नरेंद्र मोदी जी
CP और जंतर-मंतर की दीवारों पर लिखे नारे मिटाए जा सकते हैं, मगर आपके चेहरे पर जो कालिख पुती है वो कभी नहीं मिटेगी।
हम याद रखेंगे कि देश में एक ऐसा प्रधानमंत्री हुआ था जिसके
👉कार्यकर्ताओं ने NEET का पेपरलीक किया था। तो उसने
👉 पेपरलीक का विरोध कर रहे छात्रों के सिर फुड़वाये थे
👉 आसुँ गैस क�� गोलों और पैलेट गन से छात्रों के आंदोलन का दमन करने की कोशिश की थी
👉 आधी-आधी रात को REEL बनाकर पेपरलीक के लिए जिम्मेदार मंत्री को बचाने की हर मुमकिन कोशिश की थी।
साथ ही देश ये भी याद रखेगा कि इसी दौरान राहुल गांधी ने -
👉 सबसे पहले छात्रों की आवाज उठाई और धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफ़ा मांगा
👉 संसद में पेपरलीक और शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा की मांग की
👉 छात्रों के समर्थन में प्रधानमंत्री के आवास के बाहर धरना दिया
👉 मोदी की पुलिस ने राहुल गांधी को घसीटा, उनके मुंह से खून तक निकला बावजूद इसके राहुल गांधी पीछे नहीं हटे
👉 छात्रों से मारपीट करने वाले और उसका आदेश देने वाले की जवाबदेही तय करने की मांग की
नरेंद्र मोदी भारत का अतीत हो चुके हैं, भारत के Gen Z Bright Future चाहते हैं, वो राहुल गांधी को चाहते हैं। राहुल गांधी ही भारत का भविष्य हैं।
धर्मेंद्र प्रधान त��� गया।
अगला नम्बर अमित शाह का है।
राहुल गांधी ने पत्र लिखकर अमित शाह से पूछा है कि
• छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया?
• सादा कपड़ों में छात्रों को पीटने वाले कौन थे? उनको वहां किसने लगाया था?
राहुल नहीं रुके 🔥
♦️सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ दिया था। 😓
♦️दीपके सर को कभी बुखार हो रहा था तो कभी टाइफ़ॉइड। 😓
♦️बाक़ी CJP की लीडरशिप में किसी को नड्डा जी के घर की कॉफ़ी पसंद आ गई तो किसी को बर्गर। 😓
♦️केजरीवाल सर ने तो तीन दिन से उम्मीद ही छोड़ी हुई थी 😓
♦️संजय सर ख़ुद को पड़ने वाली गालियों से निपटने में बिजी हो गए थे। 😓
इस सब के दौरान राहुल वो शख़्स रहे जिसने लगातार नए नए तरीके अपनाए, दबे नहीं, थमे नहीं, रुके नहीं।
प्रधानमंत्री के घर के बाहर पहुँच गए, आनन फानन में मंत्री जितेन्द्र को दौड़ लगवा दी, लेकिन राहुल नहीं रुके। पुलिस ने जबरदस्ती की, सड़क पर घसीटा लेकिन राहुल नहीं रुके। नाक और छात�� पर वार भी किए, नाक से और मुँह से खून बहने लगा , लेकिन राहुल नहीं रुके। हिरासत में लेकर छत्रसाल स्टेडियम ले गए लेकिन राहुल नहीं रुके। बहन प्रियंका को उठाकर ले गई पुलिस लेकिन राहुल नहीं रुके।
अगले दिन राहुल फिर नहीं रुके, एक कदम आगे बढ़ाते हुए पीपीटी तैयार कर के ले आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मोदी सरकार की धज्जियाँ उड़ा दी जिसे लाइव एक लाख से अधिक युवा देख रहे थे।
इससे अगले दिन राहुल 23 NEET के छात्�� जिन्होंने आत्महत्या की, उनको श्रद्धांजलि देने गांधी स्मृति निकल पड़े। पुलिस ने घर में नज़रबंद करने की कोशिश की लेकिन राहुल नहीं रुके। पुलिस ने बैरिकेडिंग करके ब्लॉक करने की कोशिश की लेकिन राहुल नहीं रुके, गांधी स्मृति पहुँचे, छात्रों को श्रद्धांजलि दी।
