मैं लिखना नहीं चाहता हूँ लेकिन लिखना पड़ता हैं क्योंकि सिर्फ़ मैं नहीं बल्कि हर सच्चा पार्टी का समर्थक या कार्यकर्ता पार्टी का गिरता ग्राफ़ नहीं देख सकता।
एक आकाश आनंद ही वो नेता है जिन्होंने कार्यकर्ताओं की आवाज़ को सुना और महसूस किया कि सोशल मीडिया पर वास्तव में पार्टी को मज़बूत करनी की ज़रूरत है और उन्होंने पूरा प्रयास भी किया और उनकी रैलियां होती थी तो हर कार्यकर्ता तक रैलियों की वीडियो, फ़ोटोज़ आप तक पहुँच जाते थे।
लेकिन मैं किसी और की बात नहीं कर रहा हूँ मैंने ख़ुद प्रभारियों कुछ दिनों पहले हुए कार्यक्रम और यात्राओं की वीडियो माँगी ताकि मैं सोशल मीडिया पर पार्टी का प्रचार कर सकूँ लेकिन मुझे उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं मिला और वीडियो मिली और अगर आकाश आनंद जी पर ये मीडिया की ज़िम्मेदारी होती तो आज बसपा के कार्यकर्ताओं छोटे छोटे यूट्यूबरों और प्रभारियों से कार्यकर्मों की ख़बरों और सोशल मीडिया पर साझा करने वीडियो की भीख नहीं माँगनी पड़ती।
आज ये बात फिर कह रहा हूँ और आगे सुधार की नहीं दिखा तो तब भी यही कहूँगा कि पार्टी के अंदर बैठे ऐसे नेता जो ख़ुद नहीं चाहते हैं कि पार्टी सोशल मीडिया पर भी अपनी दमदारी पेश करें।
बहन जी, धूर्त पदाधिकारियों के चंगुल से बाहर निकलें!
आकाश आनंद को फिर से जिम्मेदारी से हटाए जाने की खबर से करोड़ो युवा आहत हैं। बहन जी द्वारा आकाश को बार-बार पार्टी से बाहर करना और सार्वजनिक रूप से 'इमैच्योर' बताकर जलील करना Human Dignity के खिलाफ है।
बहन जी, आपने 40 साल तक अपने शासन, प्रशासन और अनुशासन से समाज में जो सम्मान और पहचान बनाई है, आपके इन फैसलों से आपकी बहुत नकारात्मक छवि बन रही है। इतना तो कोई अपने दुश्मन को भी जलील नहीं करता। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहता हूं कि आपका का यह फैसला BSP और बहुजन हितों के खिलाफ है।
यकीनन आपने बहुजन समाज के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया है। तमाम विरोध के बावजूद BSP को सत्ता के शिखर तक पहुंचाया। इसलिए हमें विश्वास है कि आप उपलब्ध जानकारी और अपने विवेक के आधार पर ही निर्णय लेती हैं। लेकिन अगर आप ही 'कान की कच्ची' हो जाएंगी, तो आसपास बैठे धूर्त लोग सूचनाओं को तोड़-मरोड़कर पेश करके कुछ भी करवा सकते हैं। इन बेईमानों का क्या है? वे तो प्रभारी बनकर टिकट दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये लूटकर चले जाएंगे, लेकिन नुकसान किसका होगा? पार्टी का, आपका और पूरे बहुजन समाज का।
बसपा समर्थकों के मन में यह सवाल स्वाभाविक है कि जिस युवा चेहरे ने वर्षों से निष्क्रिय पड़ी BSP में नई ऊर्जा पैदा की, उसी आकाश आनंद को बार-बार जिम्मेदारी से दूर क्यों किया जा रहा है? पिछले कुछ वर्षों में BSP को राजनीतिक नैरेटिव से बाहर समझा जाने लगा था, लेकिन आकाश आनंद के सक्रिय होने के बाद युवाओं में फिर से उम्मीद जगी।
उन्होंने युवाओं से संवाद किया, बेबाकी से अपनी बात रखी और यह एहसास कराया कि बहुजन आंदोलन सिर्फ अतीत की विरासत नहीं, बल्कि भविष्य की लड़ाई भी है। इसलिए आकाश आनंद को सिर्फ एक पदाधिकारी या बहन जी के रिश्तेदार के रूप में नहीं, बल्कि उस युवा पीढ़ी के प्रतिनिधि के रूप में देखिए, जो बहुजन आंदोलन को नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाना चाहता है।
आकाश आनंद कोई परिपूर्ण व्यक्ति नहीं हैं। उनसे भी गलतियां हो सकती हैं। युवा नेतृत्व से गलतियां होंगी तो उन्हें समझाया जा सकता है, सुधारा जा सकता है। लेकिन हर गलती का जवाब उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित करके बाहर करना ही क्यों?
