इस नेता में भगत स���ंह जैसी क्रांति भी है और सावरकर जैसी वैचारिक दृढ़ता भी।
अपने कार्यकर्ताओं के लिए आधी रात को सड़क पर खड़े मिलेंगे, तो संसद में जनता के मुद्दों पर संघर्ष करते हुए भी नजर आएंगे।
इनमें युवाओं जैसी मस्ती है, ��च्चों जैसी जिद है और बचपन जैसी चंचलता भी।
आप हनुमान बेनीवाल की राजनीति से सहमत या असहमत हो सकते हैं, लेकिन उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते।
यही हनुमान बेनीवाल की राजनीति और उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता है।
बाड़मेर के तथाकथित नेता अपनी Five Star टाइप बनी ढाणी में रील बनाते हुए दिख जाएंगे लेकिन ऐसे नेता नहीं मिलेंगे जो गरीबों की झोपड़ियो में जाकर उनका दर्द सुनें....
बाड़मेर वालों, इस बार मौका मिला है चूक मत जाना...❤️🙏
प्रदेश के मुख्यमंत्री के गृह जिले भरतपुर में आरएसएस के नजदीकी माने जाने वाले, पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया के करीबी तथा बयाना के पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता श्री अंतर सिंह भड़ाना जी की निर्मम हत्या राजस्थान में जंगलराज होने का प्रमाण है | स्थानीय लोगों के अनुसार, राजस्थान सरकार के गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म के कथित उकसावे के बाद पूर्व विधायक के साथ गंभीर मारपीट ह�����, जिसमें उनकी जान चली गई। यदि इन आरोपों में सच्चाई है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और गंभीर मामला है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाना सरकार की जिम्मेदारी है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब विवाद की जानकारी पुलिस को पहले से थी और भरतपुर के पुलिस अधीक्षक ने भी मीडिया के समक्ष इसकी जानकारी होने की बात कही, तो समय रहते विवाद का समाधान क्यों नहीं करवाया गया ? यदि पुलिस ���े समय रहते प्रभावी कार्रवाई की होती, तो शायद अंतर सिंह भड़ाना जी आज हमारे बीच होते। यह खुफिया तंत्र की विफलता के साथ-साथ पुलिस - प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
राजस्थान में कानून व्यवस्था लगातार सवालों के घेरे में है। सत्ता की नाकामी के चलते अफसरशाही हावी है और आमजन में असुरक्षा का माहौल है। हाल ही में जयपुर ग्रामीण क्षेत्र के एक पुलिस थाने में कथित तौर पर सत्ता की कमान संभालने वाले RSS के एक जिला प्रचारक के कपड़े उतरवाकर पुलिसकर्मियों द्वारा उसे पेशाब पिलाने व बेरहमी से मारपीट किए जाने का मामला भी सामने आया। ये घटनाएं प्रदेश की पुलिस व्यवस्था और शासन की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
मैं देश के गृह मंत्री श्री @AmitShah का ध्यान राजस्थान में उनके ही दल के एक नेता एवं पूर्व विधायक की निर्��म हत्या से जुड़े इस गंभीर प्रकरण की ओर आकर्षित करते हुए यह बताना चाहता हूँ कि पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में आपके साथ जिन भाजपा नेताओं के फोन टेप किए जाने के आरोपों से जुड़े जिन पुलिस अधिकारियों पर सवाल उठे थे, उन्हें मुख्यमंत्री भजनलाल जी शर्मा की सरकार ने फिर से महत्वपूर्ण पदों पर तैनात कर रखा है |
मेरी मांग है कि अनुभवहीन भरतपुर रेंज आईजी एवं भरतपुर जिला पुलिस अधीक्षक को तत���काल ��द से हटाया जाए, गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढ़म को पद से हटाकर उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाई जाए,चूंकि स्थानीय लोगों द्वारा हत्या के आरोपियों और गृह राज्य मंत्री के बीच करीबी संबंध होने के संदर्भ में किए जा रहे दावों की भी स्वतंत्र रूप से जांच आवश्यक है इसलिए पुरे मामले की जांच सीबीआई को दी जाये |
दिवंगत पूर्व विधायक श्री अंतर सिंह भड़ाना जी मेरे भी अच्छे मित्र थे। ��नके असामयिक निधन से मुझे व्यक्तिगत रूप से गहरा दु:ख पहुंचा है। मैं उन्हें पुनः श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं और शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।@PMOIndia @BhajanlalBjp @RajCMO @PoliceRajasthan
बाड़मेर वार्ड नंबर 34 से राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के उम्मीदवार कि विनम्र अपील इस बार राष्ट्रीय लोकतांत्रिक कों पुरे बाड़मेर जिले में मजबूती से जीताना है हनुमान जी बेनिवाल का मान सम्मान बढ़ाना है,,,,🙏🙏
हनुमान बेनीवाल और रविंद्र सिंह भाटी….!!!
