केंद्र सरकार ने विदेशी चंदे को लेकर बड़ा कदम उठाते हुए विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 (FCRA Amendment Rules, 2026) लागू कर दिए हैं. गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा जारी नए नियमों के तहत अब धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए विदेश से मिलने वाले फंड की निगरानी पहले से कहीं ज्यादा सख्त होगी.
पूरी ख़बर: https://t.co/nLG2OL9vOL
#ReportersGroundReport | @aajtakjitendra
कर्नाटक के लोग बीजेपी को सबक सिखाने के लिए कांग्रेस को जीता दिए।
अब कांग्रेस ने मुसलमानों का 800 करोड़ कर्ज माफ कर दिया।
और तो और वहाँ आंगनवाड़ी में उर्दू अनिवार्य और स्कूल में हिजाब पर बैन भी हटा दिया।
और केसरिया और कलावा को स्कूल में रोक दिया।
बीजेपी को सबक सिखाते सिखाते खुद ही के पैर पर कुल्हाड़ी मार लिए।
“मैं भगवा आतंकवाद पर झूठा बयान नहीं देना चाहता था, लेकिन पार्टी ने मुझे ऐसा करने को कहा।” 😭
—सुशीलकुमार शिंदे, पूर्व गृह मंत्री
अब तो पूर्व कांग्रेसी भी सच बोलने लगे लेकिन चमचे फिर भी नहीं मानेगे…!!
राजनीति में दल बदलने निकले थे, लेकिन इंटरव्यू बोर्ड ने पुरानी फाइलें खोल दीं .. सदस्यता तो दूर, बाहर का रास्ता दिखा दिया गया ..😎
तृणमूल कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता बीजेपी दफ्तर में बीजेपी में शामिल होने आये थे .. बीजेपी के नेताओं ने उनसे पहले प्यार से बात किया, फिर हरा रंग लगाया और कहा कि तुम लोग भगवा रंग लगाने के लायक नहीं हो और उनके चेहरे पर तबीयत से हरा रंग पोता ..
फिर खूब डाटा फटकारा, और कहां की तुम लोगों ने हम पर जो अत्याचार किया है, तो तुम्हें बीजेपी दफ्तर में आते हुए शर्म नहीं आई ..😎
और जुतिया कर बीजेपी दफ्तर से भगा दिया ..🤣🤣
मोहम्मद आरिफ़
अशरफ़ अली
आसिफ़ खान
उम्र 22 साल तीनों का काम स्कूल के बाहर लड़कियों को छेड़ना और गंदे इशारे करना
आज पुलिस ने उन्हें पकड़ा और उनकी अच्छी तरह से धुनाई कर दी
बांग्लादेश के हिंदू अपने खर्चे से डोनेशन इकट्ठा करके एक मंदिर के प्रांगण में भगवान श्री राम की मूर्ति बनवा रहे थे
मुस्लिम कट्टरपंथियों ने पूरे बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन किया
जिससे बांग्लादेश सरकार ने मूर्ति के निर्माण पर रोक लगा दिया
अब अल जजीरा इस पर कोई रिपोर्ट नहीं प्रकाशित करेगा
बीबीसी और DW जैसे हिन्दुफोबिक मीडिया
चुप है भारत के छटेले जिहादी भी इस पर चुप हैं
भारत में ट्रेन लाने का श्रेय किसको प्राप्त है, अंग्रेज? बिलकुल नहीं, नाना जगन्नाथ शंकर सेठ वो पहले व्यक्ति है जिन्होंने इसके लिए पहल शुरू की थी
नाना स्वर्णकार परिवार में जन्मे थे और व्यवसाई घराना होने के कारण वे धन संपदा से काफी संपन्न भी थे
इंग्लैंड में जब ट्रेन पहली बार चली तो ये पूरी दुनिया की हेडलाइन बन जाती है, ये खबर जब नाना तक पहुंची तो उन्हे लगा ये ट्रेन उनके गांव, शहर में भी चलनी चाहिए
अब नाना जी कोई आम व्यक्ति तो थे नहीं उनका व्यवसाय बहुत बड़ा था, उनका प्रभाव इससे समझ सकते है कि कई अंग्रेज अफसर उनके सानिध्य में रहते थे
उन्होंने कई विश्वविद्यालय खोले थे जिसमे कई महान क्रांतिकारियों ने बाद में इसमें शिक्षा को ग्रहण किया, उन्होंने लड़कियों के लिए मुंबई में पहला स्कूल खोला। नानाजी अपने स्कूलों में अंग्रेजी के साथ संस्कृत पढ़ाने की भी व्यवस्था की थी
1843 में वे अपने पिता के दोस्त जमशेद जीजोभोय उर्फ जेजे के पास गए और इंडियन रेलवे का अपना आइडिया उन्हे बताया, भारत में ट्रेन चलने के आइडिया से सुप्रीम कोर्ट के जज थॉमस और ब्रिटिश अधिकारी स्किन पैरी काफी खुश थे
सबको नाना का आइडिया शानदार लगा इसके बाद तीनो ने मिलकर इंडियन रेलवे एसोसिएशन को बनाया, उससे पहले अंग्रेजो का रेलवे के प्रति ऐसी कोई योजना नहीं थी
जब नाना और जेजे जैसे प्रभावी व्यक्तियों ने ईस्ट इंडिया कंपनी को अपना सुझाव दिया, तो उन्होंने काफी सोच विचार के बाद सरकार को इसमें काम करने के लिए कहा।
इन्होंने मुंबई के बड़े बड़े व्यापारियों को इस प्रोजेक्ट से जोड़ते हुए ग्रेट इंडियन रेलवेज नाम की कंपनी बनाई
ये सपना 1853 में पूरा हुआ, जब मुंबई से थाणे की ट्रेन चली, इसमें नाना जी और जेजे भी यात्री के रूप में सवार रहे
वास्तव में हम दूसरो की एक एक बात जानते है पर अपनो के योगदान को जानने की दूर की बात है सुनना भी पसंद नही करते।
भाजपा राज में किसी का सरकारी जमीन पर कब्जा बर्दास्त नही किया जाएगा ,चाहे वो मुर्दा ही क्यों न हो ,सुवेन्दुअधिकारी लगे हुए है बुल्डोजर के साथ योगी इस्टाइल में सफाई अभियान में🤩