चिकित्सा विभाग में वार्ड बॉय के पदों को शामिल करना बहुत ही निंदनीय है ।
सभी साथी संगठित होकर आवाज उठाएंगे यदि कुछ भी गलत होता है तो 🙏
#चतुर्थ_श्रेणी_भर्ती
🛑 अन्याय हुआ है ✅
4th Grade में जिनको चिकित्सा विभाग मिला, उनको Ward boy की पोस्ट दी गयी है ✅
विभाग 8000 candidates को मिला था लेकिन 4th grade के लगभग 1500 ही पद रिक्त थे ✅
अपनी इतनी बड़ी गलती को भरने के लिए , Ward boy बना रहे हैं 🛑
अब कहाँ गए बेरोजगार नेता ?
@HANUMANKISAN
Similarly GST is charged on merchants not consumers.
TDS is paid by Employers not Employees.
@nsitharaman, country is blessed to have a genius like you as Finance Minister.
@Omrlp07 तो क्या हो गया,
24लाख में से एक नौकरी पाई है, जश्न तो मनाएगा ही।
काम करने में कैसी शर्म, घर खेत मे घास नहीं काटते क्या? काम कर रहा है तो सैलरी भी मिलेगी।
और वो भाई, अपनी मेहनत से यहाँ तक पहुंचा है, ओर आगे भी जाएगा🙏
@alokrajRSSB अगर server based है तो अच्छा heavy load ले सकने वाला server लेना।
हमने देखा है बोर्ड की वेबसाइट का हाल, थोड़े से Trafic आने पर hang कर जाती है
इथेनॉल का मामला अजीब ही है।
भारत में बहुत इथेनॉल नहीं बनता।
अस्सी पर्सेंट एथेनॉल मंहगे दामों पर अमेरिका वगैरह से आयात होता है।
बाकी बीस परसेंट जो भारत में बनता है उसे बनाने वाली कंपनियों को भारत सरकार करोड़ों अरबों रुपए की सब्सिडी देती है कि थोड़ा सस्ता पड़े पर पैसा तो भारतीय टैक्स पेयर का ही जाता है न?
उसके बाद अगर वैकल्पिक इंधन की बात करें तो पेट्रोल के बजाय सीधे पूर्ण इथेनॉल ही अगर वैकल्पिक ईंधन बन सकता हो और कच्चा तेल आयात की जरूरत बिल्कुल ही न पड़े तो फिर भी ठीक है।
पेट्रोल से महंगा एथेनाल मंगा कर या बना कर उसे पेट्रोल में ही मिक्स करना है तो सादा पेट्रोल क्या बुरा?
फिर मान लो भारत में ही इथेनॉल बनता हो और थोक के भाव मिलता हो तो भी ठीक,
पर इथेनॉल भारत में अभी बहुत कम बनता है, सब्सिडी देकर सस्ता पड़ता है।
इसके अलावा इथेनॉल अगर गाड़ियों के लिए लाभदायक हो तो भी ठीक।
एथेनाल गाड़ियों के लिए लाभदायक भी नहीं।
जब एथेनाल सस्ता नहीं,भारत में सर्वसुलभ नहीं, भारत में बल्क उत्पादन भी नहीं, आम आदमी की गाड़ियों के लिये ठीक भी नहीं, तो फिर इथेनॉल पर इतना जोर क्यों?
इससे ज़्यादा तो सोलर ऊर्जा या किसी वैकल्पिक ईंधन पर जोर देना चाहिए!
या फिर भारत सरकार ईवी बनाने वाली कंपनियों की राह आसान कर रही?
कोई स्वार्थ है?
@BJP4India F1 cars engine अपने Lifetime में कितनी दूरी तक चलते है?
और कितने सालों तक एक ही इंजन प्रयोग में लाया जाता है,
ये भी क्लियर कर देते तो सारे डाउट खत्म हो जाते
> "15,000 RPM और 17:1 के कम्प्रेशन रेशियो पर चलने वाले F1 इंजन - जो केवल 3 रेस के बाद बदल दिए जाते हैं - की तुलना आम गाड़ियों से करना बेहद बचकानी बात है। हायर ऑक्टेन का फ़ायदा तब मिलता है जब इंजन का कम्प्रेशन उस हिसाब से ट्यून हो। F1 टिकाऊपन (longevity) की बलि देकर सिर्फ़ पीक परफॉर्मेंस चुनता है, जबकि आम गाड़ियों को माइलेज और ड्यूरेबिलिटी चाहिए। इस X-हैंडल मैनेजर को ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का 'अ' भी नहीं पता। पार्टी के ऑफिशियल हैंडल से ऐसा बचकाना ट्वीट करना यह साफ दिखाता है कि पार्टी का इकलौता मकसद सिर्फ जनता को गुमराह करना है।"
#EthanolScam
@OGTeamBharat@tehseenp@FactswithDinesh@Nidhzee@theracemonkey@Shankyram2