आरक्षण के कारण योग्य युवाओं का अवसर खोना और अवसाद में आकर आत्महत्या करना बेहद दुखद है। अब तक आरक्षण के विमर्श को सिर्फ अपराधबोध पैदा करने वाले प्रोपेगेंडा की तरह इस्तेमाल किया गया है, जबकि इसके वास्तविक परिणामों का कोई ठोस अध्ययन नहीं हुआ है।
मेरा स्पष्ट मानना है कि आरक्षण केवल आर्थिक आधार पर होना चाहिए, जहाँ मेरिट से कोई समझौता न हो। नौकरियों में प्रतिनिधित्व नहीं, क्षमता देखी जानी चाहिए। नेताओं की जवाबदेही तय करते हुए इस पर एक खुली और स्वस्थ बहस की तत्काल आवश्यकता है।
आरक्षण पर मेरी कुछ पुरानी वीडियो इस प्रकार हैं। मैं इस विषय पर आज से नहीं बोल रहा हूँ।
🚨 अब अभिजीत डिपके का असली एजेंडा सामने आ गया 🚨
रिपोर्टर: विरोध खत्म हो गया, तो रिजर्वेशन के खिलाफ सवाल क्यों नहीं उठाते? कई छात्र पूछ रहे हैं।
अभिजीत: ये मेरी सिरदर्दी नहीं। अब सरकार अपने मुद्दे संभाले।
रिपोर्टर: फिर NEET विरोध तुम्हारी सिरदर्दी कैसे बन गया? दोनों मामलों में छात्र ही परेशान हैं।
अभिजीत: पॉपुलेशन बेस्ड रिजर्वेशन गलत नहीं। SC 15% हैं तो 15% रिजर्वेशन मिलना चाहिए।
रिपोर्टर: फिर टैक्स में भी वही लॉजिक क्यों न लगाएं? SC 15% हैं तो कुल टैक्स का सिर्फ 15% दें? जनरल कैटेगरी ही सारा टैक्स क्यों भरे? क्या ये फेयर होगा?
अभिजीत का वही पुराना उदास चेहरा… हर डिबेट हारने के बाद वाला 😂
ये लोग सिर्फ अराजकता फैलाने आए थे, असली मुद्दे से भाग रहे हैं।
#CJPProtest #Reservation #JantarMantar