असम में बाढ़ पीड़ित परिवारों की मदद के लिए एक कदम।
संकट की इस घड़ी में उनके साथ खड़े होने का प्रयास किया।
मुश्किल वक्त में मदद करना ही इंसानियत का सबसे बड़ा धर्म है।
#assamfloods#humanity#NirmalChoudhary
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र फीस वृद्धि और सीट कटौती के खिलाफ़ अपने भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन प्रशासन छात्रों को सुनने के बजाय उन पर FIR कर रहा है।
मोदी सरकार की नीति ही युवाओं की आवाज़ दबाना है। सवाल पूछो तो लाठी, विरोध करो तो मुक़दमे, और आवाज़ उठाओ तो पेलेट गन।
जब मैंने छात्रों की बात को सुनने के लिए प्रयागराज आने का फैसला किया, तब से प्रशासन मेरे कार्यक्रम को हर संभव तरीके से रोकने की कोशिश कर रहा है।
साफ़ है, उन्हें छात्रों की गूंज से भी डर लग रहा है।
मैं छात्रों के साथ हूँ। सरकार चाहे जितनी भी कोशिश कर ले, मुझे छात्रों की आवाज़ उठाने से रोक नहीं सकती।
सभी देशवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ।
ज्ञान, संस्कार और जीवन का सही मार्ग दिखाने वाले सभी गुरुजनों को कोटि-कोटि प्रणाम।
ईश्वर से प्रार्थना है कि हम सभी पर गुरुजनों की कृपा सदैव बनी रहे और उनका आशीर्वाद हमें सत्य, सेवा एवं सदाचार के मार्ग पर अग्रसर करता रहे।
सांसद एवं कांग्रेस महासचिव @priyankagandhi जी का वक्तव्य देश की शिक्षा व्यवस्था की खामियों और सरकार की उदासीनता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बढ़ता खर्च परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ डाल रहा है। कई परिवारों को अपने बच्चों के भविष्य के लिए कर्ज तक लेना पड़ता है।
व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो पारदर्शी और निष्पक्ष हो। साथ ही, छात्रों के भविष्य के लिए समान अवसर भी सुनिश्चित करे।
आज बार-बार होने वाले पेपर लीक के कारण छात्रों का इस व्यवस्था से भरोसा टूट चुका है। उनकी मांग है कि — मेहनत का सम्मान हो।
छात्रों की माँग को लेकर धरने पर बैठे राहुल गांधी जी, सांसदों और विपक्ष के नेताओं को जिस प्रकार से प्रधानमंत्री आवास के सामने से गिरफ्तार किया गया है, उसकी मैं कड़े शब्दों में निंदा करता हूँ।
छात्रों और युवाओं के कदम अब पीछे हटने वाले नहीं हैं। पिछले एक महीने से लाखों छात्र और युवा NEET परीक्षा में हुई अनियमितताओं और पेपर लीक के खिलाफ न्याय की मांग कर रहे हैं। उनकी पहली और सबसे बड़ी मांग थी कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार छात्रों और युवाओं की आवाज़ सुनने के बजाय उनकी आवाज़ दबाने और दमनकारी रवैया अपनाने में लगी हुई है।
पेपर लीक का मुद्दा घर-घर की चर्चा बन चुका है। पूरा देश चाहता है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों पर जवाबदेही तय हो, सख्त कार्रवाई हो और दोषियों को कठोर सज़ा मिले। लेकिन इस भावना के ठीक विपरीत प्रधानमंत्री मोदी और सरकार अपने मंत्री को बचाने में लगी हुई है।
छात्रों और युवाओं के साथ हो रहे इस अन्याय का जवाब भाजपा को ज़रूर मिलेगा।
छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।
प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे - नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।
मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए
छात्रों पर हमला हर भारतीय परिवार पर हमला है।
प्रधानमंत्री मोदी को लगता है कि वो बिना जवाब दिए, बिना किसी नतीजे का सामना किए बच निकलेंगे - नहीं कर पाएंगे, इस बार तो बिल्कुल नहीं।
मैं हर उस देशभक्त भारतीय से अपील करता हूं जो मानता है कि हमारे छात्रों को न्याय मिलना चाहिए - प्रधानमंत्री आवास के सामने हमारे धरने में शामिल हों।
भारत के छात्रों की आवाज़ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
An attack on students is an attack on every Indian family.
PM Modi believes he can get away without answers, without consequences. He cannot. Not this time.
I ask every patriotic Indian who believes our students deserve justice - join us in dharna in front of the Prime Minister’s residence.
The voice of India’s students will not be ignored.