@arvindchotia@arvindchotia ji आपका तो पहले इनसे बहुत अच्छा व्यवहार था। आप मिलते भी थे इनसे और इनकी तारीफें करते थें,जब यह ऊल जलूल पोस्ट तब भी करते थे यह,फूलचंद यूनियन से।तब सही से पहचान नहीं थी आपको शायद!
मैं ललित कुमार पेट दर्द की दवा लेने गया था,
लेकिन जो हुआ उसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए.!
मैं किसी कवरेज के सिलसिले में सांचौर जिला अस्पताल गया हुआ था उसी दौरान मेरे पेट में तेज दर्द शुरू हो गया दर्द लगातार बढ़ता जा रहा मैंने अस्पताल में मौजूद डॉक्टर से कहा कि मेरा पेट बहुत ज्यादा दर्द कर रहा कोई दवा लिख दीजिए. डॉक्टर ने तुरंत पर्ची बनवाकर पेट दर्द की कुछ दवाइयां लिख दीं.
जब मैं दवा लेने पहुंचा तब तक सरकारी नि:शुल्क दवा वितरण केंद्र बंद हो चुका था अस्पताल परिसर में ही संचालित सहकारी उपभोक्ता भंडार की मेडिकल शाखा खुली हुई थी, तो मैंने मेडिकल संचालक को डॉक्टर द्वारा लिखी गई पर्ची दिखाई,दवाइयां मांगी. उसने कहा कि पर्ची में लिखी गई सभी दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं और केवल एक टैबलेट ही है पेट में असहनीय दर्द होने के कारण मैंने कहा कि जो लिखी है वो उपलब्ध है वही दे दीजिए, कम से कम दर्द तो कम होगा
उसने मुझे एक टैबलेट दी कहा कि ₹30 दे दीजिए मैंने तुरंत अपने खाते से ऑनलाइन भुगतान कर दिया भुगतान करने के बाद मैंने उससे बिल मांगा बिल मांगते ही उसने बहाने बनाना शुरू कर दिया. कभी बोला कंप्यूटर खराब है, कभी बोला इंटरनेट नहीं चल रहा है। जबकि मेरे सामने इंटरनेट भी चल रहा था और सिस्टम भी चालू था करीब आधे घंटे तक बहानेबाजी करने के बाद जब मैंने लगातार बिल देने की मांग की तो आखिरकार उसने बिल निकालकर दिया.
बिल देखकर मैं हैरान रह गया. जिस दवा के लिए उसने मुझसे ₹30 लिए थे, उसी दवा की कीमत बिल में मात्र ₹19 लिखी हुई थी मैंने उससे पूछा कि जब बिल में ₹19 लिखे हैं तो मुझसे ₹30 क्यों लिए गए.?
उसने जवाब दिया कि "इतना तो लगेगा उस समय मेरा पूरा ध्यान पेट दर्द पर था, इसलिए मैंने ज्यादा बहस नहीं की.
मैंने मेडिकल संचालक पर भरोसा करते हुए टैबलेट खा ली.
करीब 15 मिनट बाद मुझे चक्कर आने लगा सिर घूमने लगा और सिर भारी-भारी महसूस होने लगा मेरी हालत बिगड़ने लगी मैं तुरंत एक निजी अस्पताल गया वहां डॉक्टर को अपनी समस्या बताई.
डॉक्टर ने सबसे पहले पूछा कि क्या आपने कोई दवा ली है.?
मैंने अस्पताल की पर्ची और मेडिकल से मिली दवा उन्हें दिखाई।
पर्ची और दवा देखने के बाद डॉक्टर ने जो बात कही, उसने मुझे अंदर तक झकझोर दिया।
डॉक्टर ने बताया कि जिस दवा की पर्ची डॉक्टर ने लिखी वो दवा दी ही नहीं गई उसकी जगह कोई दूसरी दवा दे दी इतना ही नहीं, डॉक्टर ने बताया कि जो दवा दी गई, वो भूखे पेट नहीं ली जा सकती और उसे लेने से पहले दूसरी दवा लेना जरूरी था.!
डॉक्टर ने मुझसे पूछा कि यह दवा आपको किसने दी.? कहा कि यह दवा हर व्यक्ति को नहीं दी जा सकती और बिना उचित सलाह के इसका सेवन करना खतरनाक हो सकता है
मैंने डॉक्टर से कहा कि अभी भी मेरे पेट में दर्द हो रहा कोई दवा दे दीजिए लेकिन डॉक्टर ने कहा कि पहले आपके शरीर पर गलत दवा का प्रभाव कम होने दीजिए, उसके बाद ही दूसरी दवा दी जा सकती है
मेनें गंभीरता को देखते हुए मैंने तुरंत जालौर जिला कलेक्टर को फोन किया और पूरी घटना की जानकारी दी, जिला कलेक्टर ने मामले को गंभीर मानते हुए सांचौर अतिरिक्त जिला कलेक्टर को जांच के निर्देश दिए इसके बाद मैं स्वयं अतिरिक्त जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचा उन्हें बिल, पर्ची, दवा तथा अन्य सभी दस्तावेज दिखाए. उन्होंने भी प्रथम दृष्टया इसे गंभीर लापरवाही माना संबंधित अधिकारियों को फोन कर जानकारी ली.
