Message from Sonam :
20th JULY
आज़ादी का दूसरा आन्दोलन
भय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारत
Freedom from injustice (Like paper leaks)
Freedom from Fear (my illegal detention)
India’s 2nd FREEDOM MOVEMENT
March to the Parliament
Please make it a big success
Sent through Gitanjali
from my illegal detention at Safdarjung
आपने सही लिखा है! इसके अलावा एक तकनीकी पहलू भी जोड़ना चाहूंगा. जनगणना परिपत्र में जहां मकानों की गिनती का स्पेस है, उसमें एससी-एसटी का अलग काॅलम रखा गया है. इस बार जब जातिवार जनगणना हो रही है तो ओबीसी के लिए काॅलम क्यों नहीं? इससे कम से कम ओबीसी आबादी के घरों का डेटा तो मिलता!
राजस्थान के गूंगे बहरे सत्ताधारीयो को क्या इस मॉ का रुदन सुनाई दे रहा है।
गाड़ियां लोहार परिवार के सोते हुए बच्चों पर ट्रक चढ़ गया जिसके कारण 3 बच्चों की मौ*त 4 बच्चे घायल बताए जा रहे
#झुंझुनूं
मोदी जी ने कहा था - LPG Gas Crisis को COVID की तरह हैंडल करेंगे।
और सच में वही किया।
बिल्कुल COVID के जैसे ही - नीति शून्य, घोषणा बड़ी, और बोझ गरीबों पर।
₹500-800 की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मज़दूरों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है। रात को घर लौटते मज़दूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं। नतीजा - शहर छोड़ो, गाँव भागो।
जो मज़दूर textile mills और factories की रीढ़ हैं - आज वही टूट रहे हैं।
Textile sector पहले से ICU में है। Manufacturing दम तोड़ रही है। और यह संकट आया कहाँ से? कूटनीति की मेज़ पर हुई उस चूक से जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं करती।
जब अहंकार नीति बन जाए - अर्थव्यवस्था चरमराती है, मज़दूर पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है।
सवाल एक ही है - हर संकट में सबसे पहले गरीब क्यों मरता है? चुप मत रहो। यह सिर्फ़ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है।
आज की जनता को रेस्टोरेंट में रोज़ पनीर चाहिए , रोज चिकन चाहिए , दाम भी कम चाहिए और quantity भी फुल चाहिए।
प्रकृति कोई factory line तो है नहीं जो लालच के हिसाब से production बढ़ा दे।
तो फिर market ने अपना जुगाड़ निकाल लिया ...
पनीर नकली बना दो,
मुर्गों को injections ठोक दो ,
धीरे-धीरे chemical experiment खिलाया जा रहा है।
जनता taste खा रही है,
व्यापारी profit कमा रहे हैं,
और FSSAI के अधिकारी FIR -FIR खेल रहे है।
देश के बड़े बड़े अखबार FSSAI और स्वीटी बेहरा के कॉन्फिडेंशियल डॉक्यूमेंट वाले नैरेटिव को हवा क्यों दे रहे हैं?
वो बिना हमारा वर्जन जाने केवल उनके वर्जन को कैसे प्रोपेगेट कर सकते हैं? ये कौन सी साजिश रची जा रही है?
Kanhaiya : When PM has to attend Parliament session, he is in foreign
Journalist : Doesn't Rahul Gandhi go abroad?
Kanhaiya : Is he the Prime Minister? 🔥😂
Watch and enjoy. This is cinema 🍿
भाई शावेद की रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हुई दुखद मृत्यु की खबर अत्यंत पीड़ादायक और चिंताजनक है।
शावेद करीब नौ माह पहले टूरिस्ट वीजा पर स्टील फर्नीचर का काम करने के लिए रूस गया था लेकिन मात्र दो माह बाद ही उसे एक लाख रुपये का लालच देकर जबरन रूसी सेना में शामिल कर लिया गया। बिना किसी उचित प्रशिक्षण के उसे सीधे युद्ध के मैदान में भेज दिया गया, जहां 12 सितंबर को उसकी मृत्यु हो गई। साढ़े छह माह बाद कल उसका शव जब घर पहुंचा।
शावेद ने परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति को संभालने और बेहतर भविष्य के लिए वतन छोड़ा था। वह अपने तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा था और पूरे परिवार की जिम्मेदारी उसके कंधों पर थी।ऐसे में शावेद का यूं असमय चले जाना सिर्फ एक परिवार की अपूरणीय क्षति नहीं है, बल्कि व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करती है।
हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करते हैं। प्रकृति से प्रार्थना है कि शोकाकुल परिवार को यह असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करे।
हम @UPGovt से मांग करते हैं:- शावेद के परिवार को कम से कम 50 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए
@CMOfficeUP@myogiadityanath
अब मोटरसाइकिल रिक्शा चलाने वाले गरीब लोगों को भी नहीं छोड़ा गया। 30 रु. का टोल टैक्स वसूला जाएगा। मतलब;
❌ गरीब के पसीने पर टैक्स
✔️ मंत्रियों की जिंदगी में ऐश
क्या यही विकास है?