सरकार ने सोचा अब आगे क्या? ख़त्म सब। लेकिन राहुल तो राहुल हैं, वो तमाम सरकारी दावों और मीडिया की चुप्पी को धता बताते हुए उस छात्र को सामने ले आए जिस पर पैलेट गन चली। अमित शाह की पुलिसिया बर्बरता अब ��ंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह बना चुकी थी क्योंकि राहुल ने ये सुनिश्चित किया कि ये बर्बरता छुपा नहीं सकती सरकार।
इस दौरान राहुल ने लगातार ये सुनिश्चित किया कि राज्यसभा और लोकसभा में रोज़ाना सुबह प्रदर्शन हों, विपक्ष प्रधान के इस्तीफे की मांग पर एकजुट रहे। सरकार ने चर्चा में उलझाना चाहा, फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में उलझाना चाहा, किसी बिल में उलझाना चाहा लेकिन राहुल नहीं रुके। राहुल ने साफ़ शब्द���ं में दो टूक कहा कि पहले इस्तीफ़ा होगा, उसके बाद कोई और बात होगी।
अगले दिन भी राहुल नहीं रुके, राहुल उन 5 छात्रों को मीडिया के सामने ले आए, जिन्होंने जंतर मंतर पर अनशन किया। वो छात्र जिन्हें CJP ने मंच नहीं दिया। वो छात्राओं को लेकर सामने आए और मीडिया के सामने मंच सौंपते हुए बोलने का मौक़ा दिया।
राहुल को ख़बर लगी कि सरकार मुद्दे से भटकाने के लिए धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने की तैयारी में है। राहुल ने तुरंत मीडिया के सामने साफ़ शब्दों में कहा कि मंत्रालय बदलने से बात नहीं बनेगी। इस्तीफा मतलब इस्तीफ़ा। धर्मेंद्र प्रधान को जाना ही पड़ेगा। नरेन्द्र मोदी के सामने से तमाम विकल्प राहुल ने एक झटके में खींच डाले।
अंततः राहुल नहीं रुके। राहुल की जीत हुई, जीत हुई उन छात्रों की जो राहुल की तरह ही थमे नहीं, दबे नहीं, रुके नहीं। राहुल नहीं रुके, राहुल नहीं रुकेंगे।
जय हिन्द। जय कांग्रेस। 🇮🇳
@RahulGandhi
Updated roaster of demands:
1. Sack Pradhan. ✅
2. Punish all those who beat students on 20th July - PENDING
3. PM must apologise to the students. - PENDING
राहुल नहीं रुके 🔥
♦️सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ दिया था। 😓
♦️दीपके सर को कभी बुखार हो रहा था तो कभी टाइफ़ॉइड। 😓
♦️बाक़ी CJP की लीडरशिप में किसी को नड्डा जी के घर की कॉफ़ी पसंद आ गई तो किसी को बर्गर। 😓
♦️केजरीवाल सर ने तो तीन दिन से उम्मीद ही छोड़ी हुई थी 😓
♦️संजय सर ख़ुद को पड़ने वाली गालियों से निपटने में बिजी हो गए थे। 😓
इस सब के दौरान राहुल वो शख़्स रहे जिसने लगातार नए नए तरीके अपनाए, दबे नहीं, थमे नहीं, रुके नहीं।
प्रधानमंत्री के घर के बाहर पहुँच गए, आनन फानन में मंत्री जितेन्द्र को दौड़ लगवा दी, लेकिन राहुल नहीं रुके। पुलिस ने जबरदस्ती की, सड़क पर घसीटा लेकिन राहुल नहीं रुके। नाक और छात�� पर वार भी किए, नाक से और मुँह से खून बहने लगा , लेकिन राहुल नहीं रुके। हिरासत में लेकर छत्रसाल स्टेडियम ले गए लेकिन राहुल नहीं रुके। बहन प्रियंका को उठाकर ले गई पुलिस लेकिन राहुल नहीं रुके।
अगले दिन राहुल फिर नहीं रुके, एक कदम आगे बढ़ाते हुए पीपीटी तैयार कर के ले आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मोदी सरकार की धज्जियाँ उड़ा दी जिसे लाइव एक लाख से अधिक युवा देख रहे थे।
