یہ صرف دنیاوی تعلیم کی وجہ سے نہیں ہو رہا ہے، بلکہ معاشی صورت حال خراب ہونے اور گھروں میں ڈر کا ماحول بناکر، بچنے کے لئے بذدلوں کی طرح مشرقوں کی پارٹیوں کو ووٹ دینے کا انجام ہے۔ جس کی وجہ سے لڑکیاں مشرقوں کے ساتھ جا رہی ہیں۔
ایسےخلاف قرآن کاموں کو خودارہ بند کریں۔
@MuftiAsjadRaza
VHP मुखिया डॉ. तोगड़िया ने बताया कि, जब दंगे होते है... तब कोई कांग्रेस या भाजपा वाला नहीं रहता.. बल्कि सभी पार्टियों के कार्यकर्ता मुसलमानों के दुश्मन बन जाते है। इसलिए सभी धर्मनिरपेक्ष पार्टियों पर थूकिए और सिर्फ अपनी मस्लकी एमडीपी पार्टी को वोट करें, काम आएगी।
राजस्थान के करौली में कांग्रेस की गहलोत सरकार @ashokgehlot51 और @rss@BJP4India आरएसएस-बीजेपी ने मिलकर मुस्लिम बहुल इलाके की मस्जिद के पास करवाया दंगा। जहां काँग्रेसी प्रशासन की मदद से भगवा दंगाईयों ने 36 मुसलमानों की दुकानों और मकानों को जला डाला।
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@MohdSam93602839 एक तरफ ईमानवाले और दूसरी तरफ काफिर, मुर्तद, मुनाफिक, बदमज़हब, बदअ़कीदा इनमें कल्मे की बुनियाद पर क़यामत की सब्ह तक सुलह के इम्कान नहीं...अगरचे बातिल तौबा करके राहे रास्त अख़्तियार कर ले। बदमज़हबों बदअ़क़ीदा से बचने का हुक्म ज़ुरुर है क़रीब सौ अहादीसे करीमा का...2
@iman_tanzim@ArshadWarsiMDP Abhi bhi sunni aur wahabi kr rhe ho bhot sharam ki bat h , tm log apne apko jannati smjh rhe ho bakiyon ko dujakhi jabki iska faisala Allah karega ....aur samajwadi party koi aimim ke wajah se nhi hari h balki evm haking 👍
@pakkasunni एक तो दीन का इल्म हासिल नहीं करते, जो दीन की अहम बातें बताएं उन्हें लान-तान करना और ख़ुद बेहुदा बेइल्म बेग़ैरती से ढिठाई बरतते हैं। रब तआ़ला ने मौक़ा दिया है तो दीन सीख लो, सांस रुक जाए फिर तो बस ख़सारा ही ख़सारा है।
के दर का भिकारी बनाकर ही रखा जायेगा। सुन्नियों का मरकज बरैली शरीफ और वहिंपर खामोशी भरा सन्नाटा आखिर कब तक?वैसे ही बहोत देर हो चुकी है।तब पछताए का बने जब चिड़िया चुग जावे खेत।यह खामोश मिजाजी हमें जीने नहीं देगी, इस दौर में क्या, हर दौर में जीना हो तो वसीयते आला हज़रत लागू करो...
क्या गद्दारे आला हजरत होकर ही सियासत में आ सकता है, वफादार ए आला हज़रत की ख़ामोशी बाइस ए तश्वीश है, वफादार ए आला हज़रत सिर्फ़ मसलके आला हज़रत के नारे ही लगाते-लगवाते रहेंगे। कब वसीयत ए आला हज़रत पर अमल पैरा होकर कौम को बुलंदियों पर ले जाने की काविशें होगी... या कौम को यूंही गैरों