पिछले कुछ समय के Events देखे जाए…
पिछली कुछ समय के बयान और घटनाएँ देखी जाए…
तो क्रॉनोलॉजी ये कहती हैं कि दोनों साथ आ सकते है
तीसरा मोर्चा बना सकते है…!!!
प्रदेश में विधायक निधि में कथित भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ, मामले को 9 महीने बीत चुके हैं, लेकिन जांच अभी तक पूर्ण नहीं हुई इसके बावजूद विधायक निधि से लगी रोक को हटाना यह इंगित करता है कि भाजपा सरकार भ्रष्टाचार को सह दे रही है, समाचार पत्र दैनिक भास्कर की आज की रिपोर्ट के अनुसार, मामले में हर माह विधानसभा को रिपोर्ट देने और नए कार्य में प्रथम दृष्टया गंभीर अनियमितता मिलने पर तत्काल भुगतान रोकने जैसी शर्तें लगाई गई हैं लेकिन सरकार से सवाल यह है कि जब जांच अभी अधूरी है तो फंड से रोक हटाने की इतनी जल्दबाजी क्यों ?
भ्रष्टाचार के मामलों में स��कार को पारदर्शिता के साथ जांच पूरी करनी चाहिए और दोषियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए मगर जांच पूरी होने से पहले रोक हटाना कहीं न कहीं पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
क्या प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp
इस मामले में सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखेंगे ?
@PMOIndia
@RajCMO
बा�� बहुत सीधी है—नागौर को अपराध पर कठोरता, राजनीति में neutrality और कानून-व्यवस्था में Full-Time Accountability चाहिए।
@BhajanlalBjp @RajCMO अब Regular SP नियुक्त कर इस पूरे विवाद को एक साफ प्रशासनिक फैसले से खत्म कीजिए।
#NagaurNeedsRegularSP
प्रशासन की neutrality पर भरोसा हो तो चुनाव के नतीजे भी ज्यादा सहजता से स्वीकार होते हैं। Nagaur में Government को institutional trust को सबसे ऊपर रखना चाहिए। @BhajanlalBjp#NagaurNeedsRegularSP
आज पिंक सिटी प्रेस क्लब जयपुर में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कृषि पर्यवेक्षक भर्ती 2026 के गड़बड़ी के संदेहास्पद दस्तावेज़ उजागर किए !
RSSB कृषि पर्यवेक्षक भर्ती 2026 के परिणाम पर उठ रहे सवालों की निष���पक्ष जाँच की मांग !
18 अप्रैल 2026 को 1100 पदों पर आयोजित कृषि पर्यवेक्षक भर्ती 2026 का परिणाम 23 जून को जारी किया गया। परिणाम जारी होने के बाद कुछ अभ्यर्थियों और युवाओं की ओर से गंभीर सवाल और संदेहास्पद परिणाम सामने आए हैं, जिनकी निष्पक्ष जाँच आवश्यक है।
गड़बड़ी के प्रमुख तथ्य:
• एक ही परिवार/रिश्तेदारी से लगभग 40 ऐसे परिवार के अभ्यर्थियों के एक साथ चयनित होने व जिसमें कईयोंकी रैंक समान के दावे सामन��� आए हैं।
• कुछ मामलों में चयनित अभ्यर्थियों की रैंक समान या बेहद करीब होने की बात है।
• 3 पूर्व सैनिक अभ्यर्थियों के अंक समान होने और उनकी रैंक भी क्रम से होने की बात संदेह के घेरे में है।
• बूंदी की एक कोचिंग संस्था तथा हाड़ौती क्षेत्र के एक सेंटर से असामान्य रूप से अधिक चयन होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
• RSSB द्वारा जारी अंतिम परिणाम PDF में कुछ नाम, पिता के नाम और माता के नाम के फ़ॉन्ट साइज में अंतर दिखाई देने के मामले है।
• कुछ मामलों में परिणाम में अभ्यर्थी का नाम और पिता का नाम तो है, लेकिन माता का नाम नहीं होने की बात भी सामने आई है।
• एक अभ्यर्थी के अनुसार उत्तर-कुंजी के आधार पर उसके अंक 219.95 बनते हैं, जबकि जारी परिणाम में 215.86 अंक दर्शाए गए हैं। लगभग 4 अंकों के अंतर को लेकर अभ्यर्थी ने OMR की दोबारा जाँच की मांग की, जिस पर उसे बताया गया कि RSSB में OMR की revaluation/rechecking का प्रावधान नहीं है।
इन सभी बिंदुओं को केवल आरोप मानकर खारिज करने के बजाय उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों की स्वतंत्�� एवं निष्पक्ष जाँच कराना जरूरी है। यदि सभी आरोप गलत हैं तो जाँच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी, और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसका भी पता चल सकेगा।
