PD हेड के कार्मिक IFMS 3.0 पर अपना वेतन बिल नहीं देख पा रहे है। जब से IFMS 3.0 पर स्थानांतरित किया गया है। कार्मिक कई महीनों से परेशान हो रहे हैं अपडेट किया जाए
@RajCMO@RajSampark @CMHelpdesk @BhajanlalBjp@rajeduofficial@KumariDiya
केंद्र सरकार ने दिया करोड़ों कर्मचारियों को बड़ा झटका. संसद में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह 50% महंगाई भत्ता को मूल वेतन में मर्ज नहीं करेगी----◾
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(सैलरी मिल रही है यही बहुत है )
भाई ईमानदारी से @JioCare , @reliancejio तुम्हारी सर्विस गांवों में बहुत ही खराब है।
अगर आपके गांवों में भी रिलायंस jio की सर्विस खराब है तो टैग करें और सवाल करें।
जब पैसे शहरों वाले तो नेटवर्क घटिया वाले क्यों ?
कुदरत का करिश्मा
ब्राज़ील में एक महिला ने गर्भनिरोधक कॉपर टी लगवाई थी ताकि प्रेगनेंसी न हो सके लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंज़ूर था..!
दो साल बाद वही महिला गर्भवती हुई...
डॉक्टरों ने कहा कि डिवाइस अब नहीं निकाली जा सकती....
लगातार ब्लीडिंग के बावजूद महिला ने हिम्मत नहीं हारी.!
जब बच्चा पैदा हुआ… सब हैरान रह गए.!
वो नन्हा बच्चा अपने हाथ में कॉपर टी लेकर पैदा हुआ — जैसे खुद कह रहा हो
“मां, मुझे तो आना ही था!” ❤️
👉 कभी-कभी ज़िंदगी सब विज्ञान को पीछे छोड़ देती है…
जहां कुदरत चाहती है, वहां रास्ता खुद बन जाता है..!
यहां पर सरल और प्रभावशाली १५ मंत्र बताए गए हैं,जो सभी सनातनियों से उम्मीद करती हूँ कि आपको तो पता ही होगा।
मैं आप सभी से नम्र निवेदन करती हूँ कि अपने बच्चों को ये मन्त्र जरूर सिखाएँ।
जयतु सनातन धर्म।।🙏🚩🚩🚩
#चतुर्थ श्रेणी भर्ती जो #first टाइम #OTR कर रहे है उनके OTR मे otp नही आ रहे सर इससे कई सारे व्यक्ति फॉर्म से वंचित हैं@alokrajRSSB@BadhalDr प्लीज़ समस्या का निस्तारण करावो 🙏
तथा डेट आगे बढ़ाई जाए l
इनका नाम लोकेश है...
ये रेलवे में ड्राइवर हैं, 1 लाख से अधिक सैलरी
आज इनका वीडियो वायरल हुआ है जिसमें इनकी पत्नी इनको अपनी माँ और भाई के साथ पीट रही है
लोकेश हाथ जोड़ रहा, पैर पड़ रहा, गिड़गिड़ा
रहा लेकिन पत्नी लगातार पीट रही है
ऐसा इसलिए नहीं कि लोकेश कमज़ोर है
बल्कि इसलिए क्यूंकि वो एक कानून से डरता है
अभी तो वो अकेला पिस रहा लेकिन अगर कुछ बोला तो लोकेश की माँ बहन भाई बहनोई सब रोयेंगे..
जिसके लिए उसकी पत्नी को किसी सबूत की
जरूरत नहीं पड़ेगी, वो मामला सीधे दर्ज होता है
ये अकेला लोकेश नहीं, कानून का आड़ लेकर
न जाने कितनी डायने पुरुषों को नपुंसक बनाकर रखती हैं इसके खिलाफ अगर अब भी चुप रहे तो रोज़ कोई न कोई अखिलेश फंदे पे लटका मिलेगा ✍️
आपकी राय... में इसका क्या इलाज है ?
@JaikyYadav16 इस व्यक्ति के पास एक समय करोड़ों की संपत्ति थी लेकिन आज ऑटो रिक्शा चला रहे हैं।😭 इसलिए किसी ने कहा😭 ..... समय बड़ा बलवान है भईया समय बड़ा बलवान ... 😭समय आगे हम तो क्या झुक जाए भगवान 😭.. समय बड़ा बलवान है भईया समय बड़ा बलवान 😭😭
ये बाबा जी दलित समुदाय से आते है..अपने आप को कस्ट देकर अपने बच्चों का पेट पालते हैं...
भगवान की आराधना करतें हैं...
वैसे तो ये छोटा डोन महिला है मगर फिर भी इसकी अकड़ और हरकतें देखिए,
बाबा जी के चेहरे पर उदासी दिखाई दे रही है मगर यह छोटा डोन उन्हें प्रताड़ित किए जा रहा है,
आजकल कुछ महिलाओं ने महिला सशक्तिकरण को ज़्यादा ही सीरियस ले लिया है और वो भी असहाय और दुखियों के प्रति बर्बरता करके।
"मेरा नाम अतुल सुभाष है. बेंगलुरु में रहता हूं और आज मैं सुसाइड कमिट करने जा रहा हूं.. कोर्ट के बाहर किसी गटर में बहा देना मेरी अस्थियों को."
"मेरे मरे हुए शरीर के आसपास मेरी पत्नी और उसके परिवार का कोई नहीं आना चाहिए.."
"मेरा अस्थि विसर्जन तब तक नहीं होना चाहिए जब तक मेरे हर आरोपी को सजा नहीं मिलती.."
