‘23 में 12’ ये किसी इम्तिहान का रिज़ल्ट नहीं है बल्कि अलीगढ़ में भाजपा नेताओं के बीच हुए घमासान में गोलियों के स्नेह आदान-प्रदान का दुर्दांत आँकड़ा है। ये वारदात तब हुई, जब भाजपा के डबल डिब्बों के बीच आपस में 23 सेकंड में 12 राउंड गोलियाँ चलीं।
लोगों को लगा कि कहीं हर काम उल्टा करनेवाले भाजपाई होली मिलन में दिवाली तो नहीं मना रहे हैं।
दरअसल ये जाते-जाते लूटे माल के बँटवारे की लड़ाई है।
भाजपा के बेधड़क भ्रष्टाचार काल में अब तो कैमरे का भी लिहाज़ नहीं रहा, अंडर टेबल तो सुना था, यहाँ तो ओवर टेबल पैसा लिया जा रहा है। अब टेबल के ऊपर से घूस लेने में अधिकारियों को कोई झिझक नहीं है क्योंकि ऊपर तक जाता भी है।
भाजपा राज में पैसे के पहिये लगाये बिना कोई फ़ाइल आगे नहीं बढ़ती है। कैमरे के सामने इस तरह का अवैध कार्य करने की प्रेरणा के पीछे चंडीगढ़ का भाजपाई महाकाण्ड है
देखते हैं इस घूसख़ोर पुलिसवाले का निलंबन होता है या ‘गुड वर्क’ के प्रशंसा-पत्र के साथ प्रमोशन।
भाजपा राज़ मतलब महाभ्रष्टाचार!
स्त्रियों के प्रति आमूलचूल दृष्टिकोण को बदलने की आवश्यकता है। इसीलिए हमने कहा है ‘फसल बदलनी है तो बीज बदलने होंगे!’
आज़ाद हवा की शुभकामनाओं के साथ ‘महिला दिवस’ की हार्दिक बधाई!
कल प्रयागराज और आज गोरखपुर में अपहरण की वारदातों से उत्तर प्रदेश के लोगों में दहशत फैल गयी है। सवाल ये है कि :
- अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हैं?
- अपराधियों के मन में सत्ता का कोई डर क्यों नहीं है?
- अपराधियों के शासन-प्रशासन के लोगों से मिलीभगत है क्या?
- क्या भाजपा राज में अपहरण एक संस्थागत रूप ले रहा है?
- जब तक विपक्ष आवाज़ नहीं उठाता है, तब तक भाजपा सरकार व उसकी पुलिस कार्रवाई क्यों नहीं करती है?
जो भारतीय पत्रकार इज़राइल में फँसे हैं वो प्रधानमंत्री जी के साथ गये तो ‘पॉलिटिकल जर्नलिस्ट’ की तरह थे पर अब वो ‘वॉर जर्नलिस्ट’ बनने पर मजबूर हैं। उनके परिजन और शुभचिंतक सभी बेहद चिंतित और परेशान हैं और भाजपा सरकार से नाराज़ भी। वो कह रहे हैं, जब साथ लेकर गये थे तो साथ लेकर आना भी चाहिए। ये कहाँ की नैतिकता है कि ख़ुद तो आ गये और युद्ध के भयावह हालातों में पत्रकारों को बेसहारा छोड़ आए।
भाजपा ने शिक्षा को रद्दी कर दिया है।
भाजपा सरकार ने पहले उप्र में, विलय के नाम पर 27000 सरकारी स्कूलों को बंद करने की साज़िश की थी और अब राज्यसभा में शिक्षा-विरोधी भाजपा सरकार ने ये स्वीकार किया है कि पिछले 5 सालों के भाजपा शासनकाल में 18,727 सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। ये हमारे देश के भविष्य के विरुध्द एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है। क्या भाजपाई और उनके संगी-साथी ये चाहते है कि अमीरों के बच्चे तो पढ़ें लेकिन पीडीए समाज के शोषित-वंचित बच्चे नहीं और पीडीए समाज के बच्चे श्रमिक-मज़दूर बनकर ही रह जाएं।