📍 हिमाचल प्रदेश
राम नाम की लूट है,
लूट सके तो लूट,
सभी विभागों में भ्रष्टाचार में आगे निकलने की होड़ है,
🚨 BIG BREAKING | लखनऊ में बड़ा खुलासा
राजधानी लखनऊ में टोल प्लाजा से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महज एक महीने में करीब 1600 ओवरलोड ट्रक टोल से गुजरे, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से लगभग 900 ट्रकों के नंबर पूरी तरह फर्जी निकले।
जांच में सामने आया कि इन नंबरों का न कोई चेसिस रिकॉर्ड है और न ही परिवहन विभाग के पोर्टल पर कोई डेटा मौजूद है। यानी ये ट्रक कागज़ों में कहीं दर्ज ही नहीं हैं।
सूत्रों के मुताबिक, टोलकर्मी खुद मनमाने नंबर डालकर रसीद काट रहे थे, जिससे अवैध खनन और ओवरलोडिंग का पूरा खेल बिना रोक-टोक चलता रहा। इस पूरे मामले में टोल कर्मचारियों की सीधी मिलीभगत के संकेत मिल रहे हैं।
सरोजनीनगर इलाके में एक संदिग्ध ट्रक पकड़े जाने के बाद FIR दर्ज की गई है, जिसके बाद यह पूरा नेटवर्क उजागर हुआ।
अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या खनन माफिया, टोल प्लाजा और परिवहन विभाग के कुछ अधिकारी मिलकर इस बड़े घोटाले को चला रहे थे? अगर ऐसा है तो यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि राजस्व और कानून दोनों पर सीधा हमला है।
जांच आगे बढ़ रही है, लेकिन इस खुलासे ने साफ कर दिया है कि अवैध खनन और परिवहन का यह खेल लंबे समय से संगठित तरीके से चल रहा,
~100 करोड़ का पुल 200 करोड़ में बनता है,
~1000 करोड़ की रोड 2000 करोड़ में बनती है,
~1 लाख करोड़ की बुलेट ट्रेन 2 लाख करोड़ में बनती है,
"तो फिर 35 करोड़ का गेहूं 150 करोड़ में सडाने में क्या हर्ज है"
सब अफसरों की माया है।
जैसे बहुत से राज्यों में 2% होने के बाद भी EWS को 10% मिल रहा है वैसे ही हर राज्य में OBC को 27% मिलना चाहिए।
मोदीजी OBC को चुतिया समझना बंद कीजिये। ओडीसा में OBC की जनसंख्या 45% से ज्यादा है, हमें हमारा हक दीजिये।
सरकारी अस्पताल की मुफ्त दवाइयाँ भी अब “ओपन मार्केट प्रोडक्ट” बन गईं।
दिल्ली पुलिस ने 70 लाख की दवाइयाँ पकड़ीं एंटीबायोटिक, क्रिटिकल केयर इंजेक्शन, जरूरी मेडिसिन।
DDU हॉस्पिटल का फार्मासिस्ट , संविदाकर्मी और उनके साथी रिकॉर्ड में हेराफेरी करके वही दवाइयाँ बेच रहे थे जो गरीब मरीजों को मुफ्त मिलनी थीं।
मतलब जनता टैक्स दे, सरकार दवा खरीदे, अस्पताल में स्टॉक आए, और फिर सिस्टम के लोग ही उसे बाजार में बेच दें।
फिर पूछते हैं लोग सरकारी अस्पतालों पर भरोसा क्यों नहीं करते।
थाईलैंड में पनीर नकली , घी नकली , ENO नकली , ORS नकली , पेट्रोल भी नकली , टूथ पेस्ट नकली ,
मसाले नकली , दूध नकली , शहद नकली , दवाइयां नकली , तेल नकली, चाय पत्ती नकली , बेसन नकली , दालें नकली , कोल्ड ड्रिंक नकली बिकती है।
खैर , हमारे देश में FSSAI नामक ईमानदार संस्था है
डरने की जरूरत नहीं है।
Good night guys
अगर चुनाव कराने वाला (चुनाव आयोग) उन लोगों पर निर्भर हो.. जो चुनाव लड़ते हैं, तो चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं की जा सकती- जस्टिस बी नागरत्ना, सुप्रीम कोर्ट की जज।
जस्टिस नागरत्ना की बात कड़वी है लेकिन सच है।