एक आदमी ने ₹25 लाख का प्लॉट पसंद कर लिया था?
सेलर बार-बार कह रहा था कि जल्दी एडवांस दे दो, वरना कोई दूसरा खरीद लेगा।
लेकिन तभी उसके एक दोस्त ने कहा कि पैसे देने से पहले कागज जरूर चेक कर लेना।
आदमी बोला कि जमीन तो सामने दिख रही है, फिर कागजों की क्या जरूरत है।
दोस्त हंसकर बोला कि असली जमीन कागजों में होती है, मैदान में नहीं।
सबसे पहले उसने Mother Deed मांगी।
जिससे पता चलता है कि जमीन पहले किसकी थी और मालिकाना हक कैसे बदलता गया।
फिर उसने Sale Deed चेक की।
यही दस्तावेज साबित करता है कि जमीन कानूनी रूप से किसके नाम है।
इसके बाद Encumbrance Certificate निकलवाया।
ताकि पता चल सके कि जमीन पर कोई लोन, केस या कानूनी विवाद तो नहीं है।
फिर Khata Certificate देखा।
क्योंकि भविष्य में मकान बनाने और टैक्स भरने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है।
इसके बाद ROR (Record Of Rights) निकलवाया।
जिससे जमीन के रिकॉर्ड और असली मालिक की जानकारी मिल गई।
अब कैलकुलेशन शुरू हुआ।
प्लॉट की कीमत = ₹25,00,000
रजिस्ट्री खर्च लगभग = ₹1,75,000
स्टाम्प ड्यूटी और अन्य शुल्क = ₹50,000
कुल निवेश = ₹27,25,000
दोस्त बोला कि अगर एक जरूरी कागज भी गलत निकला।
तो ₹27 लाख का निवेश फंस सकता है।
फिर एक और बात सामने आई।
जिस आदमी से वह प्लॉट खरीद रहा था, वह असली मालिक नहीं था।
वह मालिक का रिश्तेदार था।
तब दोस्त ने तुरंत Power of Attorney (POA) मांगी।
क्योंकि बिना POA के वह जमीन बेच ही नहीं सकता था।
फिर सर्वे विभाग से Survey Sketch निकलवाया गया।
क्योंकि सेलर 100 गज बता रहा था।
लेकिन रिकॉर्ड में जमीन सिर्फ 92 गज निकली।
यानी 8 गज कम।
अगर उस इलाके में जमीन ₹25,000 प्रति गज थी।
तो नुकसान होता -
8 × ₹25,000 = ₹2,00,000
यानी सिर्फ एक सर्वे ने ₹2 लाख बचा दिए।
तब आदमी को समझ आया कि प्लॉट खरीदते समय सिर्फ लोकेशन और कीमत नहीं देखनी चाहिए।
कागजों की जांच कई बार लाखों रुपये के नुकसान से बचा सकती है।
अगर आपको प्लॉट खरीदना हो तो पहले एडवांस देंगे या पहले सारे दस्तावेज चेक करेंगे?
यदि आप भी केदारनाथ यात्रा के लिए जाना चाहते हैं तो आपके लिए मेरी तरफ से कुछ जानकारी एवं सुझाव-
● आप जहाँ भी रहते हैं सबसे पहले आपको यदि ट्रेन से आ रहे हैं तो आप हरिद्वार आईये यदि फ्लाइट से आ रहे हैं तो आप देहरादून आईये ।
● हरिद्वार आपका सेंटर पॉइंट है इसके बाद आप यदि केदारनाथ के लिए बस से जाना चाहते हैं तो सबसे पहले ऑनलाइन या ऑफलाइन हरिद्वार से गौरीकुंड की बस बुक कर लें क्योंकि आपको तुरंत टिकिट मिलना मुमकिन नहीं है और यदि आप कार से जाना चाहते हैं केदारनाथ तो 3 दिन के लिए कार होती है बुक और यदि केदारनाथ-बद्रीनाथ जाना चाहते हैं तो 5 दिन के लिए कार बुक होती है जो आपको हरिद्वार से केदारनाथ-बद्रीनाथ के दर्शन कराके वापिस हरिद्वार छोड़ देती है । (यदि आप कार को देहरादून बुलाना चाहें या ऋषिकेश तो वहाँ भी बुला सकते हैं)
● वैसे तो कार के रेट फिक्स नहीं है लेकिन फिर भी स्विफ्ट 3500 रुपये प्रतिदिन, अर्टिका और इनोवा 4500-5500 रुपये प्रति दिन के हिसाब से मिल जाती हैं (यदि भीड़ कम हो तो और भी सस्ती मिल जाती हैं)
● यदि आप Helicopter से जाना चाहते हैं तो सिर्फ इसी वेबसाइट से ही बुक करें- https://t.co/Kz9sEihD8E
