मैं सीखना चाहता हूं
फिर से जीना...
बच्चों की तरह बढ़ना
घुटनों के बल चलना
अपने पैरों पर खड़े होना
और अंतिम बार
लड़खड़ा कर गिरने से पहले
मैं कामयाब होना चाहता हूं
फिर एक बार
जीने में.....🙏
कक्षा 8 की NCERT की सामाजिक विज्ञान विषय पाठ्यपुस्तक (Unit 3, पृष्ठ संख्या 71) में दर्शाए गए मानचित्र में जैसलमेर को तत्कालीन मराठा साम्राज्य का भाग दर्शाया गया है, जो कि ऐतिहासिक रूप से भ्रामक, तथ्यहीन और गम्भीर रूप से आपत्तिजनक है।
इस प्रकार की अपुष्ट और ऐतिहासिक साक्ष्यविहीन जानकारी न केवल NCERT जैसी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि हमारे गौरवशाली इतिहास और जनभावनाओं को भी आघात पहुंचाती है। यह विषय केवल एक पाठ्यपुस्तक की त्रुटि नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों के बलिदान, संप्रभुता और शौर्य गाथा को धूमिल करने का प्रयास प्रतीत होता है।
जैसलमेर रियासत के संदर्भ में उपलब्ध प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों में कहीं भी मराठा आधिपत्य, आक्रमण, कराधान या प्रभुत्व का कोई उल्लेख नहीं मिलता। इसके विपरीत, हमारी राजकीय पुस्तकों में भी स्पष्ट उल्लेखित है कि जैसलमेर रियासत में मराठाओं का कभी भी, कोई दखल नहीं रहा।
माननीय शिक्षा मंत्री श्री @dpradhanbjp जी, संपूर्ण जैसलमेर परिवार की ओर से मैं आपका ध्यान इस ज्वलंत विषय की ओर आकृष्ट करना चाहता हूँ कि NCERT द्वारा की गई इस प्रकार की त्रुटिपूर्ण, दुर्भावनापूर्ण और एजेंडा-प्रेरित प्रस्तुति को गंभीरता से लेते हुए तत्काल संशोधन करवाया जाए।
यह केवल एक तथ्य संशोधन नहीं, बल्कि हमारी ऐतिहासिक गरिमा, आत्मसम्मान और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की सत्यनिष्ठा से जुड़ा विषय है। इस विषय पर त्वरित एवं ठोस कार्रवाई की अपेक्षा है। @ncert
जब हम हल्दीघाटी के युद्ध की बात करते हैं, तो अक्सर हमारे सामने एक वीर महाराणा प्रताप की छवि उभरती है, अपराजेय, अडिग, और आत्मसम्मान की मिसाल। लेकिन इस युद्ध में एक और नाम भी है, जिसे इतिहास ने उतनी जगह नहीं दी और वो नाम है राजा मानसिंह का।
युद्ध होना तय था, लेकिन ये कोई साधारण युद्ध नहीं था। इसकी रणनीति, इसकी भावनाएं और इसके पीछे छुपे निर्णय... सब कुछ असाधारण था। राजा मानसिंह ने युद्ध से पहले प्रताप को सम्मान सहित समय दिया। युद्ध के मैदान में भी प्रताप को निकलने का पूरा अवसर दिया गया। न तो कोई स्पष्ट विजेता घोषित हुआ, और न ही मेवाड़ की अस्मिता झुकी।यह युद्ध केवल तलवारों से नहीं, दिलों से लड़ा गया। हर युद्ध में केवल हार-जीत नहीं होती, कई बार समर्थन मौन होता है, कई बार समर्पण चुपचाप होता है।
राजा मानसिंह ने प्रताप को पकड़ने से इनकार कर दिया। उन्होंने मुग़ल सेना को उनका पीछा करने से रोका और इस की सज़ा उन्हें खुद अकबर ने दी, उन्हें दरबार से बाहर कर दिया गया।
लेकिन क्या इतिहास ने इस नायक को उसका सम्मान दिया? नहीं। बहुत से इतिहासकारों ने मानसिंह को केवल एक मुग़ल सेनापति तक सीमित कर दिया। लेकिन सच्चाई ये है कि वह एक धर्मनिष्ठ, मंदिरों के संरक्षक, और प्रताप के सम्मान में खड़े रहने वाले वीर हिंदू राजा थे।
इतिहास की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि वह देर से सही, लेकिन न्याय करता है। और मुझे विश्वास है, कल नहीं तो परसों, भारत का इतिहास राजा मानसिंह को भी उसी श्रद्धा और सम्मान से देखेगा, जैसे वह महाराणा प्रताप को देखता है।