कांशीराम साहब ने भी आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं को तैयार किया था। बहन जी स्वयं उसी प्रक्रिया की सबसे बड़ी मिसाल हैं। साहब कांशीराम ने उन्हें तराशा, गलतियों पर समझाया और उन्हें बहुजनों के इतिहास की सबसे स्वाभिमानी नेताओं में स्थापित किया। अगर उस समय उन्हें भी सिर्फ उनकी गलतियों के आधार पर रोक दिया जाता, तो शायद बहुजन समाज की राजनीति आज जिस मुकाम पर है, वहां नहीं पहुंचती।
धूर्त पदाधिकारी आते-जाते रहेंगे, लेकिन आंदोलन और उसका विजन किसी व्यक्ति या पदाधिकारी से बड़ा होता है।
आज जरूरत है कि बहन जी धूर्त पदाधिकारियों के प्रभाव से बाहर निकलें। उनके और आकाश आनंद के बीच कोई दीवार न हो। बहन जी तक कार्यकर्ताओं और जनता की वास्तविक आवाज सीधे पहुंचे। क्योंकि BSP का भविष्य सिर्फ वर्तमान पदाधिकारियों का सवाल नहीं है। यह उस पूरी बहुजन पीढ़ी का सवाल है, जो इस आंदोलन को आगे लेकर जाएगी।
मुझे सबसे ज्यादा चिंता आकाश आनंद को लेकर होती है। उन्होंने बहुजन आंदोलन को नई ऊर्जा देने का सपना तो देखा, लेकिन शुरू से ही अपने हर कदम पर धूर्त पदाधिकारियों की साजिशों से घिरे हुए हैं। उन्हें हर पग पर अपमान ही झेलना पड़ा है। न जाने उसके भीतर कितनी बातें होंगी, कितनी पीड़ा होगी लेकिन वह अपनी पीड़ा कहें किससे? कितनी बार वह खुद को समझाता होगा कि सब ठीक हो जाएगा। जिस उम्र में उसे संगठन को मजबूत करने, युवाओं को जोड़ने और अपनी राजनीतिक पहचान बनाने का अवसर मिलना चाहिए, उस उम्र में उसे बार-बार ससुर और ससुराल के बहाने अपमान का घूंट पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। आखिर वह भी इंसान है, उसके भी सपने हैं, भावनाएं हैं और आत्मसम्मान है।
अतः माननीया बहन जी, आकाश आनंद को तोड़िए मत, उसे तराशिए। उसे अकेला मत कीजिए, उसे सहारा और मार्गदर्शन दीजिए। क्योंकि किसी युवा को बार-बार जलील करके तोड़ देना बहुत आसान है, लेकिन उसके भीतर की उम्मीद बचाकर उसे एक सक्षम नेतृत्व में ढालने में पूरी पीढ़ी लग जाती है।
आपका शुभचिंतक: सूरज कुमार बौद्ध
@Mayawati@AnandAkash_BSP
माननीय बहन कुमारी @Mayawati जी,
आपकी पाठशाला में कैडर प्राप्त युवा दिलों की धड़कन बन चुके @AnandAkash_BSP को पदमुक्त किए जाने का आपका फैसला भले ही कोई भी कारण रखता हो, लेकिन इससे बसपा समर्पित युवा वोटर और सपोर्टरों में भारी निराशा और हताशा है. सोशल मीडिया पर एक्टिव पढ़े लिखे युवा समर्थक, जो बीएसपी के लिए आईटी सेल का काम करते हैं, वे भी अब अपनी कलम को विराम लगाने को विवश हो रहे हैं. जमीन स्तर के तमाम कार्यकर्ता अपने पद को छोड़ रहे हैं. मैं समझता हूँ कि ऐसी स्थिति में आपको अपने फैसले पर ठंडे दिमाग से अति शीघ्र पुनर्विचार करना चाहिए, ताकि जग हँसाई पर पूर्ण विराम लग सके. इसलिए सिर्फ यूपी ही नहीं, बल्कि देश भर के लाखों लाख युवा बसपा समर्थक आपके आगे झोली फैलाकर @AnandAkash_BSP की पुर्नबहाली हेतु आपकी ओर आशा भरी नजरों से देख रहे हैं.
