कल शाम को आम लेने निकला।
दुकान पर पहुँचा तो भैया साहब
बड़े जोर-शोर से बोले,
“सफेदा 80 रुपये किलो,
लंगड़ा 100 रुपये किलो!”
मैंने बोला,
“अरे भैया, ये तो लंगड़ा है, टांग टूटी
हुई है… इसकी कीमत कम होनी
चाहिए ना!
80 रुपये लगा दो, पाँच किलो ले लूँगा।”भैया हँसे और बोले,
“भैया जी, आम में लेग पीस मत ढूँढो… 90 रुपये किलो लगा दूँगा,
पाँच किलो लोगे तो?”
मैं सीधा पक्का बार्गेनिंग मोड में आ गया,
“90? नहीं भैया, 80 से एक भी ज्यादा नहीं दूँगा। जल्दी तौलो!
”भैया ने काउंटर ऑफर मारा,
“चलो 10 किलो ले लो,
80 रुपये किलो लगा दूंगा”
मैंने तुरंत अगली बोली लगा दी
“फिर 15 किलो का 70 रुपये किलो
लगा दो।”भैया कुछ देर सोचे,
फिर बोले,“ठीक है… ले लो!”
मैंने आखिरी वार किया,
“अरे भैया, 20 किलो दे दो, 60 रुपये किलो लगा लो!”
भैया ने हार मान ली और जोर से हँसते
हुए बोला,
“भैया आप ही आम बेच लो,
मैं घर जा रहा हूँ!
अब आपको 70 रुपये किलो में 20 किलो लेने ही पड़ेंगे…
हमारी रोजी-रोटी की कसम!
”मैंने मुस्कुराते हुए 20 किलो आम
तुलवा लिए और 1400 रुपये थमा दिए।
घर आते वक्त सोच रहा था इतने आम
ले तो लिए पर खायेगा कौन ?
इतनी गर्मी है आम तो पहले से पके हुए
हैं और पक कर सड़ने लगेंगे तुरंत ही।
इतने में गली में सुंदर वाली
पड़ोसन जी मिल गईं।
“अरे! इतने सारे आम कहाँ से उठा लाए?” कुंदन बाबू
मैंने सीधा झूठ बोला,
“आजादपुर मंडी से गुजर रहा था,
वहाँ 100 रुपये किलो में मिल गए।
यहाँ तो 140 चल रहे हैं ना,
बढ़िया आम था तो ले लिया।”
उन्होंने चमकती आँखों से कहा,
“हमें पता होता तो हम भी मँगवा लेते!”मैंने तुरंत ऑफर मार दिया,
“अरे कोई बात नहीं, इसमें से ले लो। पाँच-पाँच किलो की चार पैकेट हैं।
जितना चाहिए ले लो।”
“5 किलो दे दो,” वो फट से बोलीं।
मैंने प्यार से मुस्कुराकर दे दिए।
“आती हूँ, 500 रुपये लेकर…”
मैने कहा आराम से आना आज तो
संडे है घर पर ही हूं
“कोई जल्दी नहीं, घर पर कभी भी दे देना,” मैंने कहा।
अंदर आकर 15 किलो रखे ही थे कि
थोड़ी देर बाद वो 500 रुपये लेकर आईं… साथ में दो और पड़ोसन ले आई !
मेरी अंतरात्मा मुस्कुरा रही थी।
दोनों पड़ोसन भी गिड़गिड़ाते हुए
बोलीं, “भैया हमें भी 5-5 किलो
दे दो ना…”
मैंने बड़े राजा वाले अंदाज में बोला
अब इतनी सुंदर महिलाओं को
मना कैसे करूं भला?सबको दे दिया।
अंत में? हाथ में 1500 रुपये +
5 किलो आम बचे!
अब घर में भी आम है, पॉकेट में मुनाफा है, और पड़ोस में खूबसूरत मुस्कानें भी ।
मैने कुछ गलत तो नहीं किया ?
धन्य है ऐसी माँ जो अपने छोटे बच्चे को E रिक्शा वाले के भरोसे छोड़ कर खुद नशे मे धुत है, कहते है माँ से बड़ा कोई योद्धा नही होता लेकिन ये माँ किस तरह की योद्धा है भगवान् ही जाने..!!
Good afternoon
आजकल 25 से 55 साल के लोग
तो सिंगल मिल जाते हैं,
लेकिन 13 से 20 साल के लड़के-लड़कियाँ... वो बिल्कुल नहीं !
दिल्ली के एक पॉश कॉन्वेंट स्कूल में,
14 साल की गुनगुन और समीर।
दोनों नादान थे, जिज्ञासु थे, और
मर्यादा की रेखा लांघ गए।
किसी ने उनकी उस हरकत को
कैमरे में कैद कर लिया।
फिर शुरू हुआ ब्लैकमेल।
पहले पैसे की माँग — 5 लाख रुपये।
गुनगुन अमीर घर की थी।
पैसे का इंतजाम कर दिया।
लेकिन मुसीबत यहीं नहीं रुकी। ब्लैकमेलर ने अब गुनगुन से शारीरिक संबंध बनाने की माँग रख दी।
लड़की डर के मारे काँप उठी।
इस बार उसने सब कुछ माँ-बाप को
बता दिया।घर में तूफान आ गया।
माँ-बाप गुस्से में चीखे, डाँटा, रोए।
लेकिन जब गुनगुन ने आँसू पोछते हुए कहा,
तो दोनों के पैरों तले जमीन खिसक
गई —"आप दोनों तो मुझे हफ्तों में एक बार मिलते हो।
सुबह निकल जाते हो, रात को थके-हारे आते हो।
मैं अकेली... बहुत अकेली हो जाती हूँ।
मुझे सही-गलत का पता ही कहाँ था?
मुझसे गलती हो गई... माफ कर दो।"
उस छोटी सी लड़की के शब्दों ने
माँ-बाप के दिल में गहरी चुभन पैदा
कर दी।
सारी ग्लानि, सारी शर्म, सारा पछतावा एक साथ उमड़ आया।
वे समझ गए — गुनगुन की गलती नहीं थी, वो अकेलेपन की शिकार थी।
उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट लिखाई। ब्लैकमेलर पकड़ा गया।
लेकिन उस दिन के बाद उन्होंने सबसे
बड़ा फैसला लिया —
अब बेटी को समय देंगे।😐
MI का बिखराव: जब मैदान पर भिड़े कप्तान और दिग्गज!
कल रात मुंबई इंडियंस और पंजाब किंग्स के मैच में वो हुआ जिसने फैंस का दिल तोड़ दिया।
कल Mumbai Indians और Punjab Kings के मैच में जब Hardik बॉलिंग करने गया तो फील्ड सेट करते वक्त Bumrah पर भड़क गए..
फील्ड सेटिंग के दौरान बुमराह पर उनका भड़कना न सिर्फ गलत था, बल्कि डगआउट में बैठे Rohit Sharma भी इसे देखकर दंग रह गए।
हार्दिक को समझना होगा कि कप्तानी का मतलब खिलाड़ियों पर चिल्लाना नहीं, बल्कि दुनिया के नंबर 1 गेंदबाज का सम्मान करना होता है।
शायद इसी 'एटीट्यूड' की वजह से आज MI पॉइंट्स टेबल में सबसे नीचे संघर्ष कर रही है।
शायद हार्दिक को अभी रोहित और Rahane जैसे खिलाड़ियों से सीखने की जरूरत है
रोहित शर्मा के चेहरे के हाव-भाव बता रहे थे कि टीम के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है। क्या हार्दिक की यही 'ईगो' मुंबई इंडियंस को ले डूबेगी?