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अगर आप नार्थ इंडिया में बड़े बड़े मंदिर देख रहे है या उन मंदिरों के जरिये बचाये गए धर्म की आस्था को समझ रहे है तो उसके पीछे जयपुर के राजा मानसिंह प्रथम के योगदान को जरूर याद रखें। इतिहास में धर्म के लिए किये गए राजा मानसिंह के कार्यों के लिए हिन्दू धर्म सदा ऋणी रहेगा #RajaMansingh #Mansingh1st #JaipurKings #Hindu #Dharma #Temples #SanatanaDharma
मिर्ज़ा राजा मान सिंह प्रथम, आमेर के सूर्यवंशी कच्छवाहा राजपूत राजा, महान योद्धा, कुशल सेनापति और भव्य मंदिरों के निर्माता थे। उनकी सैन्य रणनीति और प्रशासनिक क्षमता अतुलनीय थी। उनकी पुण्यतिथि पर दूरदर्शन परिवार की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।
#ManSingh#DeathAnniversary #DeshkaPehlaChannelDeshkaApnaChannel
पाकिस्तान से तनाव की स्थित में -
कुछ फौजी परिवारों ने #SayNoToWar की अपील की !
ये देख कर उन क्षत्रिय माताओं के प्रति सम्मान बढ़ जाता है -
जो देश धर्म की रक्षा के लिए अपने 12-12 साल के लडकों को युद्ध भूमि में भेज दिया करती थी !
श्रीनगर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए प्राणों की आहुति देने वाले राजपुत हॉस्टल अलवर के साथी, नवलपुरा के वीर सपूत जितेन्द्र सिंह राजपूत को विनम्र श्रद्धांजलि। इस दुख की घड़ी में ईश्वर उनके परिजनों को सम्बल प्रदान करे व माँ भारती के लाल को अपने श्री चरणों में स्थान दें।
ॐ शांति!
@AjiHaaan माहौल तो उसी के खिलाफ होगा जो सत्ता में होगा , सत्ता का दुरुपयोग करेगा , निरकुंश का विरोध जरूरी हो जाता है जब वो हमारे ही महापुरुषों को जातियों में बांटे, इतिहास का विकृतिकरण हो और जिस नेता के जो मन में आए बयान दे , स्वाभिमान और आत्मसम्मान की लड़ाई जरूरी है .
@aajtak ये विरोध सिर्फ आपका नही है ,ये विरोध। है इतिहास विकृतिकरण के लिए , महापुरुषों के सम्मान के लिए जिनकी जातियां बदली जा रही है ...
अब ये स्वाभिमान और आत्म सम्मान की लड़ाई है क्षत्रिय समाज के लिए ..
@_rajanyas @KshatriyaItihas@rajput_of_india@Annu_Rathore_
'गलती मैंने की, PM मोदी पर मत निकालें अपना गुस्सा...', परषोत्तम रूपाला ने क्षत्रिय समाज से फ़िर मांगी माफ़ी
परषोत्तम रूपाला ने क्षत्रिय समुदाय से कहा, "आप अपने राष्ट्र के योगदान को याद करें, बीजेपी के विकास में भी आपका बड़ा योगदान याद रहा है. 18 घंटे काम करने वाले पीएम मोदी जब देश के अलावा कुछ ना सोच रहे हों, 140 करोड़ लोगों को अपना परिवार समझते हों, पीएम मोदी की विकास यात्रा में अनेक क्षत्रिय साथ रहे हैं, तो उनका विरोध मेरी वजह से क्यों? मेरी गलती मैं स्वीकार करता हूं. लेकिन पीएम मोदी के खिलाफ क्षत्रिय समुदाय को खड़ा कर देना मुझे सही नहीं लगता. पीएम के खिलाफ दर्शाए जा रहे आक्रोश को लेकर पुनर्विचार करें."
पूरी खबर: https://t.co/vV9nWhToRp
#ParshottamRupala #Elections #Gujarat #Politics #NarendraModi
कोई क्षत्रिय स्वतंत्र राजनीति न कर पाए इसलिए सभी राजनीतिक दल मिलकर @RavindraBhati__ को कमजोर दिखाने का प्रयास कर रहे है।
लेकिन भाई ने अकेले system Hang कर रखा है।
#ravindrasinghbhati