अतः आपसे आशा की जाती है कि आप अपने वोटर, सपोर्टर और शुभचिंतकों की भावनाओं का जरूर ख्याल रखेंगी. क्यों कि आप दया की सागर हैं.
आपका अनुज
🙏🙏🙏
1. देश में एक नहीं बल्कि अनेकों ऐसे उदाहरण हैं जिससे लोगों को यह लग रहा है कि सीजेपी का जेन-जी (Gen-Z) अर्थात देश के युवाओं और बेरोज़गारों आदि की ज्वलन्त समस्याओं को लेकर इनका यह आन्दोलन विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा हाईजैक कर लेने से युवाओं व छात्रों आदि को जंतर मंतर आन्दोलन के दौरान जो इनको बड़े-बड़े सपने दिखाये गये थे, वे अब स्वतंत्र कम व राजनीतिक ज़्यादा होकर गंभीर शंकाओं में घिर गये हैं।
2. किन्तु ख़ासकर जेन-जी (Gen-Z) व जेन-अल्फा (Gen-Alpha) की ज़रूरी माँगों को लेकर बी.एस.पी. को पूरी सहानुभूति व इसके प्रति चिन्ता भी हमेशा रही है और आगे उनके सहयोग के लिये बी.एस.पी. के सभी स्टेट यूनिटों को निर्देशित किया जाता है कि वे अपने-अपने राज्य व क्षेत्र में सम्बंधित अधिकारियों से मिलकर उनकी समस्याओं के शान्तिपूर्ण तरीक़े से समाधान के लिये ज़रूर तत्पर रहें।
3. लेकिन बी.एस.पी. के अनुशासन के अनुसार पार्टी के लोग धरना, प्रदर्शन व आन्दोलन आदि नहीं करें और अपनी तन, मन, धन की शक्ति एवं ऊर्जा को चुनाव के लिये सुरक्षित रखें, ताकि करोड़ों दलितों व अन्य उपेक्षितों के सच्चे मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के सपनों को साकार करने वाली ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की अपनी सरकार बनाकर जेन-जी (Gen-Z) और जेन-अल्फा (Gen-Alpha) सहित सर्वसमाज की सभी दुख-तकलीफों आदि का स्थायी समाधान निकल सके, जैसाकि बी.एस.पी. की यूपी में चार बार रही सरकारों में करके भी दिखाया गया है।
4. इसके साथ ही, जेन-जी (Gen-Z) के जंतर मंतर आन्दोलन के दौरान पुलिस अगर समय से उचित कार्रवाई करती तो श्री संजय आज़ाद जैसी गंभीर घटना नहीं होती, किन्तु अब इस प्रकरण के अभियुक्तों के खिलाफ सख़्त से सख़्त क़ानूनी कार्रवाई ज़रूर होनी चाहिये वरना फिर बी.एस.पी भी ऐसे मामलों में कोई पीछे नहीं रहेगी।
@Mayawati चुनाव के समय आकाश आनंद जी को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त करना बीएसपी के लिए आत्म घातक साबित होगा और बिना गठबंधन के 2024 वाला हाल होगा बसपा का।
1. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अगले छह महीने में (अर्थात विधानसभा आमचुनाव तक) एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा हालाँकि विलम्ब से उठाया गया सही किन्तु चुनावी क़दम ज़्यादा लगता है, फिर भी वे नियुक्तियाँ पेपरलीक व भ्रष्टाचार आदि के अभिशाप से मुक्त समय से पूरा हो जायें तो यह सही होगा ताकि यह चुनावी छलावा ना साबित हों, जबकि इसके साथ ही एससी, एसटी व ओबीसी समाज के आरक्षित पदों के बैकलाग पर भर्तियों के बारे में भी सरकारी घोषणा की लोगों को उत्सुकता से प्रतीक्षा है।
