SDMने मीडिया में स्वीकार किया है कि जिला कलेक्टर के कहने पर उन्होंने"मतदान बहिष���कार"के रिकार्ड को तोड़ने के लिए समरावता पोलिंग बूथ में3कर्मचारियों से मतदान कराया था मतदान स्वैच्छिक होता है चाहे कर्मचारी हो या आमजन.फिरSDMने क्यों दबाव से मतदान कराकर हालात ख़राब कराने की शुरुआत की!
RPSC असिस्टेंट प्रोफ़ेसर भर्ती में आदिवासी और दलितों की हकमारी के ख़िलाफ़ हमारे जान प्रतिनिधियों ने भ��� आवाज़ बुलंद करना शुरू कर दिया हैं।
अशोक गहलोत जी आप हमारे अधिकारों को छीन लेंगे और बचकर निकल जा��ँगे ऐसा हम नहीं होने देंगे, आपको विज्ञापन में सुधार करना होगा। बाक़ी आपको बता दे कि RPSC जातिवादी संस्थान बन गया हैं। जहाँ ST, SC, OBC, MBC की हकमारी होती हैं।
RSS और बीजेपी के लोग आदिवासियों, दलितों को हिन्दू बताने में एक मिनट नहीं लगाते हैं लेकिन अधिकारों कि बात होती हैं तब ग़ायब हो जाते हैं।
@ashokgehlot51
@RPSC1
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती SC/ST/MBC के साथ बड़ा धोखा परंतु कोई नेता या मीडिया आवाज उठाने को तैयार नही है क्यों ??
वर्तमान सरकार में SC/ST/MBC के लगभग 78 MLA है परंतु ये सब गुलामी में जीवनयापन कर रहें है कम से सरकार के साथ इन MLAs को भी शर्म करनी चाहिए।
@ashokgehlot51@RajCMO
SC/ ST के युवा छात्रों के साथ अन्याय कर रहे है आपके उच्च शिक्षा विभाग में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन विषय के 71 पदों में SC+ST की मात्र 3 सीट,..
अन्य विषयों में भी ऐसा ही हाल है कृप्या संज्ञान लेवे।
@ashokgehlot51@RajendraSYadav_@RajCMO@RahulGandhi
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मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी,
2014 में 153 ST, SC,
2023 में 125 ST, SC
2020 में ओबीसी की सीटें,
आपकी जातिवादी RPSC ने ग़ायब कर दी लेकिन आपको कोई फर्क नहीं पड़ा, इस बार हम भी अपनों वोटों को इसी तरह ग़ायब कर देंगे फिर देखते है आपको फ़र्क़ पड़ता है या नहीं ?
आदिवासी, दलित, MBC और पिछड़े तबके से यहीं कहना हैं की आप अपने विधायकों के भरोसे मत रहो वे ख़ुद आपके भरोसे बैठे हैं। यदि ���प अपना हक़ चाहते हो तो लड़ो।
..@RPSC1 को तुरंत इस असिस्टेंट
प्रोफ़ेसर भर्ती विज्ञापन में सुधार करना चाहिए अन्यथा RTI के जरिए रोस्टर की माँग से शुरू करते हुए, कोर्ट, कचहरी, धरना, प्रदर्शन इन सभी के लिए तैयार रहें। जब तक विज्ञापन में सुधार नहीं हो जाता हैं हम लोग अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाते रहेंगे।
RPSC ने अपने नोटिफ़िकेश में ST को 230 की जगह 184 सीट दी है, SC को 306 की जगह 223 और MBC को 96 की जगह सिर्फ़ 93 पद दिये है..! क���ंग्रेस का थैला उठाने वाले नेता और दरी ��िछाने वाले कार्यकर्ता चुप क्यों बैठे है.? ST-SC-MBC हितैषी इस तथाकथित कांग्रेस सरकार से सवाल पूछिए..! जोहार..!
सवर्ण EWS आरक्षण की असंवैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट फिर से 9 मई से विचार करेगा।
पिछली बार चीफ़ जस्टिस ललित ने पाँच सवर्ण जजों की बेंच बनाई थी। इस बार चंद्रचूड़ ने फिर से पाँच सवर्ण जजों की बेंच बनाई है। इनमें चार वही जज हैं जो पिछली बेंच में थे।
इन पाँच में से त्रिवेदी, माहेश्वरी और पारदीवाला सवर्ण आरक्षण को सही ठहरा चुके हैं। (देखिए फ़ोटो)
जबकि अब तक केंद्र सरकार यही साबित नहीं कर पाई है कि देश में 10% सवर्ण हैं।
इस वर्ग का हर क्षेत्र में अपनी आबादी से दो या तीन गुना ज्यादा प्रतिनिधित्व है।
ऐतिहासिक रूप से प्रभावशाली रहे समुदाय को आरक्षण देने का ये दुनिया क��� पहला मामला है। वरना आरक्षण हमेशा वंचितों को दिया जाता है।