"इतने सारे एविडेंस.. सब कुछ होने के बाद भी अगर कोर्ट जज और बाकी के आरोपियों को सजा नहीं देती है तो मेरी अस्थियां वहीं कोर्ट के बाहर किसी गटर में बहा देनी चाहिए.. ताकि मैं जान जाऊं कि इस देश में क्या वैल्यू है एक लाइफ की.."
बेंगलुरु में रहने वाले यूपी के अतुल सुभाष के फांसी पर लटकने से पहले बनाया वीडियो और उसकी दर्दनाक कहानी आज सबको व्यथित कर रही है.. अतुल महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में डीजीएम के पद पर काम करते थे. मात्र 34 साल की उम्र थी.. अच्छा खासा पैकेज था.. लेकिन पत्नी निकिता सिंघानिया ने जीवन नर्क बना दिया था. ऐसा नर्क कि अतुल के पास मरने के अलावा कोई और रास्ता बाकी नहीं रह गया था.. जरा सोचिए, कोई व्यक्ति अपने ही देश की कानून व्यवस्था से.. पुलिस से.. अदालतों से.. सिस्टम से.. इस हद तक निराश हो गया कि आखिरी इच्छा में कह रहा, "अगर न्याय न मिले तो मेरी अस्थियां कोर्ट के बाहर ही गटर में बहा देना.."
शर्म है हम सबके लिए.. अतुल कितने मानसिक दबाव में रहा होगा. ये समाज कितना गैर जिम्मेदार और अमानवीय है जो अतुल की पीड़ा, निराशा, त्रासदी को समझ नहीं सका!!
अतुल पिछले तीन दिन से अपनी जीवन लीला खत्म करने के बारे में सोच रहा था. उसकी पत्नी निकिता जौनपुर की है. 5 साल पहले ही दोनों की शादी हुई थी. शादी के कुछ दिन बाद ही निकिता उसे छोड़कर जौनपुर लौट आई और वहां उसके खिलाफ दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा समेत तमाम धाराओं के कई मुकदमे दर्ज करा दिए.. 2 साल के भीतर कोर्ट की 120 तारीखें लगीं, जिसमें से 40 तारीखों पर अतुल बेंगलुरु से जौनपुर आ चुका था.. निकिता उसे सुसाइड के लिए उकसाती थी. मरने से पहले अतुल ने कहा कि निकिता तलाक के बदले हर महीने 2 लाख रुपए गुजारा भत्ता मांग रही थी. मेरे बच्चों को उसने छीन लिया था.. अतुल का आरोप है कि जौनपुर की फैमिली कोर्ट की जज रीता कौशिक ने भी उसे परेशान किया.. जज रीता कौशिक उस पर 3 करोड़ रुपए की एलिमनी देने का दबाव बना रही थी.. अतुल जब कोर्ट जाता था तो पेशकार रिश्वत मांगता था. अतुल के रिश्वत देने से इनकार करने पर उसके खिलाफ हर महीने 80 हजार रुपए मेंटिनेंस देने का आदेश जारी कर दिया गया.. अतुल ने 40 पन्ने का सुसाइड नोट लिखा है जिसमें अपनी मौत का जिम्मेदार पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा, साले अनुराग सिंघानिया उर्फ पीयूष और चचेरे ससुर सुशील सिंघानिया को दोषी ठहराया है.. उसने मरने से पहले बनाए गए वीडियो में कहा, खुद को खत्म कर लेना ही बेस्ट है क्योंकि मैं जो पैसा कमा रहा हूं उसी से अपने दुश्मन को बलवान बना रहा हूं.. मेरा पैसा मुझे ही बर्बाद करने के लिए इस्तेमाल हो रहा है.. मेरे ही टैक्स के पैसे से ये पुलिस, ये कोर्ट, ये सिस्टम मुझे और मेरी फैमिली और बाकी लोगों को भी हैरेस करेगा.. तो जो सप्लाई है वैल्यू का, उसी को खत्म कर देना चाहिए..
कल जब बेंगलुरु पुलिस अतुल के घर पहुंची तो दरवाजा बंद था. दरवाजा तोड़कर पुलिस भीतर घुसी तो अतुल का शरीर फंदे से लटका मिला. कमरे की दीवारों पर लिखा था.. JUSTICE IS DUE.. यानि न्याय अभी बाकी है..
अतुल को न्याय मिलना ही चाहिए..
फैमिली कोर्ट की जज और निकिता समेत सभी आरोपियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए..
चीन से बड़ी खबर!
चीन में एक झटके में 15 ऊंची इमारतों को गिरा दिया गया।
एक झटके में 13 बड़ी-बड़ी बिल्डिंग मिट्टी में मिल गयी।
इन इमारतों का निर्माण कार्य आधा पूरा हो चुका था, जिसके बाद निर्माण करने वाली कंपनी के पैसे ही खत्म हो गए।
चीन में रियल एस्टेट सेक्टर के डगमगाने की वजह से 10 सालों के बाद भी इन इमारतों को रहने के लिए शुरू नहीं किया जा सका, जिस वजह से इन्हें ध्वस्त करना पड़ा।
आज संसद के उच्च सदन राज्यसभा में कांग्रेस के सांसद माननीय दिग्विजय सिंह जी ने #EWS आरक्षण की विसंगतियों को दूर करने के लिए सदन में बात रखी इसलिए दिग्विजय सिंह जी को बहुत बहुत धन्यवाद एवं आभार🙏🌸
चुंकि एक व्यक्ति की चतुराई के चलते भुमि और मकान शब्दों को ड्राफ्ट से हटाया गया हैं जो कि निंदनीय हैं। आप सभी समझ सकते हैं ये छल किसने किया हैं..!