कविता #
पैरो तलक जमीन *
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उसे अहसास था , कि उसके पैरो *
के निचे से जमीन खिसक चुकी है *
खास बात है वो आदमी इक ही चेक *
को कितनी बार भुनायेगा और कब तक *
मजे लौटेगा ,और अब जनता भी उसकी *
हकीकत जान चुकी है और धीरे धीरे वो *
उसपर विश्वास व
कविता #
पंसद नापसंद *
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देश पंसद नापसंद से नही चलता*
वो चलता है ,न्यायिक , कानून व व्यवस्था से *
जिस देश ने अपने संवैधानिक ब्यवस्था के *
अंतर्गत चुनावी प्रक्रिया के अनुसार जनता ने *
अपने वोट व सपोर्ट से भारी बहुमत से जिताया*
है, उसे तुम्हारी पंसद
बावजूद लगातार उसकी सरकार व लोकप्रिय ता *
कम नही होती है आज वो राजनीति के सर्वोच्च *
शिखर पे और यही बात तुम्हे हजम नही होती *
तो तुम देश मे अराजकता को प्रोत्साहन व लाने *
की सोचते हो और नाकामयाब होकर फिर से *
कोई स्वांग रचा कर नये नये राजनीतिक खेल
सुशिज्जत रहती है , इस लिए देश के पी एम को *
को अपमानित करने के चक्कर मे देश के सम्मान
को खतरा व नीचा दिखाने की कोशिश न करे *
व देश को अराजकता की आग मे मत झोके *
क्योकि जब तक देश है, तब तक हम है और *
जब देश नही होगातो हम कहा होगे , हम कहा*
होगे
कविता #
पी एम पद *
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पी एम पद पर बैठा इन्सान कोई *
देश नही होता है ,, कि उसको नीचा *
दिखाने का प्रयास करो *
इ स देश का गरिमा व सम्मान के लिए *
अगणित लोगो ने इस देश को अपने खून *
से सीमांत है और अपने सपनो व परिवार को *
त्याग कर इस देश के लिए अपना
सर्वस्व कुर्बान किया है , हिन्दुस्तान एक जाग्रति *
देश है इसे बेजान मत बन ओ , अपनी निजी *
स्वार्थ व राजनीति चमकाने के लिए *
पी. एम पद बैठा शख्स वो जनता द्वारा बहुमत *
के आधार पर और उसके अंदर सैकड़ो एम पियो*
का बल व जनता द्वारा प्राप्त सुरक्षा कवच से *
उसमे मिठास, कंक्रीट के जंगल हृदय हीन *
होते है ,इसलिए न तो खूबसूरत पशु पंक्षी *
न तो जंगली जानवरो का साथ मिलता है *
फिर भी लोग उगा बैठे है, शहर मे कंक्रीट के *
जंगल, कंक्रीट के जंगल.
कविता #
कंक्रीट के जंगल *
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शहर मे लोगो ने उगा *
रक्खे थे , कंक्रीट के जंगल *
वास्तविक जंगल की जगह *
पर कंक्रीट के जंगल , निर्जीव व *
बेजान थे, उसमे जीवन की कोई *
चिन्ह नही थे उस जंगल मे न तो *
कोई जीवन नजर आते थे ,कोई बहुमूल्य *
फल ही, न कोई