बिहार में पीएचडी के नए नियम: मुख्य बातें
लोक भवन ने 'बिहार स्टेट यूनिवर्सिटीज पीएचडी ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशंस, 2026' को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद वर्ष 2017 के पुराने नियम समाप्त हो गए हैं। यह व्यवस्था 4 जुलाई से प्रभावी मानी जाएगी।
अखबार की इस रिपोर्ट के मुख्य बिंदु नीचे दिए गए हैं:
स्नातक के बाद सीधे पीएचडी में प्रवेश
7.5 CGPA अनिवार्य: चार वर्षीय स्नातक (Undergraduate) कार्यक्रम में छठे सेमेस्टर तक 7.5 या उससे अधिक CGPA हासिल करने वाले छात्र सीधे पीएचडी में प्रवेश पा सकेंगे। इन्हें एक वर्षीय मास्टर डिग्री करने की आवश्यकता नहीं होगी।
चार वर्षीय स्नातक के विकल्प: 4 साल का कोर्स सफलतापूर्वक पूरा करने पर 'ऑनर्स विद रिसर्च' की डिग्री मिलेगी।
पीजी और अन्य छात्रों के लिए योग्यता
मास्टर डिग्री की अनिवार्यता: तीन वर्षीय स्नातक करने वाले छात्रों को दो वर्षीय स्नातकोत्तर (PG) या चार वर्षीय स्नातक के बाद एक वर्षीय मास्टर डिग्री पूरी करनी होगी।
न्यूनतम अंक: सामान्य वर्ग के लिए पीजी में न्यूनतम 55% अंक होना अनिवार्य है, जबकि आरक्षित वर्गों को यूजीसी नियमों के अनुसार छूट मिलेगी।
प्रवेश और चयन प्रक्रिया
पात्रता परीक्षा: पीएचडी में प्रवेश केवल UGC-NET, UGC-CSIR-NET या GATE उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को ही मिलेगा।
वेटेज व्यवस्था: चयन के लिए 80% वेटेज नेट-गेट (NET/GATE) के अंकों को और 20% वेटेज साक्षात्कार (Interview) को दिया जाएगा।
कोर्स की अवधि और अन्य नियम
अवधि: पीएचडी की न्यूनतम अवधि 3 वर्ष और अधिकतम 6 वर्ष होगी। विशेष परिस्थितियों में 2 वर्ष का अतिरिक्त समय मिल सकता है।
विशेष छूट: महिला शोधार्थियों और 40% से अधिक दिव्यांगता वाले शोधार्थियों को अतिरिक्त 2 वर्ष की छूट मिलेगी।
अनिवार्य प्रशिक्षण: सभी नए पीएचडी शोधार्थियों को शिक्षण, लेखन और शैक्षणिक प्रशिक्षण लेना होगा।
शिक्षकों पर प्रतिबंध: जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति (Retirement) में 3 वर्ष से कम का समय बचा है, वे अब नए पीएचडी शोधार्थी नहीं ले सकेंगे।
@ChitranjanGaga1 अगर उस समय हिम्मत दिखा के #डोमिसाइल के लिए आपलोगो ने सरकार गिरा दिया होता तो आज बिहार के युवा बिना मांगे आपको वोट देता
पर आप लोगो को तो सत्ता का मोह था,जो आज भंग हो चुका है।
अब पछतायत होत क्या
जब चिड़िया चुग गयी खेत।
ना सत्ता रहा,न देने के लिए नौकरी बची,
वोट बाहरियों से लीजियेगा
@RajeshKumar_01 सही कहा आपने सर, बहुत तेज प्रोसेस है।
मगर बड़े बुजुर्ग लोगो ने गलत तो नही कहा,
देर आये,पर दुरुस्त आये।
हड़बड़ी के बियाह,कनपटी में सेंदुर।
शांति का काम भगवान का,और हड़बड़ी शैतान का।
आप जल्दीबाजी में रिजल्ट ही दे,और फर्जी को नौकरी देके,जायज अभियार्थी को बाहर कर देते है।
@satishdubeyy पहली बार आपके मुह से सिकटा का नाम सुने
अगर यहाँ ट्रैन नही तो वोट को भूल ही जाए
आपको तो ये भी बोलना चाहिए था कि यहाँ के जनता ने ये ठाना है कि 'रेल नही तो वोट नही' का नारा बुलंद कर रहे है।
@News18Bihar भाई साहब जब आपको कुछ मालूम ही नही रहता है तो काहेला उपमुख्यमंत्री बने हो,इस्तीफा दे दो।
शिक्षक बहाली में जिस तरह आप सब का रवैया है 1 साल बाद तो इस्तीफा देना ही है।
#सप्लामेंट्री_रिजल्ट