एथेनॉल डिबेट में अब चूंकि हेनरी फोर्ड का भी नाम आ चुका है, तो मंत्री जी की बात मान लेने में ही भलाई है। आखिर एक अंग्रेज़ का नाम आ जाए, तो बहस अपने-आप आधी खत्म हो जाती है। बचपन से हम सबका यही तजुर्बा रहा है।
नए Air Force One की पहली झलक सामने आ गई है। भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति इसी विमान का उपयोग करेंगे।
करीब 40 करोड़ डॉलर मूल्य का यह अत्याधुनिक और लक्ज़री Boeing 747-8 विमान पिछले वर्ष कतर सरकार द्वारा राष्ट्रपति ट्रंप को गिफ्ट स्वरूप दिया गया था। इसके बाद इस विमान को अमेरिका में राष्ट्रपति के उपयोग के अनुरूप व्यापक रूप से मॉडिफ��ई किया गया है।
अगर ये बात सच निकलती है, तो यह कंपनी इतिहास का मदर ऑफ ऑल घोटाला साबित हो सकता है।
राजेश एक्सपोर्ट्स नाम की एक बहुत बड़ी कंपनी है, जिसका मुख्य काम गोल्ड रिफाइनिंग और ज्वेलरी कारोबार से जुड़ा है। इस कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर राजेश मेहता हैं।
मामला यह है कि SEBI ने इस कंपनी और राजेश मेहता पर अपनी एक अंतरिम जांच में बड़ा आरोप लगाया है।
आरोप है कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच, यानी पांच वर्षों की अवधि में, लगभग 15 लाख करोड़ रुपये के consolidated revenue को लेकर गलत जानकारी दी। यह कंपनी के कुल revenue का लगभग 97- 99% हिस��सा बताया जा रहा है। साथ ही फंड का गलत इस्तेमाल का भी आरोप है।
अब सोचिए, यह किस स्तर की संभावित धोखाधड़ी हो सकती है।
अब इस कहानी में एक बड़ा ट्विस्ट यह है कि इसी राजेश एक्सपोर्ट्स में LIC की 10.8% हिस्सेदारी है।
आज जैसे ही यह खबर सामने आई, राजेश एक्सपोर्ट्स का शेयर 5% लोअर सर्किट पर पहुंच गया।
इसका असर LIC के शेयर पर भी पड़ा और वह 1% भी नीचे चला गया।
अगर जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं, तो फिर एक बहुत बड़ा कॉरपोरेट फ्रॉड होगा ही साथ ही देश की वित्तीय निगरानी व्यवस्था और संस्थागत जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगा। इतने बड़े स्तर पर इतनी बड़ी गड़बड़ी आखिर वर्षों तक नजरों से कैसे बची रही, यह अपने आप में बड़ा सवाल है।
LIC एक सरकारी कंपनी है, जिसमें देश के करोड़ों लोग भरोसे के साथ निवेश करते हैं। ऐसे में अगर इतनी बड़ी हिस्सेदारी ��खने के बावजूद संभावित अनियमितताओं का पता नहीं चल पाया, तो यह आम निवेशकों के विश्वास को गहरी चोट पहुंचाने वाली बात होगी।
ऑन सीरियस नोट,
गैस सिलेंडर की कमी से परेशानी तो हो रही है, लेकिन सबसे ज्यादा असर प्रवासी श्रमिकों और घर से बाहर लॉज, पीजी या कमरा लेकर पढ़ाई कर रहे छात्रों पर हो रहा है। जिनका अपना कनेक्शन है, उनका तो काम चल रहा है। यहां तक कि जिनका जुगाड़ चल रहा है, वे एक-दो सिलेंडर ज्यादा ही अपने पास जमा करके रखे हुए हैं।
लेकिन जो लोग पहले से ब्लैक में या बाजार से खुदरा छोटे सिलेंडर भरवाकर काम ��ला रहे थे, उन्हें अब सबसे ज्यादा दिक्कत हो रही है।
यहीं इंटरनेट पर एक सरकारी पेट्रोलियम कंपनी का विज्ञापन देखा कि छोटे पांच लीटर वाले सिलेंडर आसानी से उपलब्ध हैं, अब सही में कितने उपलब्ध हैं, यह तो पता नहीं। सिलेंडर की कालाबाजारी भी जमकर हो रही है, कई गुना दाम पर बेचा जा रहा है।
बाकी कम से कम छात्र कमेंट में कन्फर्म कर सकते हैं कि ऐसा है या नहीं।