@yadavakhilesh जनता में अराजकता फैलाना सही प्रतिद्वंदिता नहीं l आप नेता प्रतिपक्ष है तथा वास्तविकता तथ्य परक आरोप प्रत���यारोप जन विषयों पर रखे, क्योंकि यह जन कार्य नहीं। जनता अगर आगे आपको देखो तो जनहित सर्वोपरि हो स्वहित नहीं। @yadavakhilesh
@brajeshpathakup आप लोग उत्तर प्रदेश के किसी जिला अस्पताल की समस्या को लेकर पीड़ित है, यहां तो राजधानी के सरकारी अस्पताल में भी वही हाल है, जहां माननीय जी बैठे है, लोहिया, बलरामपुर, मेडिकल कॉलेज आदि में अधिकतर कार्य बाहर से ही करवाया जा रहा है, मशीन खराब है, दवा खत्म है के नाम पर।
उत्तर प्रदेश के विभिन्न अस्पतालों में तैनात 26 चिकित्साधिकारियों द्वारा लंबे समय से अपने चिकित्सकीय उत्तरदायित्व से विरत रहने एवं चिक���त्सकीय ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का संज्ञान लेते हुए मेरे द्वारा उनको सेवा से बर्खास्त किए जाने के निर्देश अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग अति संवेदनशील विभाग है, मरीजों के विश्वास और उम्मीद का केंद्र हैं, उनके भरोसे और उम्मीद से खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार की छवि धूमिल करने, अपने कर्तव्यों और दायित्वों का पालन न करने ��ाले, किसी चिकित्साधिकारी व कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा उनके प्रति कठोर कार्यवाही की जाएगी।
@BJP4India
@BJP4UP
@ragebait_krungi गरीबी विषमता का शाश्वत प्रमाण है यह सदियों से है और आज भी तार्किक। बस समझाना हमें है कि नजरिया ���्या रखे सामने वाला उसका हितैषी हो सके। आज भी हम SDG 1,2,3 की बात 2030 में पूरा करने की बात कर रहे मगर कैसे?
@rajnathsingh दोनों महानताओं के पीढ़ी अलग हो, मगर भावना एक रही। तो क्या आज के युगीन नेताओं में यह भाव साधक क्यू नहीं? राज���ीतिक षड्यंत्र में जन भाव को पंगु बनाना क्यों? सत्ता सुख में जनता को बलि चढ़ाना क्यों? आपको भी सीखना चाहिए कि देश को धार्मिक रूढ़ता के आधार पर अतिवादी नहीं बनाना चाहिए।
गरीब व ईश्वर का एक अटूट रिश्ता है, विपदा, आपदा यह गरीबी को सांकेतिक करते है। वही अमीरों के लिए यह। चोंचले हैं। इसीलिए सत्ता के शागिर्द अमीरी को ���त्मसात करते हैं, तो उन्हें विकास के लिए धन का दोहन आर्थिक वंचन, शोषण का अधिकारी बना देता है। जनता गरीब है यह सांत्वना का विषय बन जाता है।
@IEhindi@RTIExpress आरक्षण विरोधी सत्ता या सत्ता विरोधी आरक्षण, यह तर्क का विषय हो सकता है, मगर आरक्षण का वास्तविक लाभ, जिसका प्रभावी परिणाम कितना सुसंगत है, इसपे अवश्य विचार करना होगा। क्योंकि लाभ का एकत्रीकरण नीतियों के अपघटन को प्रदर्शित करती है है।
रिज़र्वेशन नहीं तो फिर क्या? क्या मेरिट से नियुक्त होते हैं वाइस चांसलर्स और जज?
सुनें हमारे नए शो 'साम दाम दंड भेद' के दूसरे एपिसोड में आरक्षण के मामले पर @RTIExpress को.
मोदी जाएगा तो राहुल आ जाएगा, योगी जाएगा तो अखिलेश आ जाएगा; इस भावनात्मक ब्लैकमेल में मत फँसाइए। मैं सामान्य वर्ग के अधिकारों के लिए लड़ता रहूँगा। कल कोई बदतर पार्टी आई तो उसे सड़कों पर निपट लेंगे।
दूसरी तरफ़ घनघोर अयोग्यता को कोचिंग से लेकर मेरिट, PG, नौकरी और प्रमोशन तक लगातार छूट, ये अनंत काल तक नहीं चल सकता।
This has to stop!
@NijiSachiv यह इसी अस्पताल की घटना नहीं ऐसे कई अस्पताल है जहां के स्टाफ से लेकर क्लिनिकल सर्विस तक स�� भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ा है, सीमित स्टाफ व एक्सपायरी दवाएं लोगों को मौत के चपेट में ले रहीं है।@rshuklabjp
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने फिर ज़हर उगला है, उन्होंने कहा है कि जाति और वर्ण पुरानी हो चुकी व्यवस्थाएँ हैं और इन्हें खत्म कर देना चाहिए, ताकि हिन्दू धर्म एक “नई व्यवस्था” अपना सके।
तो इन धर्मद्रोहियों से तो बात करना अब बेकार है, लेकिन में हिन्दुओं से कुछ कहना चाहूंगा।
अब बात सिर्फ मोहन भागवत के एक बयान की नहीं है। बात उस सोच की है जो धीरे-धीरे हिन्दू समाज को उसकी अपनी जड़ों, पहचान और परम्पराओं से काटना चाहती है।
आज कोई आपकी जाति को “पुरानी व्यवस्था” बता रहा है, कल को आपके बच्चों को अपनी परम्पराओं पर शर्म करना सिखाएगा और उसके बाद आपको समझाया जाएगा कि अपनी ही सांस्कृतिक पहचान से दूरी बनाना ही “प्रगतिशील हिन्दुत्व” है।
इनसे सवाल पूछिए कि हिन्दू धर्म का ठेका RSS को किसने दिया?
किस शास्त्र में लिखा है कि संघ प्रमु��� जो कह दे, वही सनातन का अंतिम सत्य हो जाएगा?
हिन्दू धर्म हजारों वर्षों की परम्परा, दर्शन, साधना और असंख्य आचार-विचार की धारा है। किसी संगठन का संविधान या उसका पदाधिकारी इसका मालिक नहीं हो सकता।
और हिन्दुओं, अपने बच्चों को ऐसी विचारधारा के हवाले मत कीजिए जो उन्हें अपनी ही सभ्यता से काटने लगे। उन्हें इतिहास पढ़ाइए, शास्त्र पढ़ाइए, तर्क करना सिखाइए और हर ऐसे स्वयंभू धर्म-ठेकेदार से सवाल करना ��िखाइए।
अपने घरों में ऐसी मानसिक गुलामी को जगह मत दीजिए, इनको अपनी गली-मोहल्लो में भी मत घुसने दीजिए।
जो आपकी जड़ों को ही समस्या बताने लगे, उसे अपना मार्गदर्शक मानने की कोई मजबूरी नहीं है।
हिन्दू समाज को मिटाने के लिए हमेशा तलवार लेकर कोई बाहर से नहीं आता। कभी-कभी पहचान मिटाने की शुरुआत भीतर से भी होती है, जब लोग अपनी ही परम्पराओं को बोझ समझने लगते हैं।
इसलिए सावधान रहिए।
हिन्दू धर्म किसी ���ंगठन की जागीर नहीं है।
हिन्दू समाज किसी स्वयंभू नेता की प्रयोगशाला नहीं है।
और हमारी आने वाली पीढ़ियाँ ऐसे किसी के वैचारिक प्रयोग की कीमत नहीं चुकाएँगी।