दुख चाहे कितो भी हुए बीं रि छीया तक नी आनद्ये
इसी हुऐ मां।
जकि आप गिला मे सोवे ओर ओलाद ने सुखे में सुलावे
इसी हुऐ मां।
जकि आप भुखी रेवे ओर ओलाद ने खुवावे
इसी हुऐ मां।
जकि आप दुख पालेवे पर औलाद ने सुखी देखणो चहावे
इसी हुऐ मां।
जकी आपरी औलाद रे वास्ते सारी दुनिया स्यु भीड़ ज्यावे
उंगली ने आंटी करके घी ,
बोतल के बाहर कडावे वाला,,।
ऐश्वर्य गोड़ा री दौड़,
चोर लगाम लगावे ला,,
जेब कतर नायाब तरीको,
मिलकर कर चोर बनावेला,,
लोकतंत्र मूर्ख और शासन ,
भगदड़ ने भड़का वेला,,।,,।
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लोक चुनाव चोरां री चांदी,
मूर्खां ने भरमावेला,,
कपड़ों बल दे सागेड़ो,ज्युं
आल बाहर कडावेला,।
गिदड़ टोली बिच बकरी ज्युं,
उम्मीदवार फंस ज्यावेला,,
स्यार पकड़े ,,नार,, ने ज्युं
ज्ये छोड़े तो खावेला,,।
भाई -भाई रो ब्रोकर बनकर,
मुक्त रो माल उडावेला,,
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@Kapil_Jyani_ अंग्रेज 200 साल तक सत्ता में इसलिए थे क्योंकि तुम जैसे सरकार की दलाली तब भी करते थे. कोई भी परीक्षा सही ढंग से नहीं हो रही है, हर भर्ती में धांधली हो रही है लेकिन कोई आवाज़ मत उठाना
गज़ब हो यार तुम लोग लोग चंद पैसों पर बिकने वाले लोग, ज़मीर बेच चुके हो
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अपने ही बनाये रास्ते पर,
नहीं चल पा रही है, वादा भी किये जा रही है, और खुद ही तोड़े भी जा रही है ऐसी नहीं थी तू कैसी होती जा रही है
तुझे तो पढ़ना था न
आसमान में खुले पंछी की तरह, उड़ना था न
तो तू बस क्यों किताबों के ढेर सजाये जा रही है, बस हाथ पर हाथ रखे जा रही है
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ऐसे तो तुम्हारे एग्जाम वाली ट्रेन, अपने आने वाले टाइम पर आयेगी और चली जायेगी, तुम ऐसे ही खड़ी,
लेट पैसेंजर की तरह बस देखती रह जाना, फिर हाथ मलते रहना,
और खुद को, जीवन भर बस ऐसे ही हौसले देते रहना उठो, अपने अंदर अपने सपनों को पूरा करने का साहस भरो
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बीजी बोली— "अरे बहन! कलयुग नी, ओ तो 'ऑनलाइन' रो सायो है!"
जे मोबाइल नी होतो, तो दुनिया कतरो चैन पाती,
नी रील्स बणती, नी आ जवानी रगत सुखाती।
पण साची बात तो आ है— चाहे कतरो ई व्हावे मोबाइल रो रोग,
बिना 'राम-राम' करया, अठै चैन नी पावै लोग!
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सास बोली— "बहु! आज के रांध्यो है रसोई में?"
बहु बोली— "सासू जी! देख लो 'स्टेटस', फोटो मेल दी है टोकरी में!"
गवाड़ में बैठी लुगाइयां, पंचायत घणी करै,
फलाणै री बहु के लाई, ईं बात माथै मरै।
एक बोली— "मने तो लागे, कलयुग मोटो आयो है,"
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