2. इतना ही नहीं बल्कि यहाँ 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण के नियमों को लेकर इन वर्गों के 6,800 अभ्यार्थी अपनी नियुक्ति के लिये भूखे-प्यासे लगातार आन्दोलनरत हैं, उनके बारे में भी सरकार को पूरी सहानुभूतिपूर्वक ज़रूर सोचना चाहिये, क्योंकि उन्हें वास्तविक राहत सरकार ही दे सकती है।
3. इसके साथ ही, बी.एस.पी. यूपी सहित पूरे देश भर में स्कूली शिक्षा की बदहाल व्यवस्था को समुचित तौर पर बेहतर बनाने की माँग लगातार करती रहती है, किन्तु संभवतः ’जेन-जी’ व ’जेन-अल्फा’ के दबाव में जो थोड़ी अनचाही हलचल सरकारी स्तर पर देखने को मिल रही है वह मामूली ही सही परन्तु स्कूली शिक्षा में सुधार करने की सही नीयत से हो तो यह उचित होगा और इस क्रम में यहाँ लगभग 30 हज़ार जो सरकारी स्कूल बंद कर दिये गये हैं उन्हें दोबारा अच्छे तरीके से सक्रिय करने की व्यवस्था सरकार अविलम्ब करे तो यह भी जनहित में होगा।
4. इसके अलावा, बुजुर्ग महिलाओं को बसों में निशुल्क यात्रा आदि की व्यवस्था से कहीं अधिक महिलाओं को हर क्षेत्र में शोषण, अत्याचार, उत्पीड़न आदि से बचाने के साथ ही महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान व आत्मनिर्भरता के बारे में भी सरकारों को सही नीयत व नीति से कार्य करने की ज़रूरत है।
बहनजी पिछले 10 दिन से आरक्षण के खिलाफ षड़यंत्र की अलसी जड़ मोहन भागवत पर हमला कर रही हैं।
लेकिन अखिलेश यादव ने कल आरक्षण पर एक ट्वीट क्या किया तो मीडिया या सोशल मीडिया सब जगह उसी की चर्चा है।
सतीश चंद्र मिश्रा बसपा के मीडिया एडवाइजर हैं। लेकिन कभी कभी बहनजी का ट्वीट रीट्वीट करते हैं बस, और ना ही कोई ट्रेंड चलवाते हैं।
सतीश मिश्रा का काम है कि बसपा के मुद्दों को मीडिया तक पहुंचाएं लेकिन मीडिया में आरक्षण पर बहन जी के सबसे बड़े स्टैंड की कोई चर्चा नहीं है। @satishmisrabsp@Mayawati
1. दिल्ली के जंतर मंतर पर संविधान में एस.सी., एस.टी. व ओ.बी.सी. समाज को दिये गये आरक्षण के विरुद्ध अभी हाल ही में जमा हुये कुछ लोगों द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण को लागू करने की उठाई गई यह नई माँग कतई भी उचित व देशहित में नहीं है। उन्हें आरक्षण के सम्बंध में ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिये जिससे समतामूलक समाज, विकसित व सम्मानित देश बनाने के संवैधानिक कार्यों को आघात पहुँचे।
2. वैसे भी देश में सदियों से जातिवाद की अमानवीयता का शिकार रहे एस.सी., एस.टी. व ओबीसी समाज के लोगों हेतु संविधान में की गई आरक्षण की व्यवस्था के बारे में परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का यह कहना था कि ’जातिवाद का परित्याग ही सबसे बड़ी देशभक्ति है’। अतः लोग सही देशभक्ति का परिचय ज्यादा दें तो यही उचित होगा।
3. जहाँ तक आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की बात है, तो केन्द्र व राज्य सरकारों द्वारा भी ग़रीबी उन्मूलन के एक नहीं बल्कि अनेकों कार्यक्रमों पर काफी सरकारी धन हर वर्ष ख़र्च किया जाता है, किन्तु उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार आदि के कारण इसका सही लाभ अगर देश के लोगों को नहीं मिलता है तो यह तो सरकारी व्यवस्था का सीधा-सीधा दोष है।
