भाई, समझ सबको आ रहा है। अगर लोग पानी रोकने जैसे कदम उठा रहे हैं तो उसके पीछे यह भावना है कि उनकी मांगें अभी तक सरकार ने नहीं मानी हैं।
अब मीणा बंधुओं को भी यह सोचना चाहिए कि उनकी मांग सरकार से है, इसलिए सरकार पर ही दबाव बनाया जाए। दोनों समाज संयम बरतें और कानून-व्यवस्था का मामला प्रशासन पर छोड़ें। टकराव से किसी का भला नहीं होगा, नुकसान दोनों पक्षों का होगा।
शायद समझ आपको नहीं आ रहा कि आपका उपयोग क्यों हो रहा है।
@BarwalMuk58662 भाई, हम भी सब देख और सुन रहे हैं। शुरुआत कहीं से भी हुई हो, लेकिन हम नहीं चाहते कि इसका अंत बुरा हो। किसी भी तरफ से मामला खराब हुआ तो नुकसान दोनों समाजों का होगा। इसलिए संयम और शांति बनाए रखें, क्योंकि टकराव में किसी का भला नहीं है।
यदि गुर्जर समाज सरकार से अपने हिस्से के पानी की मांग कर रहा है, तो इससे मीणा बंधुओं को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। मीणा बंधुओं को भी अपनी मांग सरकार के समक्ष रखनी चाहिए। पानी उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है, और हमारी इच्छा है कि पानी सबको मिले तथा उसका न्यायपूर्ण वितरण हो।
भाई, गुर्जर तो वैसे भी राजनीतिक अनाथ रहे हैं। हम सदियों से नुकसान झेलते आए हैं, एक बार फिर झेल लेंगे।
पर फिर भी हमारा मानना है कि किसी का नुकसान न हो। इसलिए हम लगातार प्रयास कर रहे हैं कि मामला शांति और समझदारी से सुलझे। देखते हैं, इसमें हम कहाँ तक सफल होते हैं।
दो समाजों के बीच टकराव में किसी की जीत नहीं होती, आखिर में नुकसान दोनों तरफ के लोगों का ही होता है।
सरकार का मंत्री तो आपकी तरफ भी है। बोलने के लिए तो यह भी कहा जा सकता है कि सरकार ने आपको भी चढ़ा रखा है।
मैं तो कह रहा हूँ भाई, अगर आपको लगता है कि गुर्जरों ने गलत किया है तो सरकार से कार्रवाई करवा लो, गोलियां चलवा लो। पर मीणा बंधु खुद क्यों भिड़ रहे हैं? हो सकता है आप बलवान हों, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि नुकसान आपकी तरफ नहीं होगा।
क्या आप चाहते हैं कि दोनों तरफ मातम हो?
अगर आप यही चाहते हैं, तो हम गुर्जर सरकार की गोलियों का सामना करने को तैयार हैं, पीछे नहीं हटेंगे। परंतु मीणा बंधुओं को संयम बरतना चाहिए। उन्हें समझना चाहिए कि उनका उपयोग हो रहा है, और यह भी पहचानना चाहिए कि उनका उपयोग कौन कर रहा है।
@Rajasthan_Radio हम तो सभी भाषणों को सुन रहे हैं, तोप वाला भी सुना, "चिन्ह मिटा देंगे" वाला भी सुना। हम तो सुन ही रहे हैं भाई।
भाई, गुर्जरों ने पानी रोक लिया तो आप सरकार के पास जाओ, उनसे बोलो कि गुर्जरों पर गोली चला दे।
मीणा बंधु क्यों गुर्जरों से लड़ना चाहते हैं? इससे किसका लाभ होगा?
