@kkjourno देश आर्थिक रूप से कंगाल नहीं है, लेकिन वैश्विक युद्ध और तेल की महंगाई के डर से सरकार लाचार है।
वह अपनी इसी लाचारी और आर्थिक नीतियों के अंतर्विरोधों को छिपाने के लिए जनता के सामने 'स्वदेशी' का कार्ड खेल रही है
@Kapil_Jyani_ देश की Gen-Z के असंतोष, बेरोजगारी और व्यवस्था के खिलाफ गुस्से को भुना रहे हैं और अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं।
लोकतंत्र में ऐसे स्वतंत्र प्रेशर ग्रुप्स का होना जरूरी है जो किसी एक विचारधारा के गुलाम न होकर सीधे युवाओं के हक की बात करें।
@Mamta010619 ATM का मतलब Automated Teller Machine है...
बाकी जो इसे "आएगा तो मोदी" बता रहे हैं, वो WhatsApp University के गोल्ड मेडलिस्ट, PhD इन फ़ॉरवर्डोलॉजी और बिना एडमिशन के टॉपर हैं। 🤣
@Kapil_Jyani_@DivyaMaderna
चुनाव बाद कार्यकर्ताओं व आम जनता के लिए सुलभ न होना।
ओसियां क्षेत्र में पानी और सड़कों की बुनियादी समस्याओं की उपेक्षा।
अधिकारियों से लगातार विवाद के कारण विकास कार्यों का अटकना।
अपनी ही पार्टी के नेताओं से टकराव, जिससे संगठन में बिखराव हुआ।
@khuchrep आम जनता से सोना न खरीदने और विदेश यात्रा टालने की अपील तो ठीक है, पर क्या यह नियम वीआईपी संस्कृति पर लागू नहीं होता?
नेताओं के बड़े काफिले और सरकारी फिजूलखर्ची पर भी रोक लगनी चाहिए।
संकट के समय आर्थिक सादगी और त्याग की शुरुआत सबसे पहले देश के मंत्रियों से होनी चाहिए।
@AnaArchana@MediaHarshVT खुद को सात्विक बताकर सार्वजनिक स्थानों पर जातिगत भेदभाव या छुआछूत को जायज ठहराना घोर निंदनीय और सामाजिक अपराध है।
सात्विकता मन और आचरण की शुद्धता से आती है, दूसरों को नीचा दिखाने से नहीं। जो लोग परंपरा के नाम पर नफ़रत फैलाते हैं, वे समाज के सबसे बड़े दुश्मन हैं।
कोटा निकाय चुनाव का घमासान केवल टिकटों की लड़ाई नहीं, बल्कि केंद्रीय अनुशासन की ढील और स्थानीय क्षत्रपों के बढ़ते वर्चस्व का नतीजा है।
दिल्ली की ढीली पकड़ और प्रदेश के दिग्गजों की आपसी होड़ ही कांग्रेस में इस अंतर्कलह के लिए ज़िम्मेदार है।
@AadeshRawal दलित व शोषित वर्ग का सम्मान आज राजनीति के केंद्र में है। जहाँ राहुल गांधी इसे सामाजिक न्याय व अधिकारों की लड़ाई बताते हैं, वहीं पीएम मोदी इसे सरकारी योजनाओं व प्रतिनिधित्व से जोड़ने का प्रयास करते हैं। उद्देश्य एक है, पर रास्ते और नीतियां अलग हैं।
@ManrajM7 ईमानदारी की कमाई से सोना खरीदना या विदेश घूमना हर नागरिक की व्यक्तिगत इच्छा और अधिकार है, जिसका सम्मान होना चाहिए।
वर्तमान वैश्विक संकट में देश की आर्थिक स्थिरता और डॉलर बचाने के लिए की गई स्वैच्छिक अपील को समझना भी ज़रूरी है। इच्छा और कर्तव्य का संतुलन ही देश को मजबूत बनाएगा।
लोकतंत्र में सवाल उठाना और असहमत होना हर नागरिक का अधिकार है, यही अभिव्यक्ति की आज़ादी है।