● आने से पहले अपने रजिस्ट्रेशन इस वेबसाइट से बुक करें- https://t.co/GmtlrEf5Yg बगैर रजिस्ट्रेशन के न जाएं वरना दिक्कते हो सकती हैं वैसे ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन हरिद्वार में भी होते हैं लेकिन आप अपनी चीज़े पहले से करके आएं तो ज्यादा बेहतर हैं।
● हरिद्वार से केदारनाथ के लिए यदि कार से जा रहे हैं तो आपको आपका कार वाला रुद्रप्रयाग तक ले जाएगा फिर वहाँ से आपको 50 रुपये देकर गौरीकुंड के लिए कार मिलेंगी ।
● गौरीकुंड में स्नान करने एवं माता पार्वती जी के दर्शन के बाद आप अपनी पैदल यात्रा चालू कर सकते हैं यदि घोड़े से जाना चाहे तो 3500 रुपये के लगभग आपको देने होने जो आपको घोड़ा पड़ाव से लेकर बेसकैम्प तक छोड़ेगा ।
● पैदल यात्रा के दौरान सामान जितना कम हो सके उतना कम ले जाये (लेकिन उल्टी,दस्त, बुखार,सिर दर्द,कपूर और ठंडी का पूरा सामान रखें अपने साथ)
● गौरीकुंड से केदारनाथ लगभग 21 किलोमीटर है इसको पैदल चढ़ने में सामान्य लोगो को 5-7 घण्टे लगते हैं बस इतना याद रहे रास्ते में ज्यादा चीज़ें न खायें बस लेकिन लिक्विड चीज़ें लेते रहे जिससे चढ़ने में आपको आसानी होगी । ज्यादा रुके नहीं धीरे-धीरे चढ़ते चले ।
● शुरुवात में ज्यादा कवर करने की कोशिश करें क्योंकि छोटी लिंचौली तक थोड़े जल्दी कवर कर सकते हैं क्योंकि उसके बाद आपको हर 200 मीटर पर रुकना होगा और स्पीड कम और थकावट ज्यादा महसूस होगी ।
● बेसकैम्प में ही GMVN के टेंट होते हैं वहाँ आप अपने यात्रा की डेट के अनुसार टेंट बुक कर सकते हैं GMVN WEBSITE- https://t.co/Lam5wM1NWO
● बेसकैम्प से केदारनाथ मंदिर लगभग 1.5 किलोमीटर है,मंदिर के पास भी रूम ले सकते हैं लेकिन उनका कोई रेट फिक्स नहीं होता ।
● मंदिर में दर्शन के लिए आप बाहर से घी ले लें क्योंकि यहाँ घी लगाने और केदारेश्वर को टच करने का बहुत महत्व है दर्शन के पश्चात आप जो बाहर नन्दी जी विराजमान हैं उनके दर्शन करें और लगभग 15/30 मिनट वहाँ बैठे फ़ोटो/मोबाइल से दूर थोड़ी बाबा से भी तो बातें करना हैं न अपने को क्योंकि यहाँ (केदारनाथ) और महाकालेश्वर में जो एनर्जी है वो मैंने अभी तक कहीं महसूस नहीं कि तो मेरे कहने पर यहाँ बैठिएगा जरूर शांति से आँखे बंद करके कुछ समय ।
● गर्भगृह से दर्शन सुबह से दोपहर 12 बजे तक ही होते हैं उसके बाद बाहर से ही दर्शन होते हैं पूजा और VIP दर्शन के लिये आप मंदिर के पास से ही पास ले सकते हैं एक दिन पहले या कई बार तुरन्त भी ।
● इसके बाद मंदिर के पीछे भीम सिला है और शंकरचार्य जी की समाधि वहाँ भी दर्शन कर सकते हैं फिर उसके बाद आप लगभग मंदिर से 600 मीटर दूर भैरवनाथ जी के दर्शन भी कर सकते है ।
● यात्रा के दौरान पैसे कैश ही रखें क्योंकि कई बार नेट नहीं चलता तो चीज़ें दिक्कत करती हैं और आधारकार्ड भी साथ रखें कई बार जरूरत पड़ सकती है ।
● दर्शन के बाद शाम को सन्ध्या आरती भी देख सकते हैं वो लगभग 7 बजे होती है ।
● केदारनाथ जाने का सबसे सही समय पट खुलने से लेकर जून तक फिर सितंबर से पट बंद होने तक (बीच के समय बारिश होती है तो थोड़ा रिस्की होता है)
● यात्रा से आने के बाद आपको बार-बार लगेगा कि कब आएं दोबारा क्योंकि शिव जहाँ स्वर्ग वहाँ ।
● बाकी मर्यादाओं का ख्याल रखें ये पिकनिक स्थल नहीं है यह शिव की तपस्या की भूमि है 🙏🏻
जानकारी अच्छी लगी हो तो आप ज्यादा से ज्यादा शेयर करें बाकी कुछ लगे तो पूछ सकते हैं ।
जय केदार..कृपा अपार 🙏🏻
#Kedarnath #KedarnathTrip
संसार में सारे मौज नहीं लेते...
