राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव एवं पूर्व विधायक प्रशांत बैरवा जी को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं।
आने वाला वर्ष आपके जीवन में ढेर सारी खुशियां एवं अपार सफलता लेकर आए।
@Pbmla126
"अयोध्या वालों को गाली क्यों दे रहे हो, हम तो खुद पीड़ित हैं। रामधन का डाका डाला ट्रस्ट वालों ने। सबके नाम मालूम हैं लेकिन सोशल मीडिया पर अयोध्या वालों को गंदी गंदी गाली दी जा रही है। हम तो सबको बता रहे हैं कि किसने रामधन लूट लिया। और उन्हें बचाया जा रहा है। कृपया सम्पूर्ण अयोध्यावासियों को गाली मत दीजिए।"
-इंटरनेट पर चल रहे कैम्पेन से व्यथित पूर्व मंत्री समाजवादी पार्टी अयोध्या पवन पांडेय का बयान।
#Ayodhya #Rammandir | @pawanpandeysp
BJP हिंदू धर्म की ठेकेदार नहीं है।
BJP का विरोध हिंदू धर्म का विरोध नहीं है।
वैसे तो आपके लोगों ने कभी कोई क़ुर्बानी नहीं दी, और अगर दी होती तो कोई क़ुर्बानी किसी को मंदिर लूटने का हक़ नहीं दे देती।
चानौत पानी आंदोलन के बारे में @AnoopChanot द्वारा रखे गए तथ्य जरूर पढ़े…
जालिम सरकार के दिल में लेश भर भी दया का भाव हो तो अब तो चानौत के 36 बिरादरी के ग्रामीणों की पीने के पानी के माँग को तुरंत पूरा करें…लेकिन लगता है की दया का भाव छोड़ो, इस सरकारी शासन के पास दिल भी नहीं है।
1. Editor in Chief of propaganda News agency Smita Prakash when the BJP leader protests during the rain.
2. Editor in Chief of propaganda News agency Smita Prakash when opposition protests during rain.
मारुति वाला तो कह रहा है कि 2023 से पहले की गाड़ियाँ में भी E20 से कोई दिक़्क़त नहीं है!
फिर E20 compliant कार बनाने की ज़रूरत ही क्या है?
अब शक है कि 2023 के बाद वाला भी मारुति ने E20 compliant बनाया है या पुराना इंजन ही नई बॉडी में फिट कर बेच रहा है?
"चोर निर्धन ही बस नहीं होते
धन तो धनवान भी चुराते हैं
हम तो मतदान चोर समझे थे
आप तो दान भी चुराते हैं..!!
- अल्पसंख्यक विभाग (AICC) के अध्यक्ष व माननीय सांसद श्री इमरान प्रतापगढ़ी (@ShayarImran) जी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक और खुलासा हुआ है।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक- महाकुंभ के दौरान राम मंदिर में संगठित रूप से चढ़ावा चोरी को अंजाम दिया गया।
👉जब महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या 10 से 12 गुना तक बढ़ गई तो चढ़ावे की गिनती के लिए ट्रस्ट की सिफारिश पर एक्स्ट्रा स्टाफ जोड़ा गया
👉इस एक्स्ट्रा स्टाफ में कौन से लोग शामिल होंगे, ये ट्रस्ट ने ही तय किया था
👉एजेंसी का कहना है कि एक्स्ट्रा स्टाफ में शामिल लोगों ने कभी बैंकिंग, कैश काउंटिंग का काम नहीं किया था। ये पहले हाउसकीपिंग का काम करते थे
एजेंसी के मुताबिक- वे अपनी मर्जी से लोगों को नहीं चुन सकते थे। उन्हें आदेश था कि बेसिक वेरिफिकेशन कर लोगों को चढ़ावा गिनने के काम पर लगा दिया जाए।
साफ है: BJP-RSS ने पूरी प्लानिंग के साथ इस लूट को अंजाम दिया और ऐसा कर करोड़ों रामभक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है।
सवाल है:
• नरेंद्र मोदी इस चढ़ावा चोरी पर अपनी चुप्पी कब तोड़ेंगे?
• 'डकैती' के बाद भी ट्रस्ट को भंग क्यों नहीं किया जा रहा है?
• चंपत राय समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
• क्या मोदी सरकार इस लूट के गुनहगारों को बचाने में लगी है?
Watch this- 7 term MP, Cabinet Minister, 3 term CM been put under house arrest by BJP to to not let her travel to Baruipur to meet the young rape victim. Shame Bengal govt!
जनता पूछ रही है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी के उप्र के पहले दौरे में जनता ने ‘चढ़ावा-चंदा-दान चोरी’ के गुस्से की वजह से उनका बहिष्कार तो किया ही है, क्या डबल इंजन की टकराहट भी इस सन्नाटे की वजह है?