भाजपा की शिक्षा विरोधी सोच ही किताब नहीं बँटवा रही है, सरकारी स्कूलों को बंद करवा रही है। भाजपाई जानते हैं कि शिक्षा से लोगों में जागरूकता और वैज्ञानिक चेतना आती है जो भाजपा की दक़ियानूसी, रूढ़िवादी, संकीर्ण सोच और तंग नज़रिये को उखाड़ फेंकने का काम करेगी। इसीलिए भाजपाई शिक्षा और ज्ञान-विज्ञान के ख़िलाफ़ रहते हैं तथा उनके संगी-साथी अपनी अति-संकीर्ण मानसिकता व एकरंगी नकारात्मक विचारधारा के तहत ही बच्चों को ढालना चाहते हैं।
बच्चों से शिक्षा-तालीम का अधिकार छीनना, भाजपाइयों का सामाजिक अपराध है। सरकारी शिक्षा के छिनने से सबसे ज़्यादा नुक़सान पीडीए समाज के लोगों को ही होगा क्योंकि शिक्षा के साथ-साथ पोषण के लिए मिलनेवाला मिड-डे मील भी बच्चों को नहीं मिलेगा, जिसका बुरा असर बच्चों के मानसिक-शारीरिक विकास पर होगा।
हमारा मानना है कि अगला चुनाव ऐतिहासिक होगा जब शिक्षा का विषय, भाजपा को हराने-हटाने के लिए एक निर्णायक मुद्दा बनेगा क्योंकि ग़रीब से ग़रीब परिवार और ख़ासतौर से हर माँ अपने बच्चे को पढ़ाना चाहती है। इस बार महिलाएं ही भाजपा को हराएंगी। भाजपा खातों में कुछ पैसे डालने का दिखावा करेगी लेकिन गाँव-गली-मोहल्ले तक ये बात फैल चुकी है कि अगर सरकारी स्कूल बंद हो गये तो प्राइवेट स्कूलों की लूट शुरू हो जाएगी और खाते में जितना आएगा नहीं उससे ज़्यादा बच्चों की पढ़ाई में ही चला जाएगा। अब लोग समझ गये हैं कि भाजपा जितना देती नहीं है उससे कहीं ज़्यादा सामानों के दाम बढ़ाकर और बिजली-पानी के बिल, गैस-डीज़ल-पेट्रोल-सिलेंडर, मोबाइल रिचार्ज, रेल-बस किराये, टोल-पार्किंग को महंगा करके व अन्य टैक्सों को बढ़ाकर वसूल लेती है।
अगर सरकारी शिक्षा ख़त्म हो गयी तो महंगाई और बेकारी-बेरोज़गारी के मारे लोग बच्चों को पढ़ा ही नहीं पायेंगे और जो किसी भी तरह पढ़ाना भी चाहेंगे तो उनकी सारी कमाई, प्राइवेट स्कूलों की भारी भरकम फ़ीस, यूनिफ़ॉर्म-ड्रेस; किताब-कॉपी-स्टेशनरी; बस्ता-बोटल-टिफ़िन; रिक्शा-बस, प्रोजेक्ट-एसाइनमेंट;, स्कूल फ़ंक्शन-पिकनिक के खर्चों में ही निकल जाएगी।
इसके अतिरिक्त जो स्कूल चल भी रहे हैं वहाँ भी भाजपा शिक्षा का काम चलने ही नहीं देना चाहती है और शिक्षकों को पढ़ाई की जगह अन्य कामों में लगा देती है। इससे सच्चे शिक्षकों का मनोबल गिरता है क्योंकि उन्हें लगता है कि वो पढ़ाने का अपना कर्तव्य पूरा नहीं कर पा रहे हैं। इस कारण शिक्षक-शिक्षार्थी और अभिभावक का संबंध भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। भाजपा सरकार की शिक्षा-विरोधी नीतियों की वजह से समाज में शिक्षा-शिक्षक के मान-सम्मान को चोट पहुँची है। इसीलिए शिक्षक समाज में भाजपा के ख़िलाफ़ गहरी नाराज़गी और असंतोष है। अगले चुनाव में भाजपा की हार के मुख्य कारणों में एक कारण शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विद्यालयों के कर्मचारियों व शिक्षा से वंचित होते बच्चों के माता-पिता और उनके परिवार के अन्य लोगों का भाजपा के विरुध्द आक्रोश भी होगा।
लगता है ‘पीडीए पाठशाला’ के सांकेतिक आंदोलन को एक वास्तविक आंदोलन के रूप में बदलना होगा, तभी शोषित-वंचित समाज की पीढ़ियाँ आगे पढ़ और बढ़ पाएंगी।
आइए हम सब मिलकर शिक्षा को बचाएं, अपने बच्चों का भविष्य बनाएं!