परंतु विरोध हमेशा तथ्यों और तर्क पर आधारित होना चाहिए, न कि केवल अंध-अविश्वास और अफवाहों पर। आज़ादी का मतलब ज़िम्मेदारी भी है, ताकि समाज में भ्रम की जगह सच की जीत हो।
हाँ मंत्री जी,
जो सरकार से- चन्दा चोरी, इथेनॉल, चीनी, प्याज, बेरोजगारी, छुआछूत, धार्मिक उमावद ,सरकारी नौकरी , एग्जाम पेपर लीक जैसे ज्वलंत प्रश्न पूछे वो सब दिमाकी नक्सली है।
अब आप हम सब नक्सलियों को पाकिस्तानी भी घोषित कर दीजिए
ओर हां हैं तो हम हिंदू आप मुस्लिम घोषित कर दीजिए 🙏
@AadeshRawal धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब नितिन गडकरी, जुआल ओराम व अन्य मंत्रियों से इस्तीफे मांगे जाने की अटकलें हैं।
मंत्रियों का कड़ा रुख और 'नकारात्मक प्रचार' के आरोपों ने शीर्ष नेतृत्व के लिए इस फेरबदल को और जटिल बना दिया है।
@Kapil_Jyani_ सच तो यह है कि SC/ST बजट के नाम पर दिखाई जाने वाली भारी राशि का केवल 4-5% ही सीधे वंचित वर्ग के बच्चों की छात्रवृत्ति या कल्याण योजनाओं तक पहुँचता है। बाकी पैसा सामान्य विकास कार्यों में लग जाता है।
@Kapil_Jyani_ सोशल मीडिया पर बजट के गलत आंकड़े फैलाना बंद करें। बजट 2026 में देश की सुरक्षा के लिए सर्वाधिक ₹7.85 लाख करोड़ का रक्षा बजट दिया गया है।
जबकि केंद्र का कुल SC/ST बजट ₹3.37 लाख करोड़ है, जो रक्षा बजट के आधे से भी कम है।
मंत्री बी. नागेंद्र का इस्तीफा देना दिखाता है कि केवल भ्रष्टाचार पर भाषण देने से सच नहीं बदलता।
सिर्फ इस्तीफा देना काफी नहीं, शोषित वर्ग के डूबे पैसे की पूरी वसूली और दोषियों को कड़ी सजा ही असली न्याय है।
उधर राहुल गांधी भ्रष्टाचार पर बड़ी-बड़ी बात करता रह गया और उसके कर्नाटक के मंत्री को भ्रष्टाचार का मामला साबित होने पर इस्तीफा देना पड़ गया
कर्नाटक के मंत्री ने वाल्मीकि समुदाय के बच्चों के स्कॉलरशिप के पैसे को अपने निजी इस्तेमाल में लगा दिया और आरोप साबित होने पर इस्तीफा देना पड़ा
घर की रसोई में शुद्धता व सात्विक नियम रखना व्यक्तिगत आस्था है, किसी से नफ़रत या जातिगत भेदभाव नहीं।
लेकिन सार्वजनिक जगहों पर भोजन या जाति के नाम पर किसी को अलग करना भी पूरी तरह गलत है। निजी परंपराओं का सम्मान और बाहर हर नागरिक को बराबरी—यही समाज का संतुलन है।🤝
मैं अपने घर में पूर्ण शुद्धता ही रखता हूँ। हमारे घर में सिगरेट, शराब, मांसाहार, अंडा तक पूर्णतः वर्जित है और इसे मैं किसी के लिए नहीं तोड़ता और न तोड़ूँगा। हमारी माताजी प्याज़ भी नहीं खाती थीं। बाद में हमारे घर में प्याज़ का कुछ बनने लगा तो माताजी ने उन बर्तनों को अलग करा दिया था। और यह शुद्धता रखने का अधिकार मैं ब्राह्मण हूँ, इसलिए नहीं है। यह इसलिए है कि, हमारे घर-परिवार इसका पूर्ण पालन होता है। स्व के पालन से अधिकार मिलता है और मैंने कोई दूसरी जातियों में भी यह पालन होते देखा है। बहुत कम, लेकिन क्षत्रिय परिवारों में भी मांसाहार वाले बर्तन अलग होते हैं। अब दलितों के नवचिंतकों को यह बात न समझ आए तो कोई क्या करे?
