राममंदिर में ही चोरी हो गई....बोल तो रहे थे रामराज्य आ रहा....इधर तो चोरों का राज आ गया!
अब बड़े लुटेरों को बचा रहे... छोटे जेबकतरों को पकड़ने का नाटक कर रहे!
अब करो ना एनकाउंटर चोरों का....चलाओ ना बुलडोजर लुटेरों पर!
जनता तो यही न्याय चाहती है... लेकिन आपमें नहीं है हिम्मत!
गरीब किसानों के नाम पर योजनाएं.. और लाभ किसे मिल रहा है?
मंत्री जी ने कृषि मंत्रालय से ₹99 लाख रुपए की सब्सिडी उठाई - खीरे की खेती के लिए। अप्रैल 2025 में सब्सिडी मांगी और सिर्फ 14 दिन में अप्रूवल भी मिल गया। ये सीधे तौर से पद के दुरुपयोग का मामला है।
गरीब कल्याण और किसान हित की बात करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की सरकार से अब एक सीधा सवाल है – आखिर इन योजनाओं का वास्तविक लाभार्थी कौन है?
बड़े-बड़े बजट, करोड़ों-अरबों की घोषणाएं और जनकल्याण के दावे... लेकिन जब जमीन पर हकीकत देखी जाती है तो सवाल खड़े होते हैं।
एक ओर देश का सामान्य किसान कुछ हजार रुपये की सब्सिडी के लिए महीनों सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर है... वहीं दूसरी ओर ऐसी खबरें सामने आती हैं कि सत्ता और व्यवस्था से जुड़े लोगों को लाखों रुपये की सब्सिडी आसानी से उपलब्ध हो जाती है।
अगर किसान के नाम पर बनी व्यवस्था का लाभ वास्तविक जरूरतमंद किसान तक नहीं पहुंचता, बल्कि वही लोग उसका फायदा उठाने लगें जो उस व्यवस्था का हिस्सा हैं, तो यह केवल आर्थिक मामला नहीं, बल्कि व्यवस्था की पारदर्शिता और नैतिकता का गंभीर प्रश्न है।
कृषि इस देश की अर्थव्यवस्था की आत्मा है। किसानों को सशक्त बनाने के लिए दी जाने वाली हर सहायता का उद्देश्य उस किसान तक पहुंचना चाहिए, जो अपनी मेहनत से देश का पेट भरता है।
लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा सिर्फ नियम बनाने की नहीं होती, बल्कि उदाहरण प्रस्तुत करने की भी होती है।
#ExpressInvestigation
जब भी किसी काली गाड़ी वाले को सड़क पर ग़लत ओवरटेक करते देखता हूं तो मन से गाली निकलती है, फिर याद आता है, गडकरी ने एथेनॉल तो इसकी गाड़ी में भी मिलाया होगा.
#राजस्थान_में_आपातकाल