राम मंदिर में चोरी की घटना को लेकर सामने आई बातों ने एक अलग ही सवाल खड़ा कर दिया है। जो लोग दूसरों को नैतिकता और संस्कार का पाठ पढ़ाते नहीं थकते, उनके सामने जब सवाल उनके अपने आचरण का आता है तो जवाब ढूँढ़ना मुश्किल हो जाता है।
अखिलेश यादव को लेकर गलत-सलत बोलने वाले एक व्यक्ति को जिस सलीके और तर्क के साथ जवाब देकर आईना दिखाया गया, वह देखने लायक है। बात सिर्फ राजनीति की नहीं है बात उस सोच की है, जो दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने गिरेबान में झाँकना भूल जाती है।
और अगर मंदिर में चढ़ाई गई पादुकाओं तक की चोरी के आरोप सामने आ रहे हैं, तो सवाल स्वाभाविक है आखिर लालच की सीमा कहाँ खत्म होगी? चंदे से लेकर चढ़ावे तक, हर जगह ईमानदारी का भाषण देने वालों से जनता अब हिसाब भी पूछेगी।
मंदिर आस्था का स्थान है, राजनीति का मंच नहीं। वहाँ आने वाला चढ़ावा किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, श्रद्धालुओं की श्रद्धा है।
दूसरों के चरित्र का प्रमाणपत्र बाँटने से पहले अपने आचरण का हिसाब देना भी जरूरी है। क्योंकि जनता सब देखती है और वक्त आने पर सवाल भी करती है।
शादी नही कराओगे जब तक नीचे नही आउंगी,,,
यह लड़की किसी लड़के से प्यार करती थी लेकिन घर बाले नही चाहते थे कि उस लड़के से उसकी
शादी हो। लड़की से घर बालों ने मना किया तो यह एक टावर पर चढ़ गयी और उतरने का नाम
नही ले रही थी, घर बालों ने पुलिस को फोन करके इस घटना स्थल पर पहुँच कर इस लड़की पुलिस वालो ने उतार लिया।
उकसाने की राजनीति!
पहले खुद सामने वाले यादव लड़के को कुछ बोलने के लिए उकसाते है। फिर इंतजार करते हैं कि गुस्से में उससे गलत शब्द निकल जाए।
जैसे ही कुछ गलत शब्द निकला, तुरंत उसी बात को अखिलेश यादव और पूरे यादव समाज से जोड़कर राजनीति शुरू कर देतें है, और इतना ही नहीं आगे ये भी लिखतें है कि।
अखिलेश यादव की सरकार आई तो इनकी गुंडागर्दी और बढ़ जाएगी, वगैरह-वगैरह लिखना शुरू कर देंते है।
और जब सामने वाले से तर्क के साथ जवाब मिलना लगता है तो बहस छोड़कर पुलिस और SC/ST कानून का डर दिखना शुरू कर देतें है।
भाई ये बहस नहीं है..
पहले उकसाना, फिर विवाद खड़ा करना और आखिर में उसी विवाद के सहारे फेमस होने की कोशिश करना है।
तर्क है तो तर्क से जवाब दो, समाज को निशाना बनाकर नहीं। और न SC/ST कानून का डर दिखा कर।
आज तक इन्होंने समाज वादियों की छत्र छाया मे मे पले बढे आज ये उसी पेंड को काटने की कोशिस कर रहे है।
जो पैसा बीजेपी से लिया है समाज वादियों के खिलाफ लिखने का उसी से दादी का घर बनवा देते, और जो नितिन को 40 हजार मिला उसी से टीन सेट डलवा दे।
कुछ चन्द viwes के चक्कर मे समाज वादियों को बदनाम मत करो।
इतना बड़ा creatre कहते है खुद को सरकार से एक आवास नही दिला पाए थू है तुम पर शर्म आनी चाहिए तुम्हे ।
👉 लाओ रे हुक्का।
मध्य प्रदेश में बस किराया लगभग 30% तक बढ़ाना आम यात्रियों पर सीधा अतिरिक्त बोझ है।
पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए रोज बस से सफर करना अब और महंगा हो गया।
नौकरी, पढ़ाई और रोजमर्रा के काम के लिए बसों पर निर्भर लोगों का खर्च बढ गया।
जतना को राहत देने के लिए सरकार को इस बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करना चाहिए।
@DrMohanYadav51@udaypratapmp
मशहूर टीचर अवध ओझा सर को सुनिए - "आरक्षण खत्म करने की बजाय जातिवाद खत्म कीजिए , जैसे ही जातिवाद खत्म होगा आरक्षण वैसे ही खत्म हो जाएगा "
अवध ओझा के इस विचार से कितने लोग सहमत हैं?
मध्य प्रदेश में बस किराया लगभग 30% तक बढ़ाना आम यात्रियों पर सीधा अतिरिक्त बोझ है।
पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए रोज बस से सफर करना अब और महंगा हो गया।
नौकरी, पढ़ाई और रोजमर्रा के काम के लिए बसों पर निर्भर लोगों का खर्च बढ गया।
जतना को राहत देने के लिए सरकार को इस बढ़ोतरी पर पुनर्विचार करना चाहिए।
@DrMohanYadav51@udaypratapmp
विरोध करना हर किसी का अधिकार है, लेकिन अपनी बात रखते हुए पुलिसकर्मीयो के साथ भी सम्मान और संयम बनाए रखना जरूरी है। आखिरकार वे भी अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।