राहुल गांधी ने न किसी को गाली दी, न जातिसूचक शब्द कहे, फिर भी उन पर SC-ST एक्ट में केस दर्ज हो गया।
जब इस कानून का ऐसा इस्तेमाल विपक्ष के बड़े नेता पर हो सकता है, तो किसी झूठे केस में फंसे आम आदमी का क्या होता होगा?
क्या राहुल गांधी ने किसी SC-ST को गाली दी?
क्या राहुल गांधी ने किसी को कोई जाति सूचक शब्द कहे?
क्या राहुल गांधी ने किसी आजा-जजा वर्ग के व्यक्ति का अपमान किया?
अगर आपका जवाब नहीं, नहीं, नहीं है तो फिर उनके खिलाफ SC-ST एक्ट में केस कैसे दर्ज हो गया?
क्या यह SC-ST एक्ट का दुरुपयोग नहीं है?
और सवाल यह है कि जब एससी-एसटी एक्ट का दुरुपयोग राहुल गांधी जैसे बड़े नेता के खिलाफ हो सकता है तो फिर बेचारे आम आदमी की औकात क्या है इस देश में?
क्या कांग्रेस पार्टी एससी एसटी एक्ट के दुरुपयोग के खिलाफ कोई आंदोलन करेगी? क्या कांग्रेस संसद में इस एक्ट के सुधार के लिए बात रखेगी?
एससी एसटी एक्ट का दुरुपयोग इफरात में होता है और यह जगजाहिर है। राहुल गांधी बहुत बड़े नेता हैं। लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं। गांधी परिवार के उत्तराधिकारी हैं। वो किसी भी तरह इस केस से बच ही निकलेंगे। यह उनको भी पता है, आपको भी पता है और हमें भी पता है। लेकिन उस आम आदमी का क्या, जिसके खिलाफ दुर्भावना से एससी एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है और वह वर्षों तक भुगतता रहता है?
जवाब चाहिए। कौन देगा?
@RahulGandhi@INCIndia
पहले बफर ज़ोन बनाकर ज़मीन की उपयोगिता सीमित कर दी गई। लोगों ने मजबूरी में बेचना बेहतर समझा। फिर उसी इलाके को डिनोटिफाई कर दिया गया।
यही वजह है कि सवाल उठ रहे हैं—अगर फैसला सही था, तो पूरी प्रक्रिया पारदर्शी क्यों नहीं थी?
निकाय चुनाव टिकट वितरण में राजस्थान कांग्रेस की गुटबाजी तेज। दिल्ली से आईं ऑब्जर्वर पूनम पासवान और पुष्पेंद्र भारद्वाज के सामने शांति धारीवाल व अशोक चांदना के बीच तीखी बहस की खबरें। यह विवाद संगठन बनाम स्थानीय नेतृत्व (दिल्ली बनाम जयपुर हाईकमान) की खींचतान को दर्शाता है।
मनुस्मृति में जहाँ एक ओर महिलाओं को सबसे ऊंचा सम्मान देते हुए कहा गया है कि जहाँ नारी की इज्जत होती है वहाँ भगवान बसते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हें हमेशा पुरुष के संरक्षण में रखने की बात कही गई है जिसे आलोचक आज की आजादी पर पाबंदी मानते हैं। इसी वजह से इस पर विवाद है।
#Manusmriti#
84,084 करोड़ की 'समुद्र मंथन' योजना
यह राष्ट्रीय नीति देश को तेल-गैस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए है। गहरे समुद्र में खोज के जोखिम को कम करने के लिए यह फंड सरकारी (ONGC) और निजी, सभी योग्य कंपनियों के लिए है। किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं।