महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन चरित्र, पेज 220 एवं 285 पर लिखा है कि दयानंद जी तंबाकू खाते थे व सूंघते थे तथा हुक्का भी पीते थे।
#वाहरे_समाज_नाशक_महर्षिदयानंद
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सत्यार्थ प्रकाश, समुल्लास 11, पृष्ठ 297-298 पर दयानंद सरस्वती ने सिख धर्म के प्रथम गुरु, आदरणीय श्री गुरुनानक देव जी के ज्ञान और भाषा पर भी अनुचित आक्षेप लगाए। लिखा है कि उन्हें ज्ञान नहीं था।
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श्रीराम, श्रीकृष्ण, विष्णु, शिव आदि की मूर्ति की पूजा क्यों नहीं करते?
आर्य समाजियों इन सवालों के जवाब दो।
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♦️ आत्महत्या (Suicide) से बचाव
आज के तनावपूर्ण समय में डिप्रेशन और आत्महत्या जैसी समस्याओं का संत रामपाल जी ने आध्यात्मिक ज्ञान से सटीक समाधान दिया है। उनके शिष्य बड़ी से बड़ी मुसीबत में भी धैर्य नहीं खोते।
#जगत_उद्धारक_संतरामपालजी
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श्रीमद्देवीभागवत, भाग 1, स्कन्ध 4, अध्याय 13, श्लोक 27-29 और श्रीमद्देवीभागवत, भाग 1, स्कन्ध 5, अध्याय 27, श्लोक 31-33 में स्पष्ट लिखा है कि आयु के समाप्त होने पर ब्रह्मा, विष्णु व शिव (महेश) की भी मृत्यु होती है। यानी ये स्वयं जन्म-मृत्यु में हैं तो हमें मोक्ष प्रदान नहीं कर
कांवड़ लाने का प्रमाण न गीता में है और न वेद में और न परमात्मा प्राप्त संतों की वाणी में। इसलिए यह एक शास्त्र विरुद्ध साधना है और इस बारे में श्रीमद्भागवत महापुराण, स्कन्ध 5, अध्याय 26, श्लोक 15 में भी लिखा है कि वैदिक मार्ग को छोड़कर जो पाखंड यानी कर्मकांड करता है उसे नरक में
कबीर साहेब माता के गर्भ से जन्म नहीं लेते। वे सन् 1398, विक्रमी संवत् 1455 में, काशी के पवित्र लहरतारा तालाब में खिले कमल के पुष्प पर शिशु रूप में सशरीर प्रकट हुए थे। यह कोई सामान्य जन्म नहीं, बल्कि साक्षात् परमात्मा का प्राकट्य था।
प्रमाण: ऋग्वेद मण्डल 10, सूक्त 4, मंत्र
और 10 HP की समर्सिबल मोटर सहित पूरा सेट गांव पहुंचाया गया। 3 किलोमीटर दूर नहर से गांव तक मीठे पानी की आवक से गाँव का 30 साल पुराना जल संकट हमेशा के लिए समाप्त होने जा रहा है।
#संतरामपालजी_का_वरदान#शुद्ध_जल_पियेगा_हिंदुस्तान
गांव मेहरड़ा में 30 साल पुरानी जल समस्या का समाधान
जींद के मेहरड़ा गांव में गंभीर पेयजल संकट को समाप्त करने के लिए सन्त रामपाल जी महाराज का परोपकारी प्रयास। पंचायत की अरदास के मात्र 24 घंटे के भीतर संत रामपाल जी महाराज ने शुद्ध पेयजल अभियान के तहत 10,500 फीट लंबी पेयजल पाइपलाइन