दरअसल उप्र का भाजपा संगठन जन-आक्रोश के डर के मारे अपने घरों में दुबका बैठा है या प्रदेश से बाहर भाग गया है, नहीं तो कुछ लोग तो ज़रूर दिखाई देते, बेचारे ‘नव-निर्मित अध्यक्ष जी’ हाथ हिलाने के लिए तरसते दिखाई न देते। आज उन्हें भी पता चला होगा कि ‘5’ बड़ा या ‘7’।
भगवान से धोखा करनेवालों का दुर्भाग्य देखिए कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी का दावा करनेवालों का झंडा तक उठानेवाले अब कोई नहीं बचा, वो भी किराये पर ही लाए गए।
उप्र ने भाजपा की रिटर्न टिकट कन्फ़र्म कर दी है।
प्रभु श्रीराम किसी एक दल या विचारधारा के नहीं, पूरे देश की आस्था के केंद्र हैं।
वे कण-कण में विराजमान हैं और करोड़ों लोगों की श्रद्धा का प्रतीक हैं।
जहां तक कांग्रेस पार्टी का सवाल है, उसका हमेशा से स्पष्ट और जिम्मेदार रुख रहा है कि अयोध्या पर न्यायालय का जो भी निर्णय होगा, उसका सम्मान किया जाएगा।
लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने लगातार प्रभु श्रीराम की आस्था को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया। सच यह भी है कि राम जन्मभूमि परिसर का ताला खुलवाने का निर्णय कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुआ था।
प्रभु राम आस्था के विषय हैं, राजनीति के नहीं। उनके नाम पर समाज को जोड़ने का काम होना चाहिए, बांटने का नहीं।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में एक और खुलासा हुआ है।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक- महाकुंभ के दौरान राम मंदिर में संगठित रूप से चढ़ावा चोरी को अंजाम दिया गया।
👉जब महाकुंभ के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या 10 से 12 गुना तक बढ़ गई तो चढ़ावे की गिनती के लिए ट्रस्ट की सिफारिश पर एक्स्ट्रा स्टाफ जोड़ा गया
👉इस एक्स्ट्रा स्टाफ में कौन से लोग शामिल होंगे, ये ट्रस्ट ने ही तय किया था
👉एजेंसी का कहना है कि एक्स्ट्रा स्टाफ में शामिल लोगों ने कभी बैंकिंग, कैश काउंटिंग का काम नहीं किया था। ये पहले हाउसकीपिंग का काम करते थे
एजेंसी के मुताबिक- वे अपनी मर्जी से लोगों को नहीं चुन सकते थे। उन्हें आदेश था कि बेसिक वेरिफिकेशन कर लोगों को चढ़ावा गिनने के काम पर लगा दिया जाए।
साफ है: BJP-RSS ने पूरी प्लानिंग के साथ इस लूट को अंजाम दिया और ऐसा कर करोड़ों रामभक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है।
सवाल है:
• नरेंद्र मोदी इस चढ़ावा चोरी पर अपनी चुप्पी कब तोड़ेंगे?
• 'डकैती' के बाद भी ट्रस्ट को भंग क्यों नहीं किया जा रहा है?
• चंपत राय समेत अन्य लोगों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?
• क्या मोदी सरकार इस लूट के गुनहगारों को बचाने में लगी है?
यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को स्वयं के राज्य की इतनी बड़ी परियोजना पचपदरा रिफाइनरी के इतिहास और शिलान्यास की बुनियादी जानकारी तक नहीं है। मीडिया के समक्ष उनका यह दावा कि वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया था, पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से गलत है। पूर्व में रिफाइनरी में केन्द्र और राज्य की हिस्सेदारी को लेकर वे गलत बयानी कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री जी को शायद यह ज्ञात ही नहीं है कि पचपदरा रिफाइनरी का वास्तविक शिलान्यास वर्ष 2013 में ही यूपीए चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी एवं तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री श्री वीरप्पा मोइली द्वारा किया जा चुका था। ये तस्वीरें उसी मौके की है।
इसके विपरीत, केंद्र सरकार और राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पांच साल तक ठंडे बस्ते में डालकर अटकाए रखा, जिससे इसकी लागत 37,000 करोड़ रुपए से दोगुनी बढ़कर लगभग 80,000 करोड़ रुपए हो गई।
राजस्थान में रिफाइनरी की स्थापना के लिए 'हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड' (एचपीसीएल) को राजी करना भी एक बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। सामान्यतः रिफाइनरी परियोजनाओं में राज्य सरकार की कोई हिस्सेदारी नहीं होती है, परंतु एचपीसीएल को सहमत करने के लिए राजस्थान सरकार ने दूरदर्शिता दिखाते हुए रिफाइनरी में 26% (छब्बीस प्रतिशत) की हिस्सेदारी ली। इसी के परिणामस्वरूप यह 'एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड' (एचआरआरएल) नामक संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) बना, जिसने इस रिफाइनरी का निर्माण किया है।
मुख्यमंत्री जी को यदि इतिहास की जानकारी नहीं है, तो वे सार्वजनिक रूप से गलत बयानबाजी करने के बजाय अपने अधिकारियों से सही आंकड़े और दस्तावेज मंगवाकर पढ़ लें।