दो भले लोगों के बीच की यह बातचीत मैं 250 से भी ज्यादा बार सुन चुका हूं। जितनी बार भी सुनता हूं, हर बार ताज़गी और खुशी महसूस होती है।
आप भी सुनकर बताइए
सड़क पर प्रैंक बाज की मां बेन खोद दी...🤯
आम लोग हो जाते हैं परेशान,बिना परमिशन प्रैंक,
करना पड़ा भारी,क्या इस तरह से परेशान करना,
सही है या गलत,प्रैंक बाजों पर आपकी क्या राय है,
उत्तर प्रदेश ने ढाँचागत विकास में जो मानदंड बनाए हैं, वह यूपी की छवि को राष्ट्र के ग्रोथ इंजन के रूप में स्थापित करता है। ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लिए पोर्ट, कारगो टर्मिनल आदि के साथ छोटे-बड़े उद्योग आदि की आवश्यकता पड़ती ही है। आज के समय में किसी भी राज्य को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए उसी स्तर का एयरपोर्ट भी चाहिए।
जेवर वही एयरपोर्ट है जिसे सरकार ‘gateway to UP’ कह कर प्रचारित कर रही है। तीन करोड़ लोगों के जीवन को पर्यटन, रोजगार, आर्थिक तंत्र से जोड़ने वाला यह एयरपोर्ट यूपी की विकास यात्रा का इंजन बन सकता है। आशा है कि इसे डेडिकेटेड मेट्रो आदि से जोड़ कर नोएडा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को आधे-पौने घंटे की दूरी पर ला दिया जाएगा।
योगी आदित्यनाथ का पूरा विजन उत्तर प्रदेश को उस गुंडागर्दी, विकासहीनता की छवि से बाहर निकालने का है। ऐसे में यह एयरपोर्ट और संबद्ध विकास के ढाँचे नरेन्द्र मोदी के राष्ट्रीय इन्फ्रास्ट्रक्चरल विजन को भी आगे ले जाते हैं। यह #NayeUPKiUdaan है जो नए भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।
उप निरीक्षक ना०पु० एवं समकक्ष पदों पर सीधी भर्ती-2025 की लिखित परीक्षा में दिनांक 14-03-2026 को उपस्थित होने वाले परीक्षार्थी अपना प्रवेश पत्र बोर्ड की वेबसाइट https://t.co/l2LtxSzfow पर दिये गये लिंक - https://t.co/uuFkhRnJAU
से डाउनलोड करें।
-परीक्षा नियंत्रक
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड
लखनऊ ।
@CMOfficeUP@ChiefSecyUP@homeupgov@dgpup@Uppolice
व्यक्ति ट्रक की गति (50 mph forward) के साथ चल रहा है — जब वह विपरीत दिशा में 50 mph की गति से कूदता है।
तो व्यक्ति की प्रभावी जमीनी गति शून्य हो जाती है।
यह स्थिति भौतिकी के गति के नियमों के अनुसार है, लेकिन इसमें शारीरिक रूप से गंभीर चोट लगने का भी जोखिम है।
They also have the Gaushala at the entrance to bring divine blessings.
Does anyone know the name of this person or their company? https://t.co/la3sO4htdS