इससे अगले दिन राहुल 23 NEET के छात्�� जिन्होंने आत्महत्या की, उनको श्रद्धांजलि देने गांधी स्मृति निकल पड़े। पुलिस ने घर में नज़रबंद करने की कोशिश की लेकिन राहुल नहीं रुके। पुलिस ने बैरिकेडिंग करके ब्लॉक करने की कोशिश की लेकिन राहुल नहीं रुके, गांधी स्मृति पहुँचे, छात्रों को श्रद्धांजलि दी।
सरकार ने सोचा अब आगे क्या? ख़त्म सब। लेकिन राहुल तो राहुल हैं, वो तमाम सरकारी दावों और मीडिया की चुप्पी को धता बताते हुए उस छात्र को सामने ले आए जिस पर पैलेट गन चली। अमित शाह की पुलिसिया बर्बरता अब ��ंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह बना चुकी थी क्योंकि राहुल ने ये सुनिश्चित किया कि ये बर्बरता छुपा नहीं सकती सरकार।
इस दौरान राहुल ने लगातार ये सुनिश्चित किया कि राज्यसभा और लोकसभा में रोज़ाना सुबह प्रदर्शन हों, विपक्ष प्रधान के इस्तीफे की मांग पर एकजुट रहे। सरकार ने चर्चा में उलझाना चाहा, फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में उलझाना चाहा, किसी बिल में उलझाना चाहा लेकिन राहुल नहीं रुके। राहुल ने साफ़ शब्द���ं में दो टूक कहा कि पहले इस्तीफ़ा होगा, उसके बाद कोई और बात होगी।
अगले दिन भी राहुल नहीं रुके, राहुल उन 5 छात्रों को मीडिया के सामने ले आए, जिन्होंने जंतर मंतर पर अनशन किया। वो छात्र जिन्हें CJP ने मंच नहीं दिया। वो छात्राओं को लेकर सामने आए और मीडिया के सामने मंच सौंपते हुए बोलने का मौक़ा दिया।
राहुल को ख़बर लगी कि सरकार मुद्दे से भटकाने के लिए धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने की तैयारी में है। राहुल ने तुरंत मीडिया के सामने साफ़ शब्दों में कहा कि मंत्रालय बदलने से बात नहीं बनेगी। इस्तीफा मतलब इस्तीफ़ा। धर्मेंद्र प्रधान को जाना ही पड़ेगा। नरेन्द्र मोदी के सामने से तमाम विकल्प राहुल ने एक झटके में खींच डाले।
अंततः राहुल नहीं रुके। राहुल की जीत हुई, जीत हुई उन छात्रों की जो राहुल की तरह ही थमे नहीं, दबे नहीं, रुके नहीं। राहुल नहीं रुके, राहुल नहीं रुकेंगे।
जय हिन्द। जय कांग्रेस। 🇮🇳
@RahulGandhi
राहुल नहीं रुके 🔥
♦️सोनम वांगचुक ने अनशन तोड़ दिया था। 😓
♦️दीपके सर को कभी बुखार हो रहा था तो कभी टाइफ़ॉइड। 😓
♦️बाक़ी CJP की लीडरशिप में किसी को नड्डा जी के घर की कॉफ़ी पसंद आ गई तो किसी को बर्गर। 😓
♦️केजरीवाल सर ने तो तीन दिन से उम्मीद ही छोड़ी हुई थी 😓
♦️संजय सर ख़ुद को पड़ने वाली गालियों से निपटने में बिजी हो गए थे। 😓
इस सब के दौरान राहुल वो शख़्स रहे जिसने ल��ातार नए नए तरीके अपनाए, दबे नहीं, थमे नहीं, रुके नहीं।
प्रधानमंत्री के घर के बाहर पहुँच गए, आनन फानन में मंत्री जितेन्द्र को दौड़ लगवा दी, लेकिन राहुल नहीं रुके। पुलिस ने जबरदस्ती की, सड़क पर घसीटा लेकिन राहुल नहीं रुके। नाक और छाती पर वार भी किए, नाक से और मुँह से खून बहने लगा , लेकिन राहुल नहीं रुके। हिरासत में लेकर छत्रसाल स्टेडियम ले गए लेकिन राहुल नहीं रुके। बहन प्रियंका को उठाकर ले गई पुल��स लेकिन राहुल नहीं रुके।