मेरे मन में सबसे बड़ा सवाल यही कि अगर एक पत्रकार के साथ सरकारी अस्पताल परिसर में संचालित मेडिकल शाखा पर ऐसा हो सकता तो आम मरीजों के साथ क्या होता होगा.? कितने लोग ऐसे होंगे जो बिल नहीं मांगते होंगे, कितने लोग ऐसे होंगे जिन्हें डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा के बजाय दूसरी दवा दे दी जाती होगी, और कितने लोग ऐसे होंगे जिन्हें गलत दवा के कारण स्वास्थ्य संबंधी गंभीर नुकसान उठाना पड़ा होगा.!
अस्पताल परिसर में संचालित मेडिकल शाखा पर मरीजों को गलत दवा दी जा रही बिल देने में आनाकानी की जा रही और निर्धारित राशि से अधिक पैसे वसूले जा रहे तो इसकी निष्पक्ष और गहन जांच होना बेहद जरूरी।! @GajendraKhimsar@RajCMO@BhajanlalBjp@narendramodi@8PMnoCM@arvindchotia@ashokgehlot51@PMOIndia@rashtrapatibhvn@GovindDotasra@TikaRamJullyINC@kkvishnoibjp@jogeshwarg@RajGovOfficial@DmJalore@lumbaram64@jivaramchoudhar #Sanchore #Jalore
@8PMnoCM Around 6–7 months have passed due to the cancellation of the previous tender and the initiation of a new tender process, which was awarded at approximately 40% below the estimated tender value.
दुनिया के सबसे बड़ी मु/स्लिम जनसंख्या वाले देश इंडोनेशिया का राष्ट्रपति कह रहा है कि
“मेरा DNA भारतीय है” ❤️❤️
यहाँ अभी कुछ दशकों पहले तलवार के आगे कन्वर्ट हुआ पंक्च रछाप कहता है अरे भाईजान हम तो सऊदी के हबीबी थे , ऊँटो पर बैठकर बस सीधे ही भारत आए।
अबे अपनी मूल जड़ो को पहचानकर भारतीयता और सनातन की जड़ो को स्वीकार करो- तुम्हारी इस देश में इज्जत भी होगी और देश में कट्टरता का समाधान भी।
“अमेरिकी विदेश मंत्री कट्टर इस्/लामिक विचारधारा को दुनिया के लिए खतरा बता रहे है अन्यथा वो दुनिया को खत्म कर देगी”
हाँ बात 100% सही है- पर इस विचारधारा के सबसे बड़े गढ़ पाकिस्तान को तुम अपनी गोद में बैठाकर पाल परोस रहे हो।
तो इसीलिए ज्ञान मत दो- तुम्हारे दोहरे स्टैंड के कारण ही ही आतंकवाद दुनिया में है, अन्यथा एक महीने में ये क़बीलाई आतंकी मानसिकता दम तोड़ देगी।
अपनी अक्षमता और निकम्मेपन को FIR से ढकने की यह सिर्फ एक कोशिश है।
मिलावटी खाना और खराब गुणवत्ता की खाने-पीने की सामग्री इस देश में महामारी के बराबर समस्या है। स्थिति एकदम अलार्मिंग है, और यह हर कोई देख रहा है।
कैंसर सहित कई जानलेवा बीमारियां मिलावटी खाने की वजह से बढ़ रही हैं-और यह कोई छिपा हुआ सच नहीं है। देश में कैंसर मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसा शायद ही कोई दिन होता होगा जब मिलावट से जुड़ी कोई खबर अखबार में न छपती हो या सोशल मीडिया पर सामने न आती हो।
इन दिनों इस मामले को लेकर जागरूकता थोड़ी बढ़ी है। लोग इसपर बात कर रहे और वो इसलिए क्योंकि @khurpenchh और अन्य कई लोग लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं और लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
जिस FSSAI पर इसे रोकने की जिम्मेदारी है, उसे उसके लिए जिम्मेदार बनाने के लिए लगातार बोला जा रहा है।
लेकिन यहां उल्टा हो रहा है-सुधार करने के बजाय अपनी छवि बचाने के लिए FIR किया जा रहा है, ताकि कल को डर से संस्था की अक्षमता और अकर्मण्यता पर कोई सवाल न उठा सके।
जल संचय भागीदारी पोर्टल को एक्पोज करके सारे IAS अधिकारियों को एक्पोज किया तो JSJB पोर्टल बंद कर दिया गया,
MPLADS एक्पोज किया तो पूरे पोर्टल का इंटरफेस ही बदल दिया गया और लोग बोलते हैं कि सोशल मीडिया पर लिखने से बदलाव संभव नहीं है।