हम RSSB अध्यक्ष श्री आलोक राज जी, मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी तथा राजस्थान सरकार से विनम्र निवेदन करते हैं कि सामने आए सभी साक्ष्यों की SIT से निष्पक्ष जाँच करवाकर युवाओं के मन में उठ रहे संदेह दूर किए जाएँ।
युवाओं को केवल निष्पक्षता चाहिए।
जाँच ��ो, सच्चाई सामने आए — दूध का दूध और पानी का पानी हो।
#RSSB #कृषि_पर्यवेक्षक #कृषि_पर्यवेक्षक_भर्ती_2026 #RSSBResult #राजस्थान #युवा #निष्पक्ष_जाँच
@BhajanlalBjp @RajCMO @alokrajRSSB @hanumanbeniwal
@hanumanbeniwal राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ओबीसी समाज के हक में मजबूती से खड़ी है। ओबीसी का हक घटाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
राजस्थान में ओबीसी समाज की आबादी को लेकर सामने आ रहे विरोधाभासी आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। यदि कुछ वर्षों में ही ओबीसी आबादी को 52% से घटाकर 43% बताया जा रहा है, तो यह केवल आंकड़ों का खेल नहीं बल्कि लाखों युवाओं, किसा���ों, मजदूरों और वंचित परिवारों के अधिकारों पर सीधा प्रश्न है।
ओबीसी समाज को उसका संवैधानिक हक, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण किसी सरकार की कृपा से नहीं मिला, बल्कि लंबे संघर्षों से मिला है। यदि गलत सर्वे, अधूरी गणना या प्रशासनिक लापरवाही के कारण ओबीसी की हिस्सेदारी कम दिखाई जाती है, तो इसका असर पंचायतों, निकायों, नौकरियों और शिक्षा में मिलने वाले अवसरों पर पड़ेगा।
इस तरह के आंकड़ों का सा���ने आना यह भी स्पष्ट करता है कि भजनलाल सरकार ओबीसी विरोधी है |
क्या प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp यह स्पष्ट कर पाएंगे कि आखिर ओबीसी की आबादी कागजों में कैसे घट गई ? क्या यह आने वाले समय में ओबीसी की सीटें और अधिकार कम करने की तैयारी है ?
नागौर,बीकानेर,चुरू,जोधपुर,बाड़मेर, दौसा,डीडवाना - कुचामन,फलोदी ,पाली,ब्यावर,अजमेर, सीकर सहित विभिन्न जिलों के कई गांवों में जब सर्वे टीम गई ही नहीं तो यह आंकड़े किस आधार पर तय किए गए ?
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ओबीसी समाज के हक में मजबूती से खड़ी है।
ओबीसी का हक घटाने की हर कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
@RajCMO @RajGovOfficial
📊 राजस्थान सरकार ने OBC का सर्वे कर लिया है, अब EWS और UR वर्ग का भी विस्तृत सर्वे कराया जाए।
🔹 किस वर्ग की कितनी आबादी है?
🔹 किस वर्ग को सरकारी नौकरियों और योजनाओं में कितन��� प्रतिनिधित्व मिला है?
🔹 किस वर्ग की हिस्सेदारी उसकी जनसंख्या के अनुपात में है और किसकी नहीं?
⚖️ आंकड़ों के आधार पर सामाजिक न्याय और प्रतिनिधित्व तय होना चाहिए।
✊ हमारी मांग है कि यदि सर्वे में OBC की आबादी 50% से अधिक सामने आती है, तो OBC आरक्षण को वर्तमान 21% से बढ़ाकर 45% किया जाए।
📢 जनसंख्या के अनुपात में भागीदारी — यही सामाजिक न्याय का आधार होना चाहिए।
#OBC #Reservation #SocialJustice #जातिगत_सर्वे #जितनी_जनसंख्या_उतनी_भागीदारी
बिजली विभाग LDC भर्ती मे कुल 765 पद है लेकिन OBC वर्ग के सिर्फ और सिर्फ 2 पद है।
OBC को कुल पदो का 0.26% पद ही मिले।
OBC के हक का आरक्षण 21% है और 20.74% पद OBC के हक के ही नही मिले।
OBC वर्ग के स्टूडेंट्स के साथ हर बार यही होता रहा है।
अब समय आ गया आवाज उठान�� का...बैठे रहने से लोग अपने हक के भी पद नही दे रहे है।
राजस्थान में रोस्टर एक भयंकर कैंसर बीमारी का रूप ले चुका ��ै जो अंतिम स्टेज पर है। इस वजह से ओबीसी आरक्षण को 21% से खत्म करके 1-7% पर ला दिया है।
ओबीसी नेता कुम्भकरण की नींद सो रहे हैं।
युवा भी सो रहे हैं। इसके लिए जिम्मेदार ओबीसी के युवा है जो अपने अधिकारों के लिए लड़ नही सकते
राजस्थान में रोस्टर प्रणाली के नाम पर OBC एवं आरक्षित वर्गों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा हैं।
पहले LDC भर्ती में 21% की जगह 14% औ��� आज विद्युत विभाग की LDC भर्ती में फिर से ओबीसी को 1% से भी कम मात्र .25% आरक्षण दिया गया हैं।
OBC वालों तुम सोते रहेंगे तो यदि होगा।