अगले दिन राहुल फिर नहीं रुके, एक कदम आगे बढ़ाते हुए पीपीटी तैयार कर के ले आए। प्रेस कॉन्फ्रेंस करके मोदी सरकार की धज्जियाँ उड़ा दी जिसे लाइव एक लाख से अधिक युवा देख रहे थे।
इससे अगले दिन राहुल 23 NEET के छात्र जिन्होंने आत्महत्या की, उनको श्रद्धांजलि देने गांधी स्मृति निकल पड़े। पुलिस ने घर में नज़रबंद करने की कोशिश की लेकिन राहुल नहीं रुके। पुलिस ने बैरिकेडिंग करके ���्लॉक करने की कोशिश की लेकिन राहुल नहीं रुके, गांधी स्मृति पहुँचे, छात्रों को श्रद्धांजलि दी।
सरकार ने सोचा अब आगे क्या? ख़त्म सब। लेकिन राहुल तो राहुल हैं, वो तमाम सरकारी दावों और मीडिया की चुप्पी को धता बताते हुए उस छात्र को सामने ले आए जिस पर पैलेट गन चली। अमित शाह की पुलिसिया बर्बरता अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में जगह बना चुकी थी क्योंकि राहुल ने ये सुनिश्चित किया कि ये बर्बरता छुपा नहीं स��ती सरकार।
इस दौरान राहुल ने लगातार ये सुनिश्चित किया कि राज्यसभा और लोकसभा में रोज़ाना सुबह प्रदर्शन हों, विपक्ष प्रधान के इस्तीफे की मांग पर एकजुट रहे। सरकार ने चर्चा में उलझाना चाहा, फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में उलझाना चाहा, किसी बिल में उलझाना चाहा लेकिन राहुल नहीं रुके। राहुल ने साफ़ शब्दों में दो टूक कहा कि पहले इस्तीफ़ा होगा, उसके बाद कोई और बात होगी।
अगले दिन भी राहुल नहीं रुके, राहुल उन 5 छात्रों को मीडिया के सामने ले आए, जिन्होंने जंतर मंतर पर अनशन किया। वो छात्र जिन्हें CJP ने मंच नहीं दिया। वो छात्राओं को लेकर सामने आए और मीडिया के सामने मंच सौंपते हुए बोलने का मौक़ा दिया।
राहुल को ख़बर लगी कि सरकार मुद्दे से भटकाने के लिए धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रालय बदलने की तैयारी में है। राहुल ने तुरंत मीडिया के सामने साफ़ शब्दों में कहा कि मंत्रालय बदलने से बात नहीं बनेगी। इस्तीफा म���लब इस्तीफ़ा। धर्मेंद्र प्रधान को जाना ही पड़ेगा। नरेन्द्र मोदी के सामने से तमाम विकल्प राहुल ने एक झटके में खींच डाले।
अंततः राहुल नहीं रुके। राहुल की जीत हुई, जीत हुई उन छात्रों की जो राहुल की तरह ही थमे नहीं, दबे नहीं, रुके नहीं। राहुल नहीं रुके, राहुल नहीं रुकेंगे।
जय हिन्द। जय कांग्रेस। 🇮🇳
@RahulGandhi
बीजेपी वालों फिर से वही पुर��नी स्क्रिप्ट 🤦
कुछ तो नया लाओ यार, कुछ तो क्रिएटिव सोचो
नरेंद्र मोदी तुम्हारी IT Cell और कंटेंट creation टीम भी धर्मेंद्र प्रधान की तरह नल्ली है 😂
पेपरलीक पर जो बिल लाया जा रहा है, उस पर @hanumanbeniwal को सुनिए
जब बिल लाने वाले की नीयत ही ठीक नहीं है तो बिल से क्या होगा।
जिसने पेपर लीक करवाय�� उसको ही नहीं हटा रहे तो बिल लाने से क्या हो जाएगा?
मेट्रो बंद करो।
रास्ते बंद करो।
दुकानें बंद करो।
Internet बंद करो।
खाना बंद करो।
अपना हक़ मांग रहे छात्रों के ख़िलाफ़ सरकार ने ये क्रूर कदम उठाए।
बस एक चीज़ बंद नहीं कर पाए, मोदी जी - पेपर लीक।
Two leaders. Both posted videos today.
Rahul Gandhi is fighting for students facing pellet guns. Narendra Modi is bragging about his Instagram views.
Who do you think is a more serious leader?