतंकवाद खत्म करेंगे.. पुलवामा, पहलगाम जैसे कई मंजर देश देख चुका है
> रुपया नहीं गिरने देंगे.. आज तक़ के सबसे निचले पायदान पर पहुंचा दिया
> सस्ता पेट्रोल मिलेगा.. अब तक़ का सबसे महंगा पेट्रोल खरीदना पड़ रहा है
बहुत हुई जुमलों की बौछार.. अब कुर्सी छोडो झूठों के सरदार!
हमारा राजा बख्तियार खिलजी से कम है के!!
उसमें विश्विद्यालय लूटे ध्वस्त किए अपना वाला शिक्षा को बर्बाद करके विश्वविद्यालय ध्वस्त करने के आदेश निकलवा रहा है!
आततायियों से सीधी टक्कर है राजा बाबू की, उन्हें भी पछाड़कर रहेगा!
बेशर्मी में कोई मुकाबला नहीं है इन जाहिलो का!
जिन्होंने प्रभु श्रीराम का नाम ले लेकर उन्हीं के मंदिर में डाका डाल दिया हो,
ऐसे कालनेमियों और रावणों से बचकर रहने की जरूरत हर व्यक्ति को है।
आज देश की संस्थाएं संदेह के घेरे में हैं, मीडिया सरकार की गोद में बैठा हुआ है।
न्यायालयों पर आए दिन सवाल खड़े हो रहे हैं तब...
ऐसे भ्रष्ट लोगों से शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि की करना नैतिकता के साथ बेमानी है।
ये है BJP का प्रदेश उपाध्यक्ष, राजेश यादव!
जो सोनम वांगचुक जी को चीन का एजेंट बोलकर अपने संघी संस्कारों का बखान कर रहा है।
कह रहा है कि "कौन है ये सोनम वांगचुक कौन है...कोई शिक्षाविद् नहीं है ये चाइना का एजेंट है"
अगर चीन का कोई एजेंट हमारे यहां आंदोलन कर रहा है तब तो हमारी निकम्मी सरकार को चुल्लू भर पानी तलाश लेना चाहिए।
प्रधानमंत्री और उनका शिक्षामंत्री यही पौध पूरे देश में लगाकर अपनी सत्तालोलुपता अमर बनाए रखना चाहते हैं!
विनाशकाले विपरीतबुद्धि का मंत्र समेटे पूरी की पूरी सरकार और सरकार-परस्त ऐसे लोग सोनम वांगचुक के पैरों की धूल बराबर नहीं हैं!
अब हम इन देशभक्ति और देशविरोधी व्यक्तित्व का सर्टिफिकेट बांटने वालों को बता देना चाहते हैं कि...
जाहिलों ये देश तुम्हारे वैचारिक पिताजी लोगों की बपौती नहीं है तुम्हारे उन आकाओं का देश से गद्दारी और मुगलों से लेकर अंग्रेजों तक सबकी गुलामी और दलाली का इतिहास है!
तुम हमें देशभक्ति का सर्टिफिकेट दोगे! गद्दारी का इतिहास तो तुम्हारा पुराना है अब ये भाषा सुनकर संदेह हो रहा कि वर्तमान भी कहीं वैसा ही तो नहीं!
2014 के बाद से हमने ऐसी सरकारें चुनी हैं...
जो बेशर्मी की पराकाष्ठा पर रहती हैं
जिनमें अमानवीयता भरी पड़ी है
जो अनैतिकता का भंडार हैं
जिनके लिए हिंसा और दमन औजार हैं
लोकतंत्र को मिटाने के,
जिनकी पुलिस सिर्फ जनता की आवाज का
दमन करती है अपने बाहुबल से,
याद रखो बेशर्मों,
ये टेक्नोलॉजी का जमाना है
यहां हर चीज का अपडेटेड वर्जन आना है
लोकतंत्र का भी आयेगा, और सरकारों का भी!
लोकतंत्र कुछ दिन भटक भी जाए तो क्या
आखिर उसको लौटकर के आना तो 'लोक' पर ही है!
वे सारे लोग जो.....
विद्यालय बंद कर रहे हैं
जो कॉलेजेस बंद कर रहे हैं
विश्वविद्यालय बंद कर रहे हैं
शिक्षा को बर्बाद कर रहे हैं...
वे शत प्रतिशत देशद्रोही हैं! मानवता द्रोही हैं! और अपनी आने वाली पीढ़ियों के द्रोही हैं!
लाल टोपी डायरीज ऐसे राष्ट्रद्रोहियों के चुल्लू भर पानी में डूबने की कामना करता है!
जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन देश में चल रहे काले अध्याय को उजागर कर रहा है।
इस अध्याय का हिस्सा सरकार, पक्ष, विपक्ष, गोदी मीडिया, अंधभक्त, चमचे और बड़ी संख्या में जनता आदि इसका हिस्सा हैं इन्हीं लोगों के सहयोग से देश का सिस्टम धराशाई हो गया है।
सोनम वांगचुक जैसे लोग इस कालिख मिटने की कोशिश कर रहे हैं।
जो उनका मजाक उड़ा रहे हैं, विरोध कर रहे हैं वे सच में। गांधी और बुद्ध के अस्तित्व को नकार रहे हैं, उनका मखौल उड़ा रहे हैं।
हम दावे के साथ इस बात को कह सकते हैं कि...
अगर आजम खान साहब ने बहुजन समाज पार्टी को ज्वाइन कर लिया होता तो आज ये यूनिवर्सिटी भी चल रही होती और आजम साहब भी जेल से बाहर होते!
और शायद ये यूपी में पहली बार होता की BJP किसी नेता के गैर-BJP वाले दल में शामिल होने से प्रसन्न होती।
हो सकता था आजम साहब को Z+ सिक्योरिटी भी मिल गई होती।