मिलिए उस मोहम्मद इरफ़ान से जो अपने जंतर मंतर के उस video से viral हो रहा है, जिसमे वह संविधान की प्रस्तावना को जिस लय में सुना रहा है, वो आसपास वालों को बांध लेती है l
एक टूटे हुए से घर में लोकतांत्रिक मूल्यों को हृदय से लगाकर रखने वाला इरफ़ान संघर्ष कर रहा है l इरफ़ान को बस उसकी प्रतिभा के अनुरूप सही अवसर मिलने की देर है , उसके बाद वह अपना रास्ता बना लेगा l
कर्नाटक के 64 वर्षीय मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार भी राहुल गांधी जी के साथ लोक कल्याण मार्ग पहुंचे थे...।
डीके शिवकुमार कर्नाटक में 2028 और 2029 में कांग्रेस की सरकार के साथ 23 लोकसभा सीट का टारगेट है...।
कर्नाटक में 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 28 में केवल 9 सीटों पर जीत हासिल हुई थी...।
डीके शिवकुमार मौजूदा समय में राहुल गांधी जी के साथ सबसे मजबूत मुख्यमंत्री में से एक है....।
डीके शिवकुमार कांग्रेस शासित राज्यों के सबसे बड़े राज्य के मुख्यमंत्री हैं, उनकी जिम्मेदारी ज्यादा बड़ी 2029 के चुनाव को देखते हुए....।
डीके शिवकुमार जब राहुल गांधी जी लोक कल्याण मार्ग के प्रधानमंत्री आवास पर धरने पर बैठे तब डीके शिवकुमार सबसे पहले पहुंचे थे....।
आज के अखबार : बताते हैं कि सरकार ने बेहद मजबूरी में इस्तीफा लिया है, राहुल गांधी भी पहले पन्ने पर हैं। सरकार मान रही थी कि सोनम का अनशन खत्म होने से गुस्सा शांत हो जाएगा लेकिन तेज हो गया, राज्यों में फैल गया। सरकार को दो बिलों की चिन्ता थी, समर्थक असहज थे।
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सोशल मीडिया पर काफी लोग नेहा बोरा के समर्थन में लिख रहे हैं.
सभी लोगों की एक ही शिकायत है, नेहा बोरा ने 23 दिन अनशन किया और एक दिन अनशन करने वाला अभिजीत दीपके आंदोलन का सारा श्रेय ले गया.
अभिजीत दीपके जिस दिन अमेरिका से आया, उस दिन नेहा बोरा ने जंतर मंतर पर अहम किरदार निभाया था. नेहा बोरा ने सारा मैनेजमेंट संभाला था. अभिजीत तो शाम को चक्कर खा कर गिर गया.
आंदोलन खत्म होने के बाद अब सारा श्रेय अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका लेकर उड़ गए. नेहा बोरा को एक योजना के तहत CJP ने साइड लाइन किया है.
यूथ और जेन जी चलते ये ही कविवर हिट हुए थे... अब तक खामोश रहे कवि अब कॉकरोच के कत्ल के फार्मूले बता रहे हैं... इस बार लगता है राज्यसभा टिकट कन्फर्म है..
ये शरद पवार होने की त्रासदी है कि भारतीय राजनीति में कभी किसी पार्टी या नेता ने शरद पवार पर भरोसा नहीं गया..
शरद पवार के अंदर वो तमाम संभावनाएं थी जिनके चलते वो इस देश में बहुत बड़े नेता बन सकते थे लेकिन हमेशा जोड़ तोड़ की राजनीति के चलते या बड़ी पिक्चर न देख पाने की वजह से आज वो वहां पहुंच गए हैं जहां उनकी खुद की पार्टी के नेता उनके साथ खड़े होने में हिचक रहे हैं।
वो आज भी इस बात को कहते हैं कि बीजेपी के साथ कभी नहीं जाएंगे उनसे उनका कोई लेना देना नहीं है.. जीवन के आखिरी पड़ाव में वो नहीं चाहते कि उनका नाम किसी सांप्रदायिक पार्टी से जुड़े।
ऐसे जवाब की उम्मीद नहीं थी।
Anchor shocked रह गई। 🤭🤭
प्रधानमंत्री का वीडियो देखकर लगा जैसे कोई डरा, घबराया, पस्त आदमी बोल रहा हो... जिसके पास अब नैतिक साहस नहीं रह गया।"
- विभूति नारायण, पूर्व IPS