देशहित और जनहित में किए काम की वजह से हमारे ऊपर आज FIR हुई ,
आप सब जो मुझे पर्सनली नहीं जानते, सबने आज मेरा बहुत साथ दिया , मुझे कई लोगों के मैसेजेस आए , कई लोगों ने फंड देने की बात कही , कई वकील भाइयों और बहनों ने लीगल हेल्प करने के बात कही ,
आप सभी लोगों का हृदय की गहराई से बहुत बहुत धन्यवाद , आज मुझे ऐसा महसूस हुआ कि हमने आप लोगों को कमाया है , हमें किसी प्रकार के फंड की जरूरत नहीं है, जो काम हम कर रहे हैं वो कोई भी एक मोबाइल और इंटरनेट कनेक्शन से कर सकता है,
हमारी FSSAI और उनके अधिकारियों से कहना चाहते हैं कि हम किसी भी प्रकार की कानूनी कार्यवाही के लिए तैयार हैं , आप लोगों ने पिछले कई वर्षों में इतनी गलतियां की हैं ,आज देश में बढ़ते कैंसर , डायबिटीज, हार्ट अटैक जैसी बीमारियों के लिए आप लोग जिम्मेदार हैं ,
आप लोगों ने FIR में ये कहीं नहीं लिखा कि आरोप गलत हैं, आप लोगों को चिंता इस बात की है कि डॉक्यूमेंट्स कैसे लीक हो गए , अगर आप लोगों में दम है तो पब्लिक के सामने आकर बताइए कि आरोप गलत हैं,
वरना अगले कुछ दिनों में हम स्टेट फूड डिपार्टमेंट और FSSAI की पोल खोलते रहेंगे और मुकदमा लड़ते रहेंगे।जय हिंद जय भारत । BEST OF LUCK FSSAI
Communities that have been wiped out.
1.Sindhi Hindus
2.Balochi Hindus
3.Kashmiri Hindus
4.Afghan Hindus
5.West Punjabi Hindus
6.Afghan Sikhs
7.West Punjabi Sikhs
8.Bangladesh Hindus (not wiped off, but will be quickly)
But the World thinks Muslims are under attack.
आज अजमेर के केकड़ी में मां श्री यादे प्रजापति विकास सेवा संस्थान द्वारा आयोजित श्री यादे माता जयंती महोत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की तथा रक्तदान शिविर का शुभारंभ किया इस अवसर पर विधायक केकड़ी श्री शत्रुघन गौतम जी, श्री जीतमल प्रजापति आदि लोग उपस्थित रहे |
आज राजस्थान के पुष्कर स्थित प्रजापति भवन में स्वजातीय बंधुओ द्वारा भव्य स्वागत किया गया |
Bharatiya Janata Party (BJP)Narendra ModiAmit ShahBJP Uttar PradeshMYogiAdityanathDharampal SinghPankaj Chaudhary
#BJP4ViksitBharat#BJPGovernment#BJP4IND
राज्य तिथि गृह अजमेर पहुंचने पर पार्टी के जिला अध्यक्ष श्री जीतमल प्रजापति जी, श्री सत्यनारायण प्रजापति जी, कैलाश नाथ प्रजापति जी, भंवरलाल प्रजापति जी, जीवन राम प्रजापति जी, अर्जुन लाल प्रजापति जी, नरेंद्र सिंह जी एवं पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत किया गया |
#BJP4ViksitBharat
कल सर्किट हाउस आगरा में अजमेर राजस्थान से पधारे श्री सत्यनारायण प्रजापति जी, श्री भंवरलाल प्रजापति जी, श्री कैलाश चंद्र प्रजापति जी ने शिष्टाचार भेंट की |
#BJPGovernment#भारतीय_जनता_पार्टी
पहले भारत के करेंसी नोट पर गांधी की तस्वीर नहीं होती थी
1947 से लेकर 1987 तक भारत के करेंसी नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर नहीं थी
1987 से अचानक करेंसी नोट पर महात्मा गांधी की तस्वीर छपने लगी
इस बारे में कई आरटीआई भी पब्लिक डोमेन में मौजूद है भारत सरकार के पास इसका कोई जवाब नहीं है की किस नियम के तहत सिर्फ और सिर्फ महात्मा गांधी के ही चेहरे को भारत की करेंसी नोट पर छापा जा रहा है
मेरा यह मानना है कि भारत के करेंसी नोट पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर, विनायक दामोदर सावरकर, सरदार वल्लभभाई पटेल, राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान इन सब की भी तस्वीर छापी जानी चाहिए
किसी एक व्यक्ति का एकाधिकार भारत के करेंसी नोट पर नहीं होना चाहिए