4. इसके अलावा, आर्थिक आधार पर आरक्षण की नई व्यवस्था भी देश में लागू है, जिसका भी सही लाभ अपरकास्ट समाज के ग़रीब परिवारों को नहीं मिल पा रहा है बल्कि इसमें छलावा अधिक है।
5. वास्तव में ख़ासकर यही वह भ्रष्ट व जातिवादी सरकारी व्यवस्था है जिसने आरक्षण के संवैधानिक रचनात्मक प्रावधान को कभी सही से ज़मीन पर लागू ही नहीं होने दिया है, जिस कारण एससी, एसटी व ओबीसी समाज के लोग, आज़ादी के इतने लम्बे अरसे के बाद आज तक भी, ग़रीबी, जातिवादी द्वेष, शोषण, अत्याचार व जातिवाद के ज़हर का दंश हर दिन हर स्तर पर लगातार झेलते रहते हैं।
6. अतः सभी सरकारें भी आरक्षण विरोधी तत्वों को शरण व संरक्षण बिल्कुल भी ना दें तो यह व्यापक देश व जनहित में होगा। लोगों से भी अपील है कि वे आरक्षण जैसे अहम् एवं संवेदनशील मुद्दे पर सस्ती राजनीति ना करें और ना ही होने दें।
7. हालाँकि उसी ही दिन पार्लियामेन्ट थाना के बाहर एक पीड़ित व्यक्ति के मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री राहुल गाँधी कई घन्टों तक धरने पर बैठे रहे, जिसका पार्टी को कोई ऐतराज़ नहीं है।
ऽ लेकिन उसके बग़ल में जंतर-मंतर पर दलित व शोषितों के जातीय आधार पर दिये जाने वाले आरक्षण को ख़त्म करवाने के लिए धरना-प्रदर्शन भी चल रहा था, वहाँ पर वे व उनका कोई भी कांग्रेसी साथी उन्हें समझाने तक के लिये भी नहीं गये, जिससे इन वर्गों के प्रति इनकी आरक्षण विरोधी मानसिकता अभी भी साफ झलकती है।
जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. देश में ’बहुजन समाज’ व अपरकास्ट समाज के ग़रीब शोषित-पीड़ित व उपेक्षितों द्वारा, उनके संवैधानिक हक़ व न्याय आदि के लिये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बताये रास्तों पर चलने वाली ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की सच्ची व ईमानदार अम्बेडकरवादी पार्टी है, जो दूसरी पार्टियों की तरह बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के सहारे और उनके इशारे पर नहीं चलती है बल्कि अपने लोगों के ही तन, मन और धन के बलबूते पर चलती है, जो स्वाभाविक तौर पर संकीर्ण, जातिवादी, साम्प्रदायिक व पूंजीवादी ताक़तों को यह फुटी कौड़ी नहीं सुहाता है और इसी लिये वे समय-समय पर और ख़ासकर चुनाव के नज़दीक आने पर क़िस्म-क़िस्म के हथकण्डे इस्तेमाल करके बी.एस.पी. पार्टी व मूवमेन्ट को तथा उसके आयरनलेडी नेतृत्व को भी बदनाम करने में लगे रहते हैं।
इसी क्रम में मीडिया के एक वर्ग द्वारा दूसरी पार्टियों की चुनावी जुगाड़ आदि पर से लोगों का ध्यान बाँटने तथा उन पर पर्दा डालने के लिये बी.एस.पी. पार्टी उम्मीदवार के चयन को लेकर सवालिया निशान खड़े करते रहते हैं, जबकि बी.एस.पी. को जो भी आर्थिक सहयोग हासिल होता है वह पार्टी उम्मीदवार की जीत सुनिश्चित करने पर ही क़ानूनी तौर से ज़्यादातर ख़र्च कर दिया जाता है, जो किसी से भी छिपा हुआ नहीं है। फिर भी उसको लेकर षडयंत्र के तहत् गुमराह करने वाली तरह-तरह की ग़लत बातें व अफवाहें आदि फैलाना मीडिया को शोभा नहीं देता है।
