सच कहें,तो किसी भी जाति ,धर्म पर एक भी बात गलत कभी नही बोली, न ही कोई गलत भावना होती है,पर कुछ नीच लोगों की वजह से जो रात दिन गलत टिप्पणी करते हैं,उसकी प्रतिक्रिया देनी पड़ती है।
जय महादेव🙏
हमारी पहली मांग है-National Commission for General Category (सवर्ण आयोग)
- ऐसा आयोग जो general category की आवाज़ बने और उनकी बात सरकार तक पहुंचाए!
और हमको ऐसा आयोग चाहिए जिसके पास वही संवैधानिक ताकत और अधिकार हों, जो बाकी आयोगों के पास हैं!
उससे कम में हमको कुछ नहीं चाहिए!
जिस बाल्मीकी समाज का पाँव मोदी जी धोते थे, उसका यूपी में कितना उत्थान हुआ है? उपवर्गीकरण समय की माँग है।
बाल्मीकी समाज की ही तरह, मुसहर समाज को भी रावण जैसे जातिवादी नेताओं के भीड़ की ब्लैकमेल वाली धमकी का उत्तर, ऐसे ही सड़कों पर शांतिपूर्ण आंदोलन से देना चाहिए। आपके अधिकार की लड़ाई को मेरा पूर्ण समर्थन है।
अपराध निशु आज़ाद और उसके पिता करते हैं और वीडियो में स्वीकार करते हैं लेकिन स्वतंत्र भारद्वाज चुकी ब्राह्मण है तो वो राहुल , अखिलेश और चंद्रशेखर के निशाने पर हो जाता है ,दिल्ली पुलिस ध्यान दीजिए यदि ये मुक़दमा दोनों तरफ़ से नहीं हुआ तो फिर परिणाम दूसरा होगा और मुक़दमा मार पीट का होना चाहिए ना की पास्को और एससी एसटी , यदि दबाव में ऐसा हुआ तो मैं समझूँगा की मोदी जी की पुलिस फट्टू है और इन काकरोचों से डरती है ।
निशु आजाद के एक-एक ट्वीट पर हर जिले में ईशनिंदा कानून के तहत BNS 299/IPC 295A में केस होना चाहिए। ‘हिन्दू लीगल फंड’ को इसमें मोबिलाइज किया जाए।
इसके बाप पर काउंटर FIR होनी चाहिए। उसको बहुत ‘दो मिनट पुलिस नहीं आती’ करना है न, क्या @DelhiPolice इतनी नकारी है कि कोई भी गुंडा प्रवृत्ति का व्यक्ति खुलेआम वीडियो बना कर धमकी देगा?
जब इनको FIR-FIR ही खेलना है, तो यही सही। फिर देखते हैं कि रावण और राहुल कितने थाने घेर लेता है। नरेन्द्र मोदी ने जो बवासीर बना दिया है, वह अब हिन्दू समाज हर दिन झेल रहा है। दुर्भाग्य यह है कि जो इसका प्रयोग कर रहे हैं वो मोदी के वोटर हैं ही नहीं।
#UGC रोल बेक पर अपना बलिदान एक सवर्ण भाई ने दिल्ली पुलिस में इंस्पेक्टर की नौकरी छोड़कर दे दिया
बोले भाईयो पर लाठिया बरसती मैं नहीं देख सकता
धन्य है🙏 ऐसे शूरवीर भाई को जो सवर्ण समाज के लिए अपनी नोकरी को बलिदान कर दिया
आपके इस बलिदान के संघर्ष का सवर्ण समाज अपने लिए उसका परिणाम जरूर निकालेगा
“हर्ष दुबे कौन है? किस हैसियत से वो जंतर-मंतर गया था, उसे किसने बुलाया था जंतर-मंतर, उसके बुलाने पर कितने लोग गए थे जंतर-मंतर? वो किस हैसियत से जबरन नेतागीरी कर रहा है!”
हर्ष दुबे सिर्फ़ एक छोटा बच्चा है, इसके अलावा कुछ नहीं है, हर्ष दुबे ये निकम्मापन छोड़ दो:- स्वामी आनंद स्वरूप
जंतर-मंतर में आंदोलन बुलाने वाले लोगों ने हर्ष दुबे को नकारा, बोला हमारा उनसे कोई संबंध नहीं। मैंने पहले ही कहा था आंदोलन करने वाले इसका विरोध करेंगे।
आंदोलन में फर्क तो है...
एक आंदोलन में हमारे सनातन का उपमान किया जा रहा था, एक ये सवर्णों का आंदोलन है जिसमें हनुमान चालीसा का पाठ किया जा रहा है...
#Jantarmantar#reservation jantar mantar
अम्बेडकर पर टिप्पणी करने से घर से निकाल कर, निर्वस्त्र करके पीटा!!
घटना बिहार की है!!
ये सोचने पर मजबूर कर देता है कि आखिर हमने कुछ नेताओं को भगवान क्यों बना दिया है??
First death by police brutality during the UGC Roll Back protest.
Devraj Singh was seriously injured during the lathi charge and later succumbed to his injuries.
Not a single political party raised the matter of the death of Devraj Singh. This shows how casually they take the lives of the General Category.
अजीत भारती:
"आपने दलितों के बीच का जातिवाद देखा है?"
अनिल शारदा:
"हाँ देखा है, पर आपने ब्राह्मणों के बीच का जातिवाद देखा है?"
अरे @theanilsharda जी,
लेकिन ब्राह्मण तो जातिवादी हैं ही ना? तभी तो उनको आरक्षण नहीं मिलता!
लेकिन दलितों को मिलता है आरक्षण जातिवाद की वजह से!
तो सवाल ये है कि जो गलती खुद कर रहे हो, उसी गलती का इल्जाम दूसरों पर थोप कर उसका हर्ज़ाना कैसे मांग सकते हो??
Hopefully, बात समझ आ गयी होगी!!
उधर मध्यप्रदेश सरकार पर 4.2 लाख करोड़ का कर्जा चढ़ा हुआ है, और इधर इनका PR ही खत्म नहीं हो रहा!
वैसे मीनाक्षी नटराजन का नाम इसलिए रद्द हुआ क्योंकि उनका फॉर्म incomplete था!
अब मोहन जी भविष्यवक्ता तो हैं नहीं कि उनको पहले ही पता चल गया कि मीनाक्षी जी गलती करेंगी?
फालतू क्रेडिट😂