एक फैक्ट :-
>अगर आपकी गाड़ी खूब धुआँ फेंकती हो, लेकिन आपके पास पोल्युशन सर्टिफिकेट है तो इसका मतलब है कि आपकी गाड़ी पॉल्यूशन नहीं फैला रही है।
>लेकिन आपका सर्टिफिकेट एक्सपायर हो गया है तो आपका चालान होगा चाहे आपकी गाड़ी धुंआ फेंके या नहीं।
है न मजेदार बात।
हमारे देश में जूस की दुकानों के जो हालात हैं…
वैसे शायद ही दुनिया में कहीं और होंगे…
गंदगी से भरी हुई दुकानें…
गंदे हाथों से जूस बन रहा हैं…
सडे गले फल भी साथ में पीसे जा रहे हैं…
बदबूदार पानी, चारों तरफ़ मक्खियाँ…
लेकिन फिर भी धड़ल्ले से बिक रहा है… और लोग भरपूर जूस पी रहे हैं…!!!
और अच्छे अच्छे रेस्टोरेन्ट और होटलों में भी लगभग यही हाल हैं…
जोधपुर इतना बड़ा शहर है… लेकिन पूरे शहर में एक दो ही ऐसी जगह हैं..
जहाँ बेफ़िक्री से जूस पिया जा सकता है…
बाक़ी जगह तो खड़ा भी नहीं रहा जा सकता…!!
बड़ी खबर 💥
पेट्रोल 20 रुपए और डीजल 25 रुपए सस्ता हो गया. सरकार ने लोगों की भलाई का सोचते हुए ये फैसला लिया है.
कच्चे तेल के दाम बहुत कम हो गए हैं. इसलिए सरकार ने जनता को महंगाई से राहत दी है.
श्रीलंका की सरकार ने ये शानदार फैसला लिया है.
10 लाख की मशीन 33 लाख में खरीदने वाले...
फिर जनता को भ्रष्टाचार पर भाषण भी यही देंगे।
कमाल है, चोरी भी करेंगे और चौकीदार भी खुद बनेंगे।
फिर कहते हैं कि देश के पास अस्पतालों के लिए पैसा नहीं है।
पैसा है... बस रास्ते में ही बीमार पड़ जाता है।टैक्स हम दें...
हिसाब कोई न दे...सवाल पूछो तो राजनीति बता दी जाए।
यही नया मॉडल है ?
>ब्रो का नाम भागीरथ चौधरी है
>ब्रो अपना केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री है
>ब्रो को खीरे बहुत पसंद है
>ब्रो ने खीरे की खेती करने का सोचा
>ब्रो ने अपने मंत्रालय से 99 लाख की सब्सिडी पेल दी
>किसानों की आय बढ़े न बढ़े ब्रो की आय कई गुना बढ़ गयी
>ब्रो कोई नया मंत्रालय मिलने पर और बड़ा घोटाला करेगा
>ब्रो अपना कूल है
मंत्रियों-मुख्यमंत्रियों के ये घोटाले अपने आप को देश के सबसे बड़े बताने वाले अखबारों की पकड़ में नहीं आते क्या?
क्या सारी जिम्मेदारी अकेले इंडियन एक्सप्रेस उठाएगा?
राजस्थान में आज के समय लाखों सरकारी कर्मचारी ऐसे होंगे…
जिन्होंने या तो पेपर ख़रीद के परीक्षा पास की है…
OMR फ़र्ज़ीवाडा करके नौकरी हासिल की है…
रिश्वत देकर नौकरी हासिल की है…
या RPSC और चयन बोर्ड में सेटिंग करके नौकरी हासिल की हैं…!!
आज आप चाहे जो मर्ज़ी जाँचे करवा लो…
एक को भी पकड़ पाना नामुमकिन हैं…
जो नौकरी लग गया वो ईमानदार साबित हो गया..!!
सभी के मन में यही सवाल है कि इंडियन एक्सप्रेस में मोहन यादव के खिलाफ Journalism of Courage करने का साहस आखिर कहां से आया। अंदरूनी शक्ति के बिना ये साहस संभव ही नहीं है।