इसके साथ ही यहाँ यह भी सर्वविदित है कि केवल बी.एस.पी. यूपी स्टेट यूनिट के अध्यक्ष श्री विश्वनाथ पाल ही नहीं बल्कि पार्टी के अन्य सभी छोटे-बड़े पदाधिकारी व कार्यकर्तागण भी इस समय पार्टी संगठन की मज़बूती तथा पार्टी के जनाधार को सर्वसमाज में बढ़ाने के साथ-साथ आगामी यूपी विधानसभा आमचुनाव हेतु पार्टी उम्मीदवारों की संभावित सूची बनाने तथा उनकी ठोस स्क्रीनिग करने आदि में लगे हुये हैं और पार्टी की उम्मीदवारी को लेकर उनसे मिलने वालों से अन्य बातों के अलावा उनकी सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हैसियत के साथ ही उनके पार्टी के प्रति वफादारी व टिकाऊपन आदि को भाँपने के लिये, कोर्ट में जिरह की तरह, उनसे तरह-तरह के सवाल-जवाब भी करते रहते हैं, जिसकी गहराई में गये बिना ही उसे उसके पूरे फेस वैल्यू पर अन्यथा लेना उचित नहीं है, यह मीडिया से भी अनुरोध है तथा पार्टी के लोगों से भी अपील है कि वे विरेाधी पार्टियों के ऐसे प्रायोजित किसी भी षडयंत्र का शिकार होकर गुमराह ना हों बल्कि अपने मिशन 2027 के लक्ष्य में पूरे जी-जान से लगे रहें, जिस बी.एस.पी ज़िन्दाबाद की आपकी जबरदस्त तैयारी को देखकर ही विरोधियों की नींद काफी उड़ी हुई है। जय भीम जय भारत।
@raviadi7793 क्या बीएसपी के कार्यकर्ताओं या बहन मायावती जी को उत्तर प्रदेश की जन समस्याओं से कोई मतलब नहीं है, उत्तर प्रदेश के पीड़ित बेरोजगार युवा आए दिन धरना प्रदर्शन करते हैं उसके लिए बहन जी तो एक भी शब्द नहीं बोलती हैं ।
@Mayawati@bspindia आदरणीय बहन कुमारी मायावती जी आपसे हाथ जोड़कर निवेदन है, आप बहुजन समाज के दिलों को समझें और उनकी मानसिकता को भी समझे, बहुजन समाज की मांग है कि आप किसी न किसी एक राजनीतिक दल से गठबंधन जरूर करें, वरना बहुजन समाज आपसे बहुत दूर चला जाएगा।
माननीय प्रधानमंत्री जी की हालिया अपील ऐसे समय आई है जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। पिछले तीन महीनों में हमारा विदेशी मुद्रा भंडार लगभग $38 अरब घटकर मात्र $690 अरब रह गया है। रुपया डॉलर के मुक़ाबले ₹95 पार कर चुका है, और व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। ये केवल आँकड़े नहीं हैं, ये करोड़ों परिवारों की रोज़मर्रा की चिंता हैं।
मैं मानता हूँ कि मौजूदा हालात में अर्थव्यवस्था चलाना आसान काम नहीं है, और दुनिया भी एक कठिन दौर से गुज़र रही है।
ऐसे समय में सरकार का ध्यान मांग बढ़ाने पर होना चाहिए, मांग घटाने पर नहीं। दुनिया का आर्थिक इतिहास हमें एक सीधी बात सिखाता है कि जब आर्थिक गति धीमी हो, तब लोगों से कम खर्च करने को कहना समाधान नहीं होता, समाधान यह है कि टैक्स में राहत देकर, छोटे व्यापारियों को सहारा देकर, मध्यम वर्ग पर बोझ कम कर आम परिवारों के हाथ में थोड़ा ज़्यादा पैसा छोड़ा जाए।
