न मैँ दलित हूँ न मै सवर्ण हूँ
न मैँ काला हूँ न गौरवर्ण हूँ
न तो यादव हूँ और न ही जाट हूँ
न ही अमीर का पलंग और न ही गरीब की खाट हूँ
मै ना तो लोधी ना ठाकुर न तो पंडित ना ही स्वर्णकार,
मैँ तो हिन्दूस्थानी हूँ जिसकी महिमा अपरम्पार
आओ जाति वर्ण का भेद मिटा दे
हर सनातनी को गले लगा ले।
जब पुलिस पर पत्थर चल रहे थे तब सारे पत्रकार एक सुर में ज्ञान पेल रहे थे कि मासूम छात्रों पर बर्बरता न की जाए...जब साथ के पत्रकार पिटने लगे तो सबके अंदर का जमीर जाग गया और यही छात्र अब उन्हें गुंडे दिखने लगे.
CJP PROTESTOR : Modi Ji doesn't know P of Pariksha.
REPORTER : Ok, What is the full form of NEET?
CJP PROTESTOR : Don't know
REPORTER : Full form of CBSE.
CJP PROTESTOR : NO 😭
सलमान नाम के एक शख्स की इंस्टाग्राम रील ने पूरी कहानी सामने रख दी।
जंतर मंतर की दीवार तोड़कर पत्थर इकट्ठे किए गए, फिर दूसरी तरफ मौजूद पुलिस पर हमला किया गया और उसके बाद “नेपाल जैसे हालात” वाला नैरेटिव वायरल किया गया।
Ujjain, Madhya Pradesh: On Ashadh Shukla Saptami, Baba Mahakal awoke at 4 AM for devotees’ darshan. He was beautifully adorned and offered the sacred bhasma ritual, attracting devotees for early morning prayers.
(Video Source: Mahakal Mandir Pro)
बिहार प्रशासन शहीद भरत तिवारी हत्याकांड जांच में लीपापोती करने पर लगी हुई है, अगर बिहार सरकार सच में ईमानदारी से शहीद भरत तिवारी हत्याकांड पर लीपापोती नहीं कर रही है तो बस कुछ चंद सवालों का जवाब जरूर देने होंगे....।
1:-- जब शहीद भरत तिवारी की हत्या बिहार पुलिस ने ही की तो जांच कैसे बिहार पुलिस ही करेगी...?
2:-- जब बिहार सरकार को शहीद भरत तिवारी हत्याकांड की जांच करानी ही थी तो क्यों नहीं सीबी सीआईडी या सीबीआई से जांच करवा रही है जिसमें पारदर्शिता रहती..?
3:-- जब शहीद भरत तिवारी की हत्या हुई उस समय घटनास्थल पर एसडीएम क्या कर रहा था, जबकि सर्वविदित है कि शहीद भरत तिवारी का एसडीएम के साथ विवाद था...देश में तमाम एनकाउंटर के इतिहास में पहली बार एनकाउंटर स्थल पर एसडीएम का रहना गहरा संदेश पैदा करता है और एफआईआर में एसडीएम का नाम ही बाहर है, जबकि इतिहास में कही कोई नहीं सुना होगा कि एनकाउंटर स्थल पर एसडीएम और डीएम भी रहते है...?
4:-- शहीद भरत तिवारी की न्यायिक जांच किसके अनुसंधान में हो रही है मतलब केस का आईओ कौन है..?
5:-- शहीद भरत तिवारी के हत्या के आरोपी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो चुका है फिर भी वो बाहर खुलेआम कैसे घूम रहे है, उन्हें अभीतक जेल में क्यों नहीं डाला गया है..?
6:-- शहीद भरत तिवारी हत्याकांड की न्यायिक जांच हाईकोर्ट के सीटिंग जज से क्यों नहीं हो रही है, क्यों रिटायर्ड जज को न्यायिक जांच का जिम्मा दिया गया हैं..?
7:-- शहीद भरत तिवारी का मोबाइल जो पुलिस ने जब्त कर रखी है उसमें जवईनिया गांव पुनर्स्थापना में लगे 1400 करोड़ रुपयों का बंदर बाँट से जुड़े तमाम सबूत है पुलिस ने उसकी काल डिटेल निकलवाकर अभी तक उनका मोबाइल परिजनों को क्यों नहीं सौंपा है...?
बहुत सारे सवाल है जो शहीद भरत तिवारी हत्याकांड की जांच को लेकर बिहार सरकार को कठघरे में खड़ा करते है...इसमें कोई दो राय नहीं है कि भाजपा शासन में न्याय मिलना मुश्किल नहीं नामुमकिन होता जा रहा है,!!
शहीद भरत तिवारी अमर रहे