"अधिकारी और सरकार ने मिलकर 10 हजारों लोगों का फेक एनकाउंटर किया, समाजवादी पार्टी के लोगों को झूठा जेल भेजा।"
- माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आपको हार्दिक शुभ कामनाएँ । देवाधिदेव महादेव की आप पर सदैव कृपा बनी रहे ।
केदारेश्वर महादेव इटावा में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ दर्शनों के लिए उमड़ी है
ये है भ्रष्ट भाजपा की चोरी के सबूत… बिना नंबर प्लेट के तस्करी के वाहन चलवानेवाले दूसरों से सर्टिफिकेट माँग रहे हैं।
उप्र भाजपाई भ्रष्टाचार के महा-दलदल में फँस गया है।
भाजपा सरकार में बच्चों को मिल रहा है ‘पौष्टिक पानी’। बच्चों के माता-पिता पूछ रहे हैं कि हजारों करोड़ के बजट में दूध शामिल है या पानी?
‘वन-टू का फोर’ तो सुना था यहाँ तो ‘वन-टू का एट’ टाइपवाला ‘महा-मिलावट घोटाला’ चल रहा है। मिलावट के ख़िलाफ़ भाजपा सरकार का ऐलान क्या कमीशन की रेट बढ़ाने का दवाब मात्र तो नहीं। जो बच्चों के मुँह से दूध छीन रहे हैं, उनका पाप ही उनको ले डूबेगा।
बच्चों का मोल परिवारवाले ही जानते हैं।
भाजपा सरकार का भ्रष्टाचार, उनके हर काम को कुकर्म में बदल देता है।
बेहद शर्मनाक और घोर निंदनीय!
सम्राट हर्षवर्धन और पृथ्वीराज चौहान जी से ऐतिहासिक रूप से जुड़ी रही ‘इत्र नगरी कन्नौज’ में भाजपा और उनके संगी-साथियों का जो सम्मेलन हो रहा है, उसमें इस विषय पर भी बात होगी क्या कि पीडीए समाज के एक व्यक्ति द्वारा यहाँ मंदिर में दर्शन करने पर गंगाजल से धुलवाने का जो कृत्य किया गया था, उस बारे में इस सम्मेलन का क्या विचार है। हो सके तो पास की राजधानी में गंगाजल से घर धुलवाने पर भी विचार कर लें और कथावाचक वाले मामले का भी।
निवेदक : पीडीए समाज
अब ‘पीडीए सरकार’ आएगी और समाजवादी पेंशन से भी आगे जाकर ‘स्त्री सम्मान-समृद्धि योजना’ लाएगी, हर नारी के सिर से बोझ हटाएगी, तरक़्क़ी के नये रास्ते बनाएगी, हर घर को ख़ुशहाली से भरकर दिखाएगी।