'यः कुटेऽनेकविधव्यवहारे स्वस्वरूपेणैव तिष्ठति स कूटस्थः परमेश्वरः' जो सब व्यवहारों में व्याप्त और सब व्यवहारों का आधार होके भी किसी व्यवहार में अपन�� स्वरूप को नहीं बदलता, इससे परमेश्वर का नाम 'कूटस्थ' है।
स्रोत - सत्यार्थ प्रकाश (प्रथमसमुल्लास :)।
लेखक - महर्षि दयानन्द स्वामी।
यदि देशहित मरना पड़े मुझे सहस्रों बार भी,
तो भी न मैं इस कष्ट को निज ध्यान में लाऊं
कभी, हे ईश भारतवर्ष में शत बार मेरा जन्म हो,
कारण सदा ही मृत्यु का देशोपकारक कर्म हो......
#नमन_रामप्रसादबिस्मिल
जो परमेश्वर अपनी विद्या का हम लोगों के लिए उपदेश ना करें तो विद्या से जो परोपकार करना ग��ण हैं सो उसका नहीं रहे। इससे परमेश्वर ने ��पनी वेद विद्या का हम लोगों के लिए उपदेश करके सफलता सिद्ध करी है, क्योंकि परमेश्वर हम लोगों का माता पिता के समान है।
( ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका)
ओ३म्
यदि देशहित मरना पड़े मुझे सहस्रों बार भी,
तो भी न मैं इस कष्ट को निज ध्यान में लाऊं
कभी, हे ईश भारतवर्ष में शत बार मेरा जन्म हो,
कारण सदा ही मृत्यु का देशोपकारक कर्म हो......
#नमन_रामप्रसादबिस्मिल
यदि देशहित मरना पड़े मुझे सहस्रों बार भी,
तो भी न मैं इस कष्ट को निज ध्यान में लाऊं
कभी, हे ईश भारतवर्ष में शत बार मेरा जन्म हो,
कारण सदा ही मृत्यु का देशोपकारक कर्म हो......
#नमन_रामप्रसादबिस्मिल
#नमन_रामप्रसाद बिस्मिल
मेरा हो मन स्वदेशी, मेरा हो तन स्वदेशी
मर जाऊं तो भी मेरा , होवे कफ़न स्वदेशी
पं. राम प्रसाद बिस्मिल
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल जी की जयंती पर
एक tweet बिस्मिल के बलिदान के नाम
#नमन_रामप्रसाद बिस्मिल
मेरा हो मन स्वदेशी, मेरा हो तन स्वदेशी
मर जाऊं तो भी मेरा , होवे कफ़न स्वदेशी
पं. राम प्रसाद बिस्मिल
पंडित राम प्रसाद बिस्मिल जी की जयंती पर
एक tweet बिस्मिल के बलिदान के नाम।।