सदा न संग सहेलियाँ,सदा न राजा देश
सदा न जुग में जीवणा,सदा न काला केश
सदा न फूलै केतकी,सदा न सावन होए
सदा न विपदा रह सके,सदा न सुख भी होए
सदा न मौज बसंत री,सदा न ग्रीष्म भाण
सदा न जोवन थिर रहे,सदा न संपत माण
सदा न काहू की रही, गल प्रीतम की बांह
ढलते ढलते ढल गई, तरवर की सी छाँह
कुर्सी बदलने से नहीं खत्म होते सवाल यहाँ,
व्यवस्था की हर एक कमी को अब सुधारना होगा।
इस्तीफे तो महज़ एक ज़िम्मेदारी का इशारा हैं,
उम्मीदों पर खरे उतरने को अब ठोस कदम उठाना होगा।
मंज़र ये जो आज देखा है, ये कल ही दिखा दिया होता,
वक्त रहते ही सही कदम अगर उठा लिया होता।
न होती इतनी किरकिरी, न बैठती यूँ साख सरकार की,
इस्तीफा अगर ज़रा पहले ही थमा दिया होता!
समय पर जो जाग जाते, तो हवा कुछ और होती,
दबे हुक्मरानों की भी, फिर सदा कुछ और होती।
ज़मीर अगर बिकता न यूँ, कागज़ों की आड़ में,
तमाशा आज न बनता, तो क़ज़ा कुछ और होती।
जंतर मंतर पर मीडिया पहले कवरेज करती तो शायद ये दिन सरकार ओर देश को देखना न पड़ता
शांत हाथों पर लाठियाँ भांजना, सत्ता का अहंकार दिखाता है,
हक़ माँगते नागरिकों पर बल प्रयोग, सरकार की विफलता बताता है।
जंतर-मंतर पर आज जो हुआ, वो लोकतंत्र के माथे पर गहरी हार है,
अपनी ही जनता की आवाज़ दबाने वाली, यह सरकार ही पूरी दोषी और गुनहगार है।
सोनम वांगचुक जी और दिल्ली पुलिस के घटनाक्रम पर चार पंक्तियाँ हाजिर हैं:
नमन है उस तपस्वी को जो हक की आस लाया है,
मगर दिल्ली की सरहद पर पहरा सख्त आया है।
गले मिलने की खातिर जो बढाए हाथ आए थे,
उन्हें कानून के डंडे से रोका, ये कैसा न्याय आया है!
सोनम वांगचुक जी के सम्मान में ये चार पंक्तियाँ:
लद्दाख की बर्फ में जिसने सुलगती आग पाली है,
शून्य के तापमान में भी देश की लाज संभाली है।
मिट्टी और पानी से जिसने तरक्की के नए ख्वाब बुने,
सच्चे मायनों में उस इंसान ने देश की तकदीर सँवारी है।
चीखती रहीं दूरियाँ, पर हुक्मरान सोए रहे,
देश के असली नायक अनशन में खोए रहे।
न शर्म आई मीडिया को, न पिघली सरकार की सत्ता,
इंसाफ की चौखट पर बस वादे ही बोए रहे।
जमीं को बचाने की जिद में वो भूखा सो रहा है, हक की बात कहने पर देश में ये क्या हो रहा है? बंद आँखों से सरकार और मौन मीडिया कब जागेगा,
जंतर-मंतर पर आज फिर लोकतंत्र रो रहा है।
अधिकारों की खातिर जो अनशन पर बैठा है, लद्दाख का वो बेटा सच के पथ पर खड़ा है।
न मीडिया की सुर्खियाँ, न सरकार की सुनवाइयाँ,
पर देश देख रहा है कि हौसला कितना बड़ा है।
लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में आग लगने से जिन्होंने अपनी जान गंवाई है, उनके प्रति हमारी श्रद्धांजलि। जिन्होंने अपनों को खोया है, उन शोक संतप्त परिवारों के प्रति हमारी गहरी संवेदनाएं।
सरकार घायलों के लिए सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा सुनिश्चित करे।
ये एक बेहद दुखद घटना है।
मैं उसका हूँ वो इस एहसास से इनकार करती है
भरी महफ़िल में भी, रुसवा हर बार करती है
यकीं है सारी दुनिया को, खफा है हमसे वो
लेकिन मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करती है !!
नज़र में शोखियाँ लब पर मुहब्बत का तराना है
मेरी उम्मीद की ज़द में अभी सारा ज़माना है
कई जीते हैं दिल के देश पर मालूम है मुझको
सिकन्दर हूँ मुझे इक रोज खाली हाथ जाना है
- डॉ. कुमार विश्वास
अपने लफ्ज़ों से चुकाया है किराया इसका
दिलों के दरमियां यूँ मुफ़्त में नहीं रहती
साल दर साल मैं ही उम्र न देता इसको
तो ज़माने में मोहब्बत जवां नहीं रहती
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने पर श्री @SuvenduWB जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!
आज पश्चिम बंगाल में मंत्री पद की शपथ लेने वाले समस्त माननीय गण को हृदयतल से बधाई
माँ काली की कृपा से आप सभी का कार्यकाल यशस्वी और लोक-कल्याणकारी हो।
वंदे मातरम्!