📢 Important Announcement - ATN Mining Timeline
➡️ We would like to officially inform that Mining ATN will only be available until October 31, 2025. After this date, mining will be permanently closed across the network.
📀 According to the result of the community vote (https://t.co/uPKNX35XMz), all mined ATN will be fully vested to users no later than December 31, 2025.
💋 Bonus: Want to see your investment double in the future? Join ATN Staking now (https://t.co/tKwP8s4oUN) and watch your assets grow!
📣 Announcement from Athene Network
The Athene app is currently experiencing some unexpected technical issues. Our engineering team is fully aware of the situation and is working diligently to restore normal service as quickly as possible.
During this period, you may be unable to log in to the app. Please rest assured that all your account data, personal information, and settings remain completely safe, secure, and unaffected.
We understand that this temporary disruption may cause inconvenience, and we sincerely apologize for it. Athene is committed to resolving the issue in the shortest time possible and will provide an update once the system is fully restored.
🙏 Thank you for your trust, patience, and continued support.
एक बार एक सेकेंड के लिए सोचिए यह सब कितना भयावह है,
पुरुष निर्भया के लिए सड़कों पर उतरे मगर कोई महिला अतुल के लिए बोली तक नहीं,
पुरुषों ने बिल्किश बानो के पक्ष में आवाज़ उठाई मगर अतुल के लिए किसी ने एक शब्द तक नहीं कहा,
पुरुषों ने RG Kar College वाली बेटी के लिए सोशल मीडिया से सड़क तक लड़ाई लड़ी मगर अतुल के लिए किसी महिला ने एक स्टोरी तक नहीं लगाई,
क्या यही है आज का वूमेन एंपावरमेंट? क्या यही है आज की बराबरी?
क्या मजबूरी रही होगी? कैसी विषम परिस्थितियां रही होंगी, कितनी मानसिक प्रताड़ना सही होगी? जब एक सम्मानित शिक्षक आत्म हत्या को विवश हुआ होगा!
स्व संजीव कुमार अपने पीछे दोषियों पर एक विस्तृत नोट छोड़ गए हैं, इस प्रकरण की न्यायिक जांच कर दोषियों को कड़ी सजा दी जाए।
@myogiadityanath
👉किशोर अजवानी की बातों का जवाब...
शिक्षको द्वारा ऑनलाइन विरोध करने के कारण
1=आज के समय में जहां अधिकांश कार्यालय शहरों में है आवागमन से लेकर वर्ष भर पानी में ना डूबने वाली सड़कें हैं वहां भी 90% या 80% से ज्यादा कोई भी समय से नहीं पहुंचता है। वहीं विद्यालयों की बात करें तो सुदूर गांव से लेकर पहाड़ों तक ,लेकर नदी पार से लेकर झील के किनारे तक विद्यालय अवस्थित है ।जहां सड़के का पक्की होना तो दूर कहीं-कहीं आज भी खड़ंजा या कच्चे रास्ते ।है बरसात के समय में सामान्य तौर पर ज्यादा पानी बरसने पर सड़के काट दी जाती है। रेलवे लाइन पड़ती है भारतीय रेलवे का कोई समय नहीं होता अगर कहीं दो मालगाड़ी एक साथ क्रॉसिंग में पड़ गई तो आपका आधे घंटे जाना निश्चित है । गांव के सिंगल रोड पर आगे आगे ट्रैक्टर का चलना आदि ऐसे कारण है कि ना चाहते हुए भी माह में दो-चार दिन 10-20 मिनट का लेट हो सकता है
( निदान :पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री जी द्वारा माह में 3 दिन देर पर नजरंदाज करने की बात कही गई थी जबकि वर्तमान में यह बिंदु भूल चुके है।)
किसी शिक्षक के घर कोई दुर्घटना हो गई और वह विद्यालय से जाना चाहे जैसे मान लीजिए किसी के दादाजी का देहांत हो गया अब वह साढे तीन बजे के बाद विद्यालय से निकलेगा और जब तक घर पहुंचेगा उसके दादाजी का अंतिम क्रिया कर्म करके घर वाले वापस आ चुके होंगे यह कैसी मानवता हुई।और कही क्रियाकर्म न करके पूरा गांव उनकी छुट्टी होने का इंतजार करता रहा तो भीड़ सरकार के इस कठोर v हृदयहीन आदेश पर कैसी - कैसी प्रतिक्रिया देगी।
( अगर हम अपने 14 cl ko 28 टुकड़े में बांटने को कह रहे तो गलत क्या है)
यदि 14 cl अनचाही देरी के कारण ही खत्म हो जाएगी तो सामाजिक जीवन का क्या होगा?
( जबरन दिए जाने वाले शीतावकाश/ग्रीष्मावकाश को el me बदलने की मांग करना अनुचित कैसे )
ये सभी इन सभी कार्यों में सरकार को कुछ नया नहीं देना है बस एक्सचेंज का मामला है। हल्ला इतना कैसे हम दुनिया जहान मांग रहे हो।
वाराणसी - डिजिटल अटेंडेंस के खिलाफ लामबंद हुए शिक्षक
➡सैकड़ों की संख्या में जिला मुख्यालय पहुंचे शिक्षक
➡हाथ पर काली पट्टी बांधकर शिक्षकों ने किया विरोध
➡डिजिटल अटेंडेंस को लेकर शिक्षकों में दिखा आक्रोश
➡डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन
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