बिनु बिस्वास भगति नहिं ,तेहि बिनु द्रवहिं न राम।
राम कृपा बिनु सपनेहु , जीव न लह विश्राम।
🌱बिना विश्वास ��े भक्ति सम्भव नहीं है।
भक्ति के बिना श्रीराम जी द्रवित नहीं होते अर्थात कृपा नहीं करते और बिना श्रीराम जी की कृपा के जीव को स्वप्न में भी विश्राम नहीं मिलता,अम्मा