मुझे दुख इस बात का है कि हर बार किफ़ायत की ज़िम्मेदारी उसी ईमानदार करदाता पर आ जाती है जिसने कोविड के समय भी सबसे ज़्यादा सहा। उसने उस वक़्त भी पूरे भरोसे से अपनी भूमिका निभाई थी, तब भी उसके लिए राहत सीमित थी, और आज फिर उसी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है और वो भी बिना ये बताए कि सरकार अपनी ओर से उसके लिए क्या करने जा रही है।
केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को रेवडियां बांटने वाली नीतियों पर तुरंत रोक लगानी होगी ताकि सरकारी खजाने पर बोझ कम हो सके। अगर सरकारें fiscal dicipline और productive capital creation पर ध्यान नहीं देंगी, तो थोड़े समय का राजनीतिक लाभ देश को लंबी आर्थिक कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा।
देश को अपील नहीं, एक स्पष्ट रास्ता चाहिए। लोग जानना चाहते हैं विकास कैसे लौटेगा, नौकरियाँ कैसे बढ़ेंगी, और किसानों, छोटे व्यापारियों व मध्यम वर्ग को असली राहत कब मिलेगी।
सिर्फ़ नागरिकों से त्याग माँगना शासन नहीं होता। जवाबदेही, दूरदृष्टि और आर्थिक संतुलन यही असली राष्ट्रहित है।
@Mayawati कांशी राम जी का मिशन बहन जी आपने बेच दिया @Mayawati आपकी गिनती महापुरुषों में की जाती, लेकिन आपने बहुजन समाज को अंधेरे में रखा एक-एक को पार्टी से निष्कासित करके आप क्या साबित करना चाहती हैं।
@raviadi7793 मैं भी बीएसपी का कट्टर समर्थक था लेकिन अब नहीं हूं आप जैसा मैं अंधभक्त नहीं बनना चाहता हूं, लोगों को यहां छोटी-छोटी गलतियों पर बाहर कर दिया जाता है, धर्मवीर अशोक की क्या गलती है जो सबसे बुजुर्ग नेता हैं 27 में क्या होगा पता नहीं।
देश में सामाजिक परिवर्तन के पितामह के रूप में प्रसिद्ध ’बहुजन समाज’ में अति-पिछड़े वर्ग में जन्मे महात्मा ज्योतिबा फुले को आज उनकी जयंती पर मेरे व बी.एस.पी. की ओर से भी शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित।
ख़ासकर शिक्षा के माध्यम से स्त्री/नारी शक्ति के प्रणेता के रूप में महात्मा ज्योतिबा फुले व उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले का नाम इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। महात्मा ज्योतिबा फुले के शब्दों में ’’विद्या बिना मति गयी, मति बिना नीति गयी। नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया। वित्त बिना शुद्र हताश हेये, और गुलाम बनकर रह गये।’’ अर्थात यह सब कुछ शिक्षा के अभाव में हुआ और इसीलिये आगे चलकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने इनसे प्रेरित होकर शिक्षा की तरफ विशेष ध्यान दिया।
साथ ही, उन्नीसवीं सदी के मध्य में दलितों व शोषितों की मुक्ति के लिये महात्मा ज्योतिबा फुले के ज़बरदस्त प्रयासों के कारण अकेले पुणे में ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सामाजिक परिवर्तन की नई अलख जगी और विशेषकर नारी मुक्ति व सशक्तिकरण का ऐतिहासिक कार्य शुरू हुआ, जिस संघर्षों के लिये उनकी जितनी भी सराहना व प्रशंसा की जाये वह कम है।