नरेश मीणा हमारे बीच आएंगे तो उनका स्वागत है, लेकिन पानी पर पहला हक हमारा है। जब तक हमारे खेतों तक पानी नहीं पहुंचेगा, तब तक हम संतुष्ट नहीं होंगे। - साहब सिंह गुर्जर
भजनलाल शर्मा जी की भाजपा सरकार से आग्रह है कि पंचना बांध के पानी का ऐसा समाधान निकाला जाए जिससे मीणा और गुर्जर दोनों समाजों के किसानों को पानी मिले। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाना ही सरकार की प्राथमिकता होनी चाहिए।
न किसी समाज के प्रति ज़हर और न ही अमर्यादित भाषा।
अपनी बात को संयम और मर्यादा के साथ रखना, हाकिम बैसला जी के धैर्य और परिपक्व नेतृत्व को दर्शाता है। इतने दबाव के बावजूद वे अपनी बात शांत और संतुलित तरीके से रख रहे हैं।
गुर्जर समाज ने हमेशा भाईचारे को मजबूती से निभाया है और आज भी संयम, संवाद और सामाजिक सौहार्द की राह पर चल रहा है।
न किसी समाज के प्रति ज़हर और न ही अमर्यादित भाषा।
अपनी बात को संयम और मर्यादा के साथ रखना, हाकिम बैसला जी के धैर्य और परिपक्व नेतृत्व को दर्शाता है। इतने दबाव के बावजूद वे अपनी बात शांत और संतुलित तरीके से रख रहे हैं।
गुर्जर समाज ने हमेशा भाईचारे को मजबूती से निभाया है और आज भी संयम, संवाद और सामाजिक सौहार्द की राह पर चल रहा है।
तंवर खाप आप सभी से अनुरोध करती है कि पंचना बांध के मुद्दे पर धैर्य और संयम बनाए रखें।
गुर्जर समाज, यदि इस संघर्ष में कोई बलिदान अपेक्षित है तो इस समय आपका धैर्य ही आपका सबसे बड़ा बलिदान है।
कुछ लोग अमर्यादित भाषा और भड़काऊ बयानबाजी के माध्यम से बुजुर्गों द्वारा वर्षों में बनाए गए गुर्जर-मीणा भाईचारे को खंडित करने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे तत्वों के बहकावे में न आएं।
तंवर खाप मीणा समाज के बंधुओं से भी आग्रह करती है कि कृपया संयम बरतें। पहलवान बनने की होड़ में किसी भी समाज का नुकसान न होने दें। भाईचारा, शांति और सामाजिक सौहार्द ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
रामकेश मीणा ने खंडीप मीणा पंचायत में जो बिसात बिछाई है क्या इसका मकसद सिर्फ गुर्जरों को चुनौती - गालियां देना - नस्लें मिटाना है ?
राजस्थान वीरों की धरती है इस धरती पर इतना मलेछपन आजाद भारत में कभी नहीं देखने को मिला।
क्या मीणा समुदाय इन अराजक तत्वों का समर्थन कर रहा है अगर नहीं तो इनके जूते क्यों नहीं बजाए जा रहें ?
बाकी प्रदेश की सरकार से मेरी अपील है कि इन अराजक तत्वों को पालन-पोषण के बजाय लठ्ठ पेलकर इलाज करें।
ये राजस्थान में अराजक दंगा फसाद करवाना चाहते हैं
पांचना बांध के मुद्दे पर गुर्जर समाज के सभी भाई-बहनों से निवेदन है कि धैर्य, संयम और एकता बनाए रखें।
किसी भी उकसावे, बहस या भड़काऊ बयानबाजी में न पड़ें तथा अपने बड़े-बुजुर्गों, समाज के नेतृत्व और जनप्रतिनिधियों पर विश्वास बनाए रखते हुए उनके साथ मजबूती से खड़े रहें।
समाज की ताकत उसकी एकजुटता, समझदारी और अनुशासन में होती है। अपने अधिकारों की लड़ाई शांति, संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रखें। समय आने पर समाज के हित में जो भी निर्णय होगा, वह सामूहिक रूप से लिया जाएगा। जय गुर्जर समाज।
हमारी गुर्जर भाइयों से कोई लड़ाई नहीं है, वे हमारे भाई हैं। हमें सरकार से पानी चाहिए। गुर्जर भाई हमें क्या पानी देंगे, उन्हें भी हमारी तरह पानी की जरूरत है।
— बहन बबीता मीणा जी
बहन बबीता मीणा जी का यह बयान उन लोगों के लिए करारा जवाब है जो गुर्जर और मीणा समाज के बीच नफरत की दीवार खड़ी करने में लगे हुए हैं। पानी का मुद्दा सरकार और प्रशासन से जुड़ा है, न कि दो भाईचारे वाले समाजों के बीच संघर्ष का।
आज जब कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए समाजों को आपस में लड़ाने की कोशिश कर रहे हैं, तब बबीता मीणा जी ने भाईचारे, समझदारी और सामाजिक सौहार्द का संदेश देकर एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत किया है।
@imHimmatsinghG1@RahulGandhi@SachinPilot