झारखंड जमशेदपुर के लोकप्रिय समाजसेवी ,झारखंड भाजपा पूर्व प्रदेश प्रवक्ता, हमारे अभिभावक परम आदरणीय श्री @AmarpreetKale अमरप्रीत सिंह काले जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और अनंत शुभकामनाएं आप सदा स्वस्थ रहे मस्त रहे ईश्वर से यही मेरी प्रार्थना है , बहुत बहुत बधाई भईया ❣️👑💐✨
10 साल की निःस्वार्थ सेवा,10,000+बेजुबानों की जान बचाई।MLA
@PurnimaDasSahu की 2 चिट्ठी, उप नगर आयुक्त की सहमति...फिर भी @DCEastSinghbhum सर, JNAC हमें शेल्टर की जमीन नहीं दे रहा।सरकार पर 1₹ का बोझ नहीं, सारा खर्च हम उठाएंगे।फिर फाइल क्यों अटकी है सर @HemantSorenJMM@JharkhandCMO
अभी नाम जपो, बाद में अवसर नहीं मिलेगा।
Shri Hit Premanand Govind Sharan Ji Maharaj
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भजन मार्ग | परम पूज्य वृन्दावन रसिक संत श्री हित प्रेमानन्द गोविन्द शरण जी महाराज
श्री हित राधा केली कुंज, वराह घाट, वृन्दावन धाम
आज निवास स्थल पर डूंगरपुर जिले के दो होनहार तीरंदाज खिलाड़ियों को CSR फण्ड से 5-5 लाख रुपए के उच्च-स्तरीय कम्पाउंड धनुष भेंट किए।
आदिवासी क्षेत्र के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नही है, बस सही संसाधन और मंच मिलना चाहिए। आज इन खिलाड़ियों व उनके परिवार से मुलाकात कर हौंसला अफजाई की। आप देश स्तर पर हमारे क्षेत्र का नाम रोशन करें।
राम जी जब लंका विजय करके अयोध्या लौटे, तो कुछ समय बाद उन्होंने विभीषण, सुग्रीव, जामवंत और अंगद आदि को सम्मानपूर्वक विदा कर दिया।
सबको लगा कि हनुमान जी को भी बाद में विदा किया जाएगा, लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी को जाने के लिए कुछ कहा ही नहीं।
धीरे-धीरे अयोध्या में चर्चा होने लगी—“सब तो चले गए, पर हनुमान जी क्यों यहीं हैं?”
:-दरबार में चर्चा-
दरबार में विचार हुआ कि हनुमान जी से कौन कहे कि वे लौट जाएँ। सबसे पहले माता सीता जी से आग्रह किया गया।
सीता जी ने भावुक होकर कहा—
“जब मैं लंका में दुःख में थी, हर दिन कल्प के समान बीत रहा था। उसी समय हनुमान जी ही थे, जो प्रभु की मुद्रिका लेकर आए और मुझे धैर्य दिया। मैं अपने पुत्र समान हनुमान से कभी नहीं कह सकती कि वे अयोध्या छोड़ दें।”
:- लक्ष्मण जी का उत्तर-
फिर लक्ष्मण जी से कहा गया। वे बोले—
“मैं युद्धभूमि में मृत्यु के करीब था। तब हनुमान जी ने ही मेरे प्राण बचाए। जो मेरे जीवनदाता हैं, उनसे मैं कैसे कह दूँ कि वे चले जाएँ?”
:-भरत जी की भावनाएँ-
अब भरत जी की बारी आई। वे बोले—
“मेरे ऊपर पहले ही यह कलंक है कि राम जी को वन जाना पड़ा। और जब मैं नंदीग्राम में प्राण त्यागने को तैयार था, तब हनुमान जी ही शुभ समाचार लेकर आए। मैं उनसे ऐसा कैसे कह सकता हूँ?”
:-शत्रुघ्न जी का जवाब-
जब सबने शत्रुघ्न जी की ओर देखा, तो वे मुस्कुराकर बोले—
“मैंने तो पूरी रामायण में कुछ नहीं कहा, तो आज क्यों बोलूं—वो भी हनुमान जी को जाने के लिए! जिन्होंने सबका जीवन बचाया, उनसे मैं ऐसा नहीं कह सकता।”
:- अब बारी आई प्रभु श्रीराम जी की-
माता सीता ने कहा—
“प्रभु! आप तो तीनों लोकों के स्वामी हैं, फिर हनुमान जी से संकोच क्यों?”
तब श्रीराम बोले—
“देवी! मैं हनुमान का ऋणी हूँ। उनके उपकारों का बदला चुकाना मेरे लिए संभव नहीं। उनके सामने मैं स्वयं को छोटा महसूस करता हूँ।”
उन्होंने कहा—
“हनुमान जी का उपकार तभी चुकाया जा सकता है, जब मैं भी उनके लिए वैसा ही करूँ—जो उन्होंने मेरे लिए किया। लेकिन यह संभव नहीं है।”
:- सभा में हनुमान जी की इच्छा-
अगले दिन सभा में श्रीराम ने हनुमान जी से कहा-
“सबको मैंने कोई न कोई पद दिया है, तुम भी अपनी इच्छा बताओ।”
हनुमान जी विनम्रता से बोले—
“प्रभु! यदि मैं आपसे दो पद मांगूं तो?”
राम जी मुस्कुराए—“मांग लो।”
तब हनुमान जी ने प्रभु के चरण पकड़ लिए और बोले—
“मुझे कोई राज्य या पद नहीं चाहिए, जिसमें अहंकार आ जाए। मुझे तो बस आपके दोनों इन्हीं पदों (चरणों) की सेवा चाहिए।”
* सच ही कहा गया है—
हनुमान जैसा भाग्यशाली कोई नहीं, और रामचरणों में प्रेम रखने वाला भी हनुमान जी जैसा दूजा कोई नहीं।
जय श्री राम - जय हनुमान जी महाराज!
🚨 Ravichandran Ashwin on YouTube:
Ashwin said, “If Rohit Sharma and Virat Kohli open in the 2027 World Cup, then Ruturaj Gaikwad and Shreyas Iyer can bat at No. 3 and 4.”
Bro casually removed captain Shubman Gill from the XI. 😭🔥
Stop atrocities against Christians!
District Sukma: They are kicked out by villagers from village because they are Christians
Sanju #INDvsAUS Dube सरदार वल्लभभाई पटेल