ऐसे अति-पिछड़े/ओबीसी समाज के महापुरुष की स्मृति व उनके सम्मान में मेरी बी.एस.पी. सरकार द्वारा अनेकों कार्य यहाँ यूपी में किये गये जिनमें अमरोहा को नया ज्योतिबा फुले नगर ज़िला बनाना शामिल है, किन्तु सपा सरकार ने इसे भी अपनी संकीर्ण राजनीति व जातिवादी द्वेष आदि के कारण इसका नाम भी बदल डाला।
उल्लेखनीय है कि बी.एस.पी की सरकार द्वारा कासगंज को कांशीराम नगर ज़िला बनाने के साथ-साथ कानपुर देहात को रमाबाई नगर, संभल को भीमनगर, शामली को प्रबुद्ध नगर व हापुड़ को भी पंचशील नगर के नाम से नया ज़िला बनाया था, जिसे सपा सरकार ने ज़िला तो बनाये रखा लेकिन इन सभी ज़िलों के नामों को बदल डाला, यह है इनके पीडीए का अति-दुखद चाल, चरित्र व चेहरा।
बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी को, आज उनकी जयंती पर मेरे व मेरे नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश भर में उनके अनुयायियों द्वारा शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित, जिन्होंने परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की ‘सोच एवं मूवमेन्ट’ को पूरे देश में ज़िन्दा करके व उनके कारवाँ को आगे बढ़ाकर सत्ता की मंज़िल तक पहुँचाने के मिशन हेतु अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करके लगातार कड़ा संघर्ष किया तथा जाति के आधार पर तोड़े और पछाड़े गये लोगों को ’बहुजन समाज’ की एकता में जोड़ने के उस ऐतिहासिक योगदान की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुये, बी.एस.पी. के ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ मूवमेन्ट को तन, मन, धन से मज़बूत बनाने व पूरी ज़िद के साथ चुनावी सफलता अर्जित करने के संकल्प को दोहराया, जिसके लिए मैं पार्टी प्रमुख के रूप में, सभी लोगों का तहेदिल से आभार, धन्यवाद व शुक्रिया अदा करती हूँ।
साथ ही, यह आह्वान भी है कि ’बहुजन समाज’ के लोग ’बी.एस.पी. मूवमेन्ट से जुड़कर मिशनरी व ईमानदार अम्बेडकरवादी बने’ और अपने वोटों की शक्ति से सत्ता की मास्टर चाबी हासिल करें ताकि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर द्वारा संविधान में देश के बहुजनों के हित, कल्याण, उत्थान तथा उनकी सुरक्षा व आत्म-सम्मान हेतु प्रदत्त अधिकारों को ज़मीन पर लागू करके वे भी, गुलामी और लाचारी के त्रस्त जीवन से मुक्ति पाकर, रोटी-रोज़ी-युक्त अच्छे दिन वाला ख़ुश एवं ख़ुशहाल जीवन व्यतीत कर सकें, जो कि मान्यवर श्री कांशीराम जी का मिशन व उनका जीवन संदेश भी है। धन्यवाद।
@Mayawati बहन जी आप चुप क्यों हैं अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर आज देशभर में हा हा कार मचा हुआ है एलपीजी सिलेंडर इतना महंगा हो गया है फिर भी आप लोग आवाज नहीं उठा रहे